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संसदीय समिति की सिफारिश: भारत में क्रिप्टो की अंतरिम निगरानी SRO के जरिए, SEBI या RBI की देखरेख में

Ananya Iyer Ananya Iyer ananyaiyer.avalw.com · 3.6k reads Respect0 Save Share Read only
READS788live count PUBLISHED18 Aug2026 READING TIME3 min593 words LANGUAGEHindi
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वित्त पर संसदीय स्थायी समिति ने अपनी 36वीं रिपोर्ट में सिफारिश की है कि व्यापक कानून बनने तक स्व-नियामक संगठन के जरिए क्रिप्टो उद्योग की अंतरिम निगरानी हो, जो SEBI या RBI की देखरेख में काम करे। यह भारत के अनिश्चितता से नियमन की ओर बढ़ते रुख का बड़ा संकेत है।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी के नियमन को लेकर वर्षों से चली आ रही अनिश्चितता के बीच एक अहम कदम सामने आया है। वित्त पर संसदीय स्थायी समिति ने सिफारिश की है कि जब तक वर्चुअल डिजिटल एसेट के लिए व्यापक कानून नहीं बन जाता, तब तक एक मान्यता प्राप्त स्व-नियामक संगठन के जरिए इस उद्योग की अंतरिम निगरानी की जाए।

यह सिफारिश समिति की 36वीं रिपोर्ट में की गई है, जो प्रस्तावित सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड 2025 पर आधारित है और 23 जुलाई 2026 को संसद में पेश की गई। भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली इस समिति ने क्रिप्टो को लेकर स्पष्ट और व्यावहारिक ढांचे की जरूरत पर जोर दिया है।

समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि इस चरण में क्रिप्टो को सीधे सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड में शामिल करना उचित नहीं होगा। इसके बजाय स्व-नियामक संगठन को सेबी या भारतीय रिजर्व बैंक जैसे किसी नामित नियामक की देखरेख में काम करना चाहिए, ताकि व्यापक कानून बनने तक एक संतुलित व्यवस्था बनी रहे।

SRO को क्या जिम्मेदारी दी जाएगी

रिपोर्ट के अनुसार स्व-नियामक संगठन को कई न्यूनतम मानक तय करने होंगे। इनमें शासन व्यवस्था, पारदर्शिता, जानकारी का खुलासा, निवेशक सुरक्षा, शिकायत निवारण और आचार संहिता जैसे बिंदु शामिल हैं। ग्राहकों के धन को अलग रखने यानी सेग्रीगेशन जैसी व्यवस्था पर भी विशेष जोर दिया गया है।

समिति ने वर्चुअल डिजिटल एसेट की कानूनी परिभाषाओं में अधिक स्पष्टता की मांग भी उठाई है। इसमें यह सवाल भी शामिल है कि क्रिप्टो एक्सचेंजों द्वारा जारी टोकनयुक्त प्रतिभूतियां और क्रिप्टो निवेश उत्पाद प्रस्तावित सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड के दायरे में आएंगे या नहीं।

भारत क्यों है क्रिप्टो का बड़ा बाज़ार

भारत में क्रिप्टो का लेनदेन बड़े पैमाने पर होता है, लेकिन इसका करीब 90 प्रतिशत कारोबार विदेशी मंचों पर चला गया है।
भारत में क्रिप्टो का लेनदेन बड़े पैमाने पर होता है, लेकिन इसका करीब 90 प्रतिशत कारोबार विदेशी मंचों पर चला गया है।

भारत में क्रिप्टो का पैमाना बेहद बड़ा है और यही इस बहस को अहम बनाता है। देश में करीब 11.9 करोड़ उपयोगकर्ता हैं और भारत लगातार तीन वर्षों से अपनाने के मामले में दुनिया में पहले स्थान पर रहा है। सालाना लेनदेन का मूल्य करीब 340 अरब डॉलर आंका गया है, जो जीडीपी के लगभग 9 प्रतिशत के बराबर है।

हालांकि इस विशाल बाजार में एक बड़ी चिंता भी छिपी है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत के क्रिप्टो कारोबार का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा विदेशी मंचों पर चला गया है। इससे न सिर्फ निगरानी मुश्किल होती है, बल्कि कर संग्रह और निवेशक सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी और गहरी हो जाती हैं।

भारी टैक्स का बोझ बरकरार

क्रिप्टो पर भारत का कर ढांचा दुनिया के सबसे सख्त ढांचों में गिना जाता है। लाभ पर धारा 115BBH के तहत सपाट 30 प्रतिशत टैक्स लगता है, हर लेनदेन पर धारा 194S के तहत 1 प्रतिशत टीडीएस कटता है और मंच शुल्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू होता है, जबकि घाटे को समायोजित करने की अनुमति नहीं है।

इन सब को जोड़ दिया जाए तो सबसे अधिक कमाई करने वालों पर प्रभावी कर बोझ 42 प्रतिशत से भी ऊपर पहुंच जाता है। इसके बावजूद बजट 2026 में इस कर ढांचे को अछूता छोड़ दिया गया। फिलहाल वर्चुअल डिजिटल एसेट सिर्फ कराधान, मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम और रिपोर्टिंग के सीमित उद्देश्यों को छोड़कर अनियमित बने हुए हैं।

आगे की राह

केंद्रीय बजट 2026 और 27 से पहले वित्त मंत्रालय, सेबी और रिजर्व बैंक के साथ मिलकर एक ठोस नियामक ढांचे पर विचार कर रहा है। चर्चा के अनुसार जिम्मेदारी तीन एजेंसियों में बंट सकती है, जिसमें सेबी एक्सचेंजों और प्रतिभूति जैसे टोकनों को, रिजर्व बैंक सीमा पार प्रवाह को और वित्त मंत्रालय नीति व कराधान को देखेगा।

यह सिफारिश ऐसे समय आई है जब कुछ ही हफ्ते पहले रिजर्व बैंक ने वित्तीय स्थिरता को लेकर क्रिप्टो पर चिंता जताई थी। ऐसे में 11.9 करोड़ उपयोगकर्ताओं वाले इस बाजार के लिए असली परीक्षा यही होगी कि प्रस्तावित एसआरओ मॉडल विदेश जा चुके कारोबार को वापस लाकर निवेशकों को भरोसेमंद सुरक्षा दे पाता है या नहीं।

2 responses

यहाँ वर्चुअल डिजिटल एसेट के बारे में काफी कुछ सीखा.

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वर्चुअल डिजिटल एसेट के बारे में अच्छा संदर्भ.

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Ananya Iyer 2026-08-18 · 3 min read · 788 reads
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