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डिजिटल रुपये की वैश्विक छलांग: क्या ब्रिक्स देशों की CBDC मिलकर डॉलर को चुनौती देंगी?

Ananya Iyer Ananya Iyer ananyaiyer.avalw.com · 3.6k reads Respect0 Save Share Read only
READS581live count PUBLISHED26 Aug2026 READING TIME3 min686 words LANGUAGEHindi
AI CITATIONS? Gathering data

घरेलू लेन-देन से आगे बढ़कर भारत का डिजिटल रुपया अब एक बड़े भू-राजनीतिक दांव का हिस्सा बन रहा है। ब्रिक्स देशों की डिजिटल मुद्राओं को जोड़ने की योजना डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिश है।

अब तक भारत में डिजिटल रुपये की चर्चा ज्यादातर घरेलू स्तर पर होती रही है, जैसे कि यह रोजमर्रा के भुगतान में यूपीआई से कैसे मुकाबला करेगा। लेकिन इसकी कहानी का एक नया और कहीं अधिक महत्वाकांक्षी अध्याय अब सामने आ रहा है, जो सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति से जुड़ा हुआ है।

घरेलू दायरे से आगे की सोच

भारतीय रिज़र्व बैंक अब डिजिटल रुपये को सिर्फ एक घरेलू भुगतान माध्यम के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि उसे सीमाओं के पार ले जाने की तैयारी कर रहा है। इसी सोच के तहत केंद्रीय बैंक ने सरकार से आग्रह किया है कि ब्रिक्स देशों की डिजिटल मुद्राओं को आपस में जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ा जाए।

यहाँ ब्रिक्स से आशय उन प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह से है, जिसमें ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। इन देशों की अपनी-अपनी केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं को एक साझा ढांचे में जोड़ने का विचार, वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है।

डिजिटल रुपये की वैश्विक छलांग: क्या ब्रिक्स देशों की CBDC मिलकर डॉलर को चुनौती देंगी?

इस योजना का मुख्य उद्देश्य सीमा पार व्यापार को आसान बनाना और उसे तेज़ तथा सस्ता करना है। यदि ये डिजिटल मुद्राएँ सीधे एक-दूसरे से जुड़ जाएँ, तो दो देशों के बीच लेन-देन के लिए किसी तीसरी मुद्रा पर निर्भर रहने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो सकती है, जो एक बड़ी सुविधा होगी।

डॉलर पर निर्भरता का सवाल

इस पूरी पहल के केंद्र में एक बहुत बड़ा रणनीतिक लक्ष्य छिपा है, और वह है अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को कम करना। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय व्यापार का एक बड़ा हिस्सा डॉलर में होता है, जिससे व्यापार करने वाले देशों को कई बार अतिरिक्त लागत और भू-राजनीतिक जोखिमों का सामना करना पड़ता है।

ब्रिक्स देश लंबे समय से एक ऐसी व्यवस्था की तलाश में हैं, जिसमें वे आपस में अपनी ही मुद्राओं में व्यापार कर सकें। डिजिटल मुद्राओं को जोड़ने की यह योजना उसी दिशा में एक ठोस और आधुनिक कदम है, जो तकनीक के सहारे इस पुराने लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश करती है।

भारत के लिए यह कदम कई मायनों में महत्वपूर्ण है। एक ओर यह देश की वित्तीय संप्रभुता को मजबूत करता है, तो दूसरी ओर यह डिजिटल रुपये को एक वैश्विक भूमिका में स्थापित करने का अवसर देता है, जिससे भारत की अंतरराष्ट्रीय आर्थिक हैसियत और मजबूत हो सकती है।

मजबूत होती घरेलू नींव

यह वैश्विक महत्वाकांक्षा हवा में नहीं टिकी है, बल्कि इसके पीछे डिजिटल रुपये की लगातार बढ़ती घरेलू नींव है। रिपोर्टों के अनुसार डिजिटल रुपये में होने वाले लेन-देन की संख्या और कुल मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो दर्शाता है कि यह प्रयोग धीरे-धीरे लोगों के बीच जगह बना रहा है।

इसके अलावा, केंद्रीय बैंक इस मुद्रा को और अधिक उपयोगी बनाने के लिए नई तकनीकी सुविधाओं का भी परीक्षण कर रहा है। इनमें ऐसी व्यवस्था शामिल है जिससे इंटरनेट के बिना भी भुगतान किया जा सके, जो देश के उन इलाकों के लिए बेहद उपयोगी हो सकती है जहाँ कनेक्टिविटी कमजोर है।

यह घरेलू मजबूती ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वसनीयता का आधार बनती है। कोई भी देश तभी अपनी डिजिटल मुद्रा को वैश्विक मंच पर पेश कर सकता है, जब वह घर में भरोसेमंद और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जा रही हो, और भारत इसी दिशा में कदम दर कदम आगे बढ़ रहा है।

चुनौतियाँ और आगे का रास्ता

हालाँकि, इतनी बड़ी योजना को हकीकत में बदलना आसान नहीं है। अलग-अलग देशों की तकनीकी प्रणालियों, कानूनों और नियमों को आपस में जोड़ना एक बेहद जटिल काम है, जिसके लिए गहरे आपसी विश्वास और लंबे समय तक चलने वाले राजनीतिक सहयोग की आवश्यकता होगी।

इसके साथ ही, निजी क्रिप्टोकरेंसी को लेकर आरबीआई का रुख कड़ा बना हुआ है, और वह डिजिटल रुपये को ही एक सुरक्षित और नियंत्रित विकल्प के रूप में आगे बढ़ा रहा है। इस तरह भारत की रणनीति निजी डिजिटल संपत्तियों पर लगाम कसने और अपनी संप्रभु मुद्रा को बढ़ावा देने के दोहरे रास्ते पर चल रही है।

कुल मिलाकर, डिजिटल रुपये की यह वैश्विक छलांग सिर्फ तकनीक की कहानी नहीं है, बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था में भारत की नई भूमिका की झलक है। यह योजना सफल होगी या नहीं, यह तो समय बताएगा, पर इतना तय है कि पैसे का भविष्य अब सीमाओं से परे नए सिरे से लिखा जा रहा है।

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CBDC: साफ और अच्छे से समझाया.

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Ananya Iyer 2026-08-26 · 3 min read · 581 reads
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