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भारत में क्रिप्टो कर 2026: 30 प्रतिशत कर और नए नियम जो जानना ज़रूरी है

Ananya Iyer Ananya Iyer ananyaiyer.avalw.com · 3.8k reads Respect0 Save Share Read only
READS55live count PUBLISHED24 Sept2026 READING TIME4 min761 words LANGUAGEHindi
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भारत में क्रिप्टो पर 30 प्रतिशत कर और 1 प्रतिशत टीडीएस बरकरार हैं, जबकि अप्रैल 2026 से नई रिपोर्टिंग व्यवस्था लागू हो गई है। जानिए मुख्य नियम, आसान भाषा में।

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भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर उत्सुकता लगातार बनी हुई है, लेकिन इस पर लगने वाले कर के नियम काफ़ी सख्त और स्पष्ट हैं। कई लोग इन नियमों को पूरी तरह नहीं समझते, जिससे बाद में परेशानी हो सकती है। इस लेख में हम सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर, आसान भाषा में बताएँगे कि 2026 में भारत में क्रिप्टो पर कर के मुख्य नियम क्या हैं। यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है।

30 प्रतिशत की सपाट दर

कर से जुड़े दस्तावेज़ और गणना। क्रिप्टो से होने वाली आय पर भी कर नियम लागू होते हैं (प्रतीकात्मक तस्वीर)
कर से जुड़े दस्तावेज़ और गणना। क्रिप्टो से होने वाली आय पर भी कर नियम लागू होते हैं (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सबसे पहली और अहम बात कर की दर है। रिपोर्टों के अनुसार, भारत में आभासी डिजिटल संपत्ति, यानी क्रिप्टोकरेंसी जैसी संपत्तियों से होने वाले लाभ पर 30 प्रतिशत की सपाट दर से कर लगता है। इसका मतलब है कि लाभ चाहे जितना भी हो, उस पर एक ही तय दर लागू होती है। यह दर वर्ष 2022 से लागू है और 2026 में भी पूरी तरह अपरिवर्तित बनी हुई है।

एक प्रतिशत टीडीएस

कर के अलावा एक और नियम है, जिसे स्रोत पर कर कटौती या टीडीएस कहा जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, जब किसी निवासी को आभासी डिजिटल संपत्ति के हस्तांतरण के बदले भुगतान किया जाता है, तो उस पर 1 प्रतिशत टीडीएस काटा जाता है। यह व्यवस्था भी वर्ष 2022 से चली आ रही है, और इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे लेनदेन पर नज़र रखना है।

टीडीएस की सीमाएँ

हर छोटे लेनदेन पर टीडीएस लागू नहीं होता। रिपोर्टों के अनुसार, आम व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों के कुछ मामलों में यह सीमा 50,000 रुपये है, जबकि बाकी भुगतानकर्ताओं के लिए यह सीमा 10,000 रुपये तय की गई है। यदि किसी वित्तीय वर्ष में कुल राशि इन सीमाओं से कम रहती है, तो उस पर टीडीएस लागू नहीं होता।

घाटे पर सख्त नियम

क्रिप्टो में घाटे को लेकर नियम विशेष रूप से कड़े हैं। रिपोर्टों के अनुसार, एक आभासी डिजिटल संपत्ति में हुए घाटे को किसी दूसरी ऐसी संपत्ति के लाभ के साथ समायोजित नहीं किया जा सकता। इतना ही नहीं, इस घाटे को किसी अन्य प्रकार की आय के साथ भी नहीं जोड़ा जा सकता, और न ही इसे अगले वर्षों के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है।

नई रिपोर्टिंग व्यवस्था

वर्ष 2026 में सबसे बड़ा बदलाव रिपोर्टिंग को लेकर आया है। रिपोर्टों के अनुसार, धारा 285बीएए के तहत एक नई रिपोर्टिंग आवश्यकता 1 अप्रैल 2026, यानी वित्त वर्ष 2026-27 से लागू हो गई है। इसके अंतर्गत तय की गई कुछ संस्थाओं को क्रिप्टो-संपत्ति से जुड़े लेनदेन की जानकारी निर्धारित प्रारूप और समयसीमा के भीतर उपलब्ध करानी होगी।

नया आयकर अधिनियम

यह बदलाव एक बड़े कानूनी सुधार का हिस्सा है। रिपोर्टों के अनुसार, आयकर अधिनियम 2025 को 21 अगस्त 2025 को राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिली थी, और यह 1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ है। इसी अधिनियम में रिपोर्टिंग से जुड़े प्रावधानों को नए सिरे से संहिताबद्ध किया गया है, जिससे पूरी व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित हो गई है।

नियम तोड़ने पर जुर्माना

नई व्यवस्था के साथ जुर्माने के प्रावधान भी जुड़े हैं। रिपोर्टों के अनुसार, देर से जानकारी देने पर प्रतिदिन 200 रुपये का जुर्माना लग सकता है, जबकि गलत या भ्रामक जानकारी देने पर 50,000 रुपये तक का जुर्माना निर्धारित किया गया है। ये प्रावधान लोगों को समय पर और सही जानकारी देने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं।

2022 से चली आ रही व्यवस्था

मौजूदा ढाँचा अचानक नहीं बना है। रिपोर्टों के अनुसार, 30 प्रतिशत कर और 1 प्रतिशत टीडीएस दोनों ही वर्ष 2022 से लागू हैं, और हाल के बजट में भी इन्हें बरकरार रखा गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार की नीति इस क्षेत्र को कर के दायरे में लाने और उस पर निगरानी रखने की दिशा में काफ़ी स्थिर बनी हुई है।

निवेशकों के लिए इसका मतलब

इन नियमों का सीधा असर निवेशकों पर पड़ता है। रिपोर्टों के अनुसार, अब केवल साल के अंत में कुल लाभ बताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हर लेनदेन, अदला-बदली और बिक्री का ब्योरा रखना ज़रूरी हो गया है। इसका मतलब है कि रिकॉर्ड रखना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, ताकि रिपोर्टिंग में किसी तरह की चूक न हो।

सतर्क रहना क्यों ज़रूरी है

इस बदलते माहौल में सावधानी सबसे अच्छा तरीका है। अपने सभी लेनदेन का सटीक रिकॉर्ड रखना, समय पर जानकारी देना और नियमों को समझकर चलना बाद की परेशानियों से बचाता है। चूँकि ये नियम जटिल हो सकते हैं, इसलिए किसी योग्य कर सलाहकार से मार्गदर्शन लेना अक्सर समझदारी भरा कदम साबित होता है, खासकर बड़े लेनदेन के मामलों में।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, भारत में क्रिप्टो पर कर की व्यवस्था अब पहले से अधिक स्पष्ट और सख्त हो गई है। 30 प्रतिशत कर, 1 प्रतिशत टीडीएस और नई रिपोर्टिंग आवश्यकताएँ मिलकर एक स्पष्ट ढाँचा तैयार करती हैं। यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है, और किसी भी निर्णय से पहले आधिकारिक स्रोतों तथा विशेषज्ञों से पुष्टि करना हमेशा उचित रहता है।

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Ananya Iyer 2026-09-24 · 4 min read · 55 reads
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