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महंगे होते स्मार्टफोन: 2026 में क्यों सिकुड़ रहा है भारत का बाज़ार

Aditya Nair Aditya Nair adityanair.avalw.com · 494 reads Respect0 Save Share Read only
READS366live count PUBLISHED1 Sept2026 READING TIME3 min682 words LANGUAGEHindi
AI CITATIONS? Gathering data

मेमोरी की बढ़ती कीमतों और महंगे होते फोन के कारण 2026 में भारत का स्मार्टफोन बाज़ार दबाव में है। बजट सेगमेंट जहां गिर रहा है, वहीं प्रीमियम फोन की मांग तेज़ी से बढ़ रही है।

बाज़ार पर पैनी नज़र रखने वाली शोध संस्था काउंटरपॉइंट रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई अहम कारण मौजूद हैं। इनमें सबसे प्रमुख है फोन की लगातार बढ़ती कीमतें, जिसने आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डाला है और उनके खरीदारी के फैसलों को गहराई से प्रभावित किया है।

गिरता हुआ बाज़ार

आंकड़ों की बात करें तो, साल 2026 की दूसरी तिमाही यानी अप्रैल से जून के बीच, भारत में स्मार्टफोन की शिपमेंट में सालाना आधार पर पूरे दस प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह किसी भी जून तिमाही के लिहाज़ से बीते छह वर्षों का सबसे कमज़ोर प्रदर्शन बताया जा रहा है, जो चिंता का विषय है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पूरे साल के लिए अनुमान भी बहुत उत्साहजनक नहीं हैं। काउंटरपॉइंट के मुताबिक, साल 2026 में कुल मिलाकर दस से तेरह प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है, जो शिपमेंट को साल 2013 के बाद के सबसे निचले स्तर पर ले जाएगी।

मेमोरी की महंगाई

इस पूरी गिरावट के केंद्र में एक बेहद अहम कारण छिपा हुआ है, और वह है मेमोरी की आसमान छूती कीमतें। रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 के बाद से मेमोरी की कीमतें लगभग चार गुना तक बढ़ गई हैं, जिसने फोन बनाने की कुल लागत को काफ़ी हद तक बढ़ा दिया है और निर्माताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

इस बढ़ी हुई लागत का सीधा और स्पष्ट असर फोन के अंतिम दाम पर पड़ा है। बताया जा रहा है कि दूसरी तिमाही के अंत तक स्मार्टफोन की औसत कीमतों में लगभग पंद्रह प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी थी। ऐसे में किफ़ायती होना ही इस समय पूरे बाज़ार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

बजट फोन पर सबसे ज़्यादा मार

बढ़ती कीमतों के बीच आम उपभोक्ता स्मार्टफोन खरीदने में अधिक सतर्कता बरत रहे हैं।
बढ़ती कीमतों के बीच आम उपभोक्ता स्मार्टफोन खरीदने में अधिक सतर्कता बरत रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे ज़्यादा नुकसान बजट यानी सस्ते फोन खरीदने वाले उपभोक्ताओं और उस श्रेणी को उठाना पड़ा है। पंद्रह हज़ार रुपये से कम कीमत वाले सेगमेंट में शिपमेंट में सालाना आधार पर पैंतालीस प्रतिशत की भारी गिरावट देखने को मिली, जो अपने आप में एक बेहद चिंताजनक आंकड़ा है।

यह गिरावट इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत जैसे विशाल बाज़ार में बड़ी संख्या में लोग इसी सस्ती श्रेणी के फोन ही खरीदते हैं। जब इस वर्ग के फोन भी महंगे होने लगते हैं, तो कई संभावित खरीदार अपनी खरीदारी को कुछ समय के लिए टाल देते हैं, जिससे समूचे बाज़ार पर दबाव और अधिक बढ़ जाता है।

प्रीमियम सेगमेंट की चमक

हालांकि, इस निराशाजनक तस्वीर के बीच एक क्षेत्र ऐसा भी है जो लगातार अपनी चमक बिखेर रहा है, और वह है प्रीमियम यानी महंगे फोन का सेगमेंट। जहां एक ओर सस्ते फोन की मांग घट रही है, वहीं दूसरी ओर प्रीमियम फोन की बिक्री में उल्लेखनीय रूप से बहत्तर प्रतिशत तक की ज़बरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है।

इसी तरह, चार सौ से छह सौ डॉलर की कीमत वाले फोन की श्रेणी में भी सालाना आधार पर साठ प्रतिशत से अधिक की उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इसकी बाज़ार हिस्सेदारी भी पहले के चार दशमलव आठ प्रतिशत से बढ़कर आठ दशमलव छह प्रतिशत तक पहुंच गई, जो एक स्पष्ट रुझान की ओर इशारा करती है।

4जी की वापसी

बढ़ती कीमतों के इस दौर में एक और बेहद दिलचस्प रुझान देखने को मिल रहा है, और वह है 4जी फोन की धमाकेदार वापसी। चूंकि किफ़ायती 5जी फोन अब पहले की तुलना में काफ़ी महंगे हो गए हैं, इसलिए कई कंपनियां प्रवेश स्तर की कीमतों को बनाए रखने के लिए दोबारा से 4जी मॉडल पेश कर रही हैं।

इसी वजह से बाज़ार में 4जी स्मार्टफोन की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग ग्यारह दशमलव एक प्रतिशत तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही 5जी लंबी अवधि में विकास का मुख्य इंजन बना रहेगा, लेकिन जब तक कीमतें पूरी तरह स्थिर नहीं होतीं, तब तक 4जी की भूमिका बेहद अहम बनी रहेगी।

आगे क्या?

कुल मिलाकर देखा जाए तो, साल 2026 भारत के स्मार्टफोन बाज़ार के लिए एक बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण साल साबित हो रहा है। एक ओर जहां आम उपभोक्ता लगातार महंगाई से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रीमियम खंड तेज़ी से फल-फूल रहा है। आने वाले महीनों में बाज़ार किस दिशा में जाएगा, यह काफ़ी हद तक कीमतों के स्थिर होने पर निर्भर करेगा।

1 responses

मेमोरी के बारे में अच्छा संदर्भ.

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Aditya Nair 2026-09-01 · 3 min read · 366 reads
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