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क्रिप्टो अपनाने में भारत फिर अव्वल: लगातार तीसरे साल दुनिया में नंबर एक

Ananya Iyer Ananya Iyer ananyaiyer.avalw.com · 3.8k reads Respect0 Save Share Read only
READS32live count PUBLISHED21 Sept2026 READING TIME4 min808 words LANGUAGEHindi
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चेनालिसिस की ताज़ा वैश्विक रैंकिंग में भारत लगातार तीसरे साल क्रिप्टो अपनाने में पहले स्थान पर है। भारी टैक्स के बावजूद देश ने सभी उपश्रेणियों में शीर्ष स्थान हासिल किया है।

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जब बात डिजिटल मुद्राओं को अपनाने की आती है, तो पूरी दुनिया में सबसे आगे कौन है? इसका जवाब कई लोगों को थोड़ा चौंका सकता है, क्योंकि यह कोई पश्चिमी देश नहीं, बल्कि भारत है। ताज़ा वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, आम लोगों के स्तर पर क्रिप्टो को अपनाने के मामले में भारत ने एक बार फिर पूरी दुनिया को पीछे छोड़ दिया है।

लगातार तीसरा साल शीर्ष पर

ब्लॉकचेन का विश्लेषण करने वाली प्रसिद्ध कंपनी चेनालिसिस हर साल एक वैश्विक क्रिप्टो अडॉप्शन इंडेक्स जारी करती है। इसकी नवीनतम रिपोर्ट में भारत लगातार तीसरे वर्ष पहले स्थान पर रहा है। यह उपलब्धि इसलिए और भी बड़ी हो जाती है, क्योंकि भारत ने इस बार सूचकांक की सभी चार उपश्रेणियों में एक साथ शीर्ष स्थान हासिल किया है।

भारत के बाद इस सूची में कौन-कौन है, यह भी अपने आप में दिलचस्प है। दूसरे स्थान पर संयुक्त राज्य अमेरिका है, और उसके ठीक बाद पाकिस्तान, वियतनाम तथा ब्राज़ील का नंबर आता है। इस सूची से साफ है कि क्रिप्टो की असली लहर अब केवल अमीर देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सबसे मज़बूत नज़र आती है।

भारी टैक्स के बावजूद

कड़ी कर नीति के बावजूद भारत में क्रिप्टो को अपनाने का उत्साह लगातार मज़बूत बना हुआ है (प्रतीकात्मक तस्वीर)।
कड़ी कर नीति के बावजूद भारत में क्रिप्टो को अपनाने का उत्साह लगातार मज़बूत बना हुआ है (प्रतीकात्मक तस्वीर)।

भारत की यह बढ़त और भी अधिक उल्लेखनीय हो जाती है जब हम देश की कड़ी कर नीति को ध्यान में रखते हैं। भारत में क्रिप्टो से होने वाले मुनाफ़े पर पूरे 30 प्रतिशत का भारी टैक्स लगता है, और इसके अलावा हर एक लेनदेन पर एक प्रतिशत का टीडीएस भी काटा जाता है। ऐसी सख़्त नीतियाँ आमतौर पर किसी भी बाज़ार का उत्साह पूरी तरह ठंडा कर देती हैं।

फिर भी, इतने कड़े नियमों के बावजूद भारतीय उपयोगकर्ताओं का उत्साह ज़रा भी कम नहीं हुआ है। यह इस बात को दर्शाता है कि देश में डिजिटल मुद्राओं के प्रति रुचि वास्तव में कितनी गहरी है। जहाँ ऊँचे टैक्स कई अन्य देशों में लोगों को हतोत्साहित कर देते हैं, वहीं भारत में यह रुझान लगातार मज़बूत और स्थिर बना हुआ है।

करोड़ों उपयोगकर्ता

संख्याओं की भाषा में यह पूरी तस्वीर और भी स्पष्ट हो जाती है। एक अनुमान के अनुसार, भारत में लगभग 11.9 करोड़ लोग क्रिप्टो के मालिक हैं। यह आँकड़ा दुनिया भर के कुल क्रिप्टो उपयोगकर्ताओं का लगभग 15 प्रतिशत बनता है, जो वैश्विक स्तर पर करीब 86.1 करोड़ आँका गया है। यानी हर सात में से लगभग एक उपयोगकर्ता भारतीय है।

मापने का तरीका बदला

इस साल चेनालिसिस ने अपने सूचकांक की पद्धति में भी कुछ अहम बदलाव किए हैं। रिटेल डीफ़ाई नामक एक उपश्रेणी को इस बार हटा दिया गया, क्योंकि यह आम उपयोगकर्ताओं की कुल गतिविधि का बहुत छोटा हिस्सा ही दर्शाती थी। इसके बजाय एक नई श्रेणी जोड़ी गई है, जो दस लाख डॉलर से बड़े लेनदेन पर विशेष रूप से नज़र रखती है।

यह बदलाव अपने आप में एक बड़े रुझान की ओर साफ इशारा करता है। दस लाख डॉलर से अधिक के लेनदेन को अलग से मापने का फैसला बताता है कि अब पारंपरिक वित्तीय संस्थान और पेशेवर निवेशक भी बड़े पैमाने पर क्रिप्टो में हिस्सा ले रहे हैं। यह क्षेत्र अब केवल आम खुदरा निवेशकों तक ही सीमित नहीं रह गया है।

एशिया की तेज़ रफ़्तार

क्षेत्रीय स्तर पर भी आँकड़े काफी प्रभावशाली हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में प्राप्त कुल मूल्य में साल-दर-साल लगभग 69 प्रतिशत की ज़बरदस्त वृद्धि हुई, जो करीब 1.4 लाख करोड़ डॉलर से बढ़कर लगभग 2.36 लाख करोड़ डॉलर तक पहुँच गया। यह वृद्धि दुनिया के किसी भी अन्य क्षेत्र की तुलना में सबसे तेज़ रही।

अन्य क्षेत्रों में भी इस दौरान अच्छी बढ़त देखने को मिली। लैटिन अमेरिका में लगभग 63 प्रतिशत, उप-सहारा अफ़्रीका में करीब 52 प्रतिशत और उत्तरी अमेरिका में लगभग 49 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यूरोप भी लगभग 42 प्रतिशत की वृद्धि के साथ इस दौड़ में पीछे नहीं रहा। यानी क्रिप्टो का विस्तार अब लगभग पूरी दुनिया में तेज़ी से हो रहा है।

बिटकॉइन का दबदबा

तमाम अलग-अलग डिजिटल मुद्राओं के बीच बिटकॉइन आज भी सबसे आगे बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, मापी गई अवधि में अकेले बिटकॉइन में 1.2 लाख करोड़ डॉलर से अधिक की राशि आई, जो एथेरियम की तुलना में लगभग 70 प्रतिशत अधिक है। यह दर्शाता है कि निवेशकों का भरोसा आज भी सबसे पुरानी क्रिप्टो मुद्रा पर सबसे अधिक मज़बूत है।

यह इतना मायने क्यों रखता है

भारत की यह अग्रणी स्थिति केवल एक सूखा आँकड़ा भर नहीं है। यह देश की युवा आबादी, तेज़ी से बढ़ते डिजिटल भुगतान और नई तकनीक को अपनाने की गहरी उत्सुकता को दर्शाती है। साथ ही यह नीति निर्माताओं के लिए भी एक स्पष्ट संकेत है कि इतनी बड़ी और सक्रिय उपयोगकर्ता संख्या को अब नज़रअंदाज़ करना आसान नहीं रह गया है।

कुल मिलाकर, चेनालिसिस की यह रिपोर्ट भारत की एक बेहद अनोखी कहानी बयाँ करती है। भारी टैक्स और तमाम अनिश्चितताओं के बावजूद, देश ने क्रिप्टो को अपनाने के मामले में दुनिया का नेतृत्व करना जारी रखा है। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत अपने इस शीर्ष स्थान को बरकरार रख पाता है, और नीतियाँ इस उत्साह को आगे किस दिशा में ले जाती हैं।

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Ananya Iyer 2026-09-21 · 4 min read · 32 reads
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