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भारत में क्रिप्टो का दोराहा: भारी टैक्स, रिकॉर्ड अपनाना और अधूरा नियमन

Ananya Iyer Ananya Iyer ananyaiyer.avalw.com · 3.8k reads Respect0 Save Share Read only
READS50live count PUBLISHED22 Sept2026 READING TIME4 min764 words LANGUAGEHindi
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भारत में क्रिप्टोकरेंसी पर न प्रतिबंध है और न पूर्ण नियमन, लेकिन कराधान और रिपोर्टिंग सख्त होती जा रही है। जानिए 2026 में टैक्स नियम, प्रवर्तन और संसदीय बहस।

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भारत में क्रिप्टोकरेंसी एक दिलचस्प विरोधाभास की स्थिति में है। एक ओर देश दुनिया में इसे अपनाने के मामले में सबसे आगे है, तो दूसरी ओर सरकार न तो इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रही है और न ही इसे औपचारिक रूप से मान्यता दे रही है। इसी बीच कराधान और रिपोर्टिंग के नियम लगातार सख्त होते जा रहे हैं, जिससे उपयोगकर्ताओं के लिए तस्वीर जटिल बनी हुई है।

कानूनी स्थिति

सबसे पहले कानूनी स्थिति को समझना जरूरी है। भारत में बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी को खरीदने, रखने या बेचने पर फिलहाल कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन यह वैध मुद्रा यानी लीगल टेंडर भी नहीं है। कानून इसे एक करयोग्य वर्चुअल डिजिटल एसेट के रूप में मानता है, न कि पैसे के रूप में, और यही अंतर आगे के सभी नियमों की नींव रखता है।

रिकॉर्ड स्तर पर अपनाना

अपनाने के आंकड़े वाकई प्रभावशाली हैं। रिपोर्टों के अनुसार, भारत क्रिप्टो अपनाने में वैश्विक स्तर पर अग्रणी है, जहां 2025 में लगभग 11.9 करोड़ उपयोगकर्ता थे और यह संख्या 2026 के अंत तक करीब 12.3 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार, भारतीय लेनदेन का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा विदेशी मंचों पर होता है।

भारी कराधान

क्रिप्टो बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच भारत में नियामक ढांचा धीरे-धीरे स्पष्ट होता जा रहा है (प्रतीकात्मक तस्वीर)
क्रिप्टो बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच भारत में नियामक ढांचा धीरे-धीरे स्पष्ट होता जा रहा है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

क्रिप्टो से होने वाली कमाई पर कर का बोझ काफी अधिक है। धारा 115BBH के तहत वर्चुअल डिजिटल एसेट के हस्तांतरण से हुए लाभ पर 30 प्रतिशत की सपाट दर से कर लगता है, साथ ही अधिभार और उपकर भी। इसके अलावा धारा 194S के तहत 1 प्रतिशत का टीडीएस भी काटा जाता है। खास बात यह है कि एक टोकन में हुआ नुकसान दूसरे के लाभ से समायोजित नहीं किया जा सकता।

नया रिपोर्टिंग नियम

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक नया नियम भी लागू हुआ है। धारा 285BAA के तहत रिपोर्टिंग की आवश्यकता 1 अप्रैल 2026 से, यानी वित्त वर्ष 2026-27 से प्रभावी है, जिसके तहत निर्दिष्ट संस्थाओं को क्रिप्टो लेनदेन का विवरण दाखिल करना होगा। देर से दाखिल करने पर प्रतिदिन 200 रुपये और गलत जानकारी देने पर 50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

वैश्विक ढांचे से तालमेल

भारत अपने नियमों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढाल रहा है। जुलाई 2026 में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने रिपोर्टिंग करने वाले सेवा प्रदाताओं के लिए 198 पन्नों का मार्गदर्शन जारी किया, जो आर्थिक सहयोग और विकास संगठन के क्रिप्टो एसेट रिपोर्टिंग ढांचे के अनुरूप है। इसके तहत पहली रिपोर्टिंग 31 मई 2027 तक करनी होगी।

सख्त होता प्रवर्तन

नियमों के साथ-साथ प्रवर्तन भी तेज हुआ है। दिसंबर 2025 में सामने आई जानकारी के अनुसार, अधिकारियों ने लगभग 888.82 करोड़ रुपये की बिना घोषित क्रिप्टो आय का पता लगाया। इसके अलावा, रिपोर्टिंग न करने वाले व्यापारियों को एक अभियान के तहत 44,057 संदेश भेजे गए, और सितंबर 2026 में वित्तीय खुफिया इकाई ने नियमों का पालन न करने वाले 15 विदेशी ऐप्स को हटाने का आदेश दिया।

पंजीकृत मंच

घरेलू स्तर पर वैध रूप से काम करने वाले मंचों की संख्या भी बढ़ी है। 2026 के मध्य तक करीब 54 वर्चुअल डिजिटल एसेट सेवा प्रदाता पंजीकृत हो चुके थे, जिनमें CoinDCX, CoinSwitch, WazirX, ZebPay और Mudrex जैसे नाम शामिल हैं। यह पंजीकरण प्रक्रिया उपयोगकर्ताओं को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह मंच उपलब्ध कराने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है।

संसद में बहस

नियमन को लेकर सरकार का रुख हाल ही में और स्पष्ट हुआ। 16 सितंबर 2026 को हुई एक सुनवाई में वित्त संबंधी संसदीय समिति के सामने आर्थिक मामलों का विभाग मौखिक साक्ष्य देने पहुंचा। समिति के अध्यक्ष के अनुसार, सरकार वर्चुअल डिजिटल एसेट को स्वीकार नहीं कर रही और उसे नियमित भी नहीं करना चाहती, हालांकि उन्होंने माना कि नियमन न करने से कुछ गलत गतिविधियों की गुंजाइश भी बनी रहती है।

यह दुविधा उद्योग और उपयोगकर्ताओं दोनों के लिए अनिश्चितता पैदा करती है। एक ओर करोड़ों लोग इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं और भारी कर चुका रहे हैं, तो दूसरी ओर स्पष्ट नियमन की अनुपस्थिति में उन्हें पूरी कानूनी सुरक्षा नहीं मिलती। यही खींचतान भारत के क्रिप्टो परिदृश्य को इस समय सबसे अधिक परिभाषित करती है।

आगे की राह

निकट भविष्य में तस्वीर बहुत नाटकीय रूप से बदलती नहीं दिख रही। विशेषज्ञों के अनुसार, नीति अनिश्चितता से हटकर सख्त नियंत्रण की ओर बढ़ रही है, लेकिन पूर्ण प्रतिबंध के बिना। कर की दरें स्थिर हैं, जबकि रिपोर्टिंग, केवाईसी और प्रवर्तन लगातार कड़े होते जा रहे हैं, जिससे अनुपालन ही आगे का सबसे बड़ा विषय बन गया है।

कुल मिलाकर, 2026 में भारत का क्रिप्टो सफर एक नाजुक संतुलन पर टिका है। यह न तो खुली छूट है और न ही पूर्ण प्रतिबंध, बल्कि दोनों के बीच का एक जटिल रास्ता है। आने वाले महीनों में सरकार, नियामक और उपयोगकर्ता किस तरह तालमेल बिठाते हैं, यही तय करेगा कि यह उभरती तकनीक देश में किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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Ananya Iyer 2026-09-22 · 4 min read · 50 reads
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