बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाज आज फिर चर्चा में हैं, जिन्हें श्री अन्न भी कहा जाता है। इनके पोषण संबंधी फायदे और पर्यावरण के लिहाज से इनकी खूबियों को उपलब्ध जानकारी के आधार पर समझते हैं।
एक समय था जब मोटे अनाज हमारी थाली का एक जरूरी हिस्सा हुआ करते थे, लेकिन धीरे-धीरे गेहूं और चावल ने उनकी जगह ले ली। अब एक बार फिर बाजरा, ज्वार और रागी जैसे अनाजों की चर्चा हर तरफ हो रही है, और इन्हें श्री अन्न के नाम से नई पहचान मिल रही है। इस लेख में हम उपलब्ध जानकारी के आधार पर जानेंगे कि मोटे अनाज आखिर हैं क्या, ये सेहत के लिहाज से क्यों खास माने जाते हैं और पर्यावरण के लिए भी क्यों फायदेमंद हैं।
मोटे अनाज क्या हैं
सबसे पहले यह समझ लेते हैं कि मोटे अनाज होते क्या हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ये छोटे दानों वाले पारंपरिक अनाज होते हैं, जिन्हें सदियों से हमारे देश में उगाया और खाया जाता रहा है। गेहूं और चावल की तुलना में इन पर कम ध्यान दिया गया, लेकिन अपने पोषण और आसानी से उगने की खूबियों के कारण ये अब फिर से लोगों की थाली और खेतों दोनों में लौट रहे हैं।
साल 2023 का पोषक अनाज वर्ष

इन अनाजों को दुनिया भर में पहचान दिलाने में एक खास पहल की बड़ी भूमिका रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र ने साल 2023 को अंतरराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष के रूप में घोषित किया था। यह भारत के प्रस्ताव पर आधारित था, जिसे खाद्य एवं कृषि संगठन ने साल 2018 में मंजूरी दी थी, और इसे सत्तर से अधिक देशों का समर्थन भी मिला था।
श्री अन्न नाम कैसे मिला
बीते कुछ समय में इन अनाजों को एक नई और सम्मानजनक पहचान दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मोटे अनाजों को अब श्री अन्न के नाम से भी जाना जाने लगा है। इस नए नाम का मकसद इन पारंपरिक अनाजों के प्रति लोगों में सम्मान और जागरूकता बढ़ाना है, ताकि लोग इन्हें दोबारा अपने रोजमर्रा के भोजन में शामिल करने के लिए प्रेरित हों।
मोटे अनाज की प्रमुख किस्में
मोटे अनाज कोई एक अनाज नहीं, बल्कि कई अनाजों का एक बड़ा परिवार है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारत में पाई जाने वाली प्रमुख किस्मों में ज्वार, बाजरा, रागी यानी फिंगर मिलेट, समा यानी छोटा बाजरा और प्रोसो मिलेट शामिल हैं। हर किस्म का अपना अलग स्वाद और खासियत होती है, जिससे इन्हें अलग-अलग तरह के पकवानों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
सदियों पुराना नाता
मोटे अनाजों का हमारे इतिहास से बहुत गहरा रिश्ता रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ये उन शुरुआती पौधों में से थे जिन्हें सिंधु घाटी सभ्यता के समय भोजन के लिए उगाया जाता था। इसका मतलब है कि ये अनाज हजारों साल से हमारे भोजन का हिस्सा रहे हैं। इतने लंबे समय से हमारे साथ रहने के कारण ये हमारे वातावरण और खान-पान दोनों के लिए बेहद अनुकूल माने जाते हैं।
पोषण का खजाना
मोटे अनाजों को सेहत के लिहाज से बहुत गुणकारी माना जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और लौह तत्व यानी आयरन जैसे कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। कहा जाता है कि ये विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं में पोषण की कमी के खिलाफ एक ढाल की तरह काम कर सकते हैं, और इसी वजह से इन्हें पोषण सुरक्षा का एक अच्छा जरिया माना जाता है।
ग्लूटेन मुक्त अनाज
मोटे अनाजों की एक और खास बात इनका ग्लूटेन मुक्त होना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ये अनाज प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन से मुक्त होते हैं। यही वजह है कि जिन लोगों को गेहूं में मौजूद ग्लूटेन से परहेज करना होता है, उनके लिए मोटे अनाज एक अच्छा विकल्प माने जाते हैं। इस खूबी के कारण ये अलग-अलग जरूरतों वाले लोगों के भोजन में आसानी से जगह बना लेते हैं।
रागी और कैल्शियम
मोटे अनाजों के इस परिवार में रागी की एक खास पहचान है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रागी विशेष रूप से कैल्शियम से भरपूर मानी जाती है। कैल्शियम हमारी हड्डियों के लिए एक जरूरी तत्व होता है, इसलिए रागी को अक्सर एक पौष्टिक अनाज के रूप में देखा जाता है। यही कारण है कि इसे कई तरह के पारंपरिक व्यंजनों में सेहत के लिहाज से पसंद किया जाता है।
कम पानी में भी उपज
मोटे अनाज सिर्फ सेहत ही नहीं, बल्कि खेती के लिहाज से भी बेहद उपयोगी हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ये अनाज कम पानी में उगाए जा सकते हैं और सूखे जैसी कठिन परिस्थितियों में भी टिके रहते हैं। बताया जाता है कि चावल की तुलना में बाजरे को उगने के लिए करीब तीन गुना कम पानी की जरूरत होती है, जो पानी की कमी वाले इलाकों के लिए एक बड़ी राहत है।
पर्यावरण के लिहाज से फायदेमंद
पानी की कम जरूरत के साथ-साथ ये अनाज पर्यावरण के लिए भी अनुकूल माने जाते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मोटे अनाजों का कार्बन और पानी का फुटप्रिंट कम होता है, यानी इन्हें उगाने में प्राकृतिक संसाधनों पर कम दबाव पड़ता है। बदलते मौसम और घटते जल संसाधनों के इस दौर में, ऐसी फसलें आने वाले समय के लिए एक समझदारी भरा विकल्प साबित हो सकती हैं।
आहार में शामिल करते समय ध्यान
मोटे अनाजों के इतने फायदे होने के बावजूद, हर व्यक्ति की पोषण संबंधी जरूरतें अलग-अलग होती हैं। किसी भी अनाज को अपने भोजन का बड़ा हिस्सा बनाने से पहले संतुलन का ध्यान रखना जरूरी है। यह लेख केवल सामान्य जानकारी देने के उद्देश्य से है और किसी विशेष आहार की सलाह नहीं है। अपनी सेहत से जुड़े फैसले लेने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना हमेशा बेहतर माना जाता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, मोटे अनाज सेहत और पर्यावरण दोनों के लिहाज से हमारे एक पुराने और भरोसेमंद साथी रहे हैं। साल 2023 के पोषक अनाज वर्ष ने इन्हें एक बार फिर दुनिया के सामने ला खड़ा किया है। पोषण से भरपूर और कम पानी में उगने वाले इन अनाजों की खूबियों को समझकर, हम अपने खान-पान और अपनी धरती दोनों के लिए एक बेहतर विकल्प की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।

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