एक से सात सितंबर तक मनाए जाने वाले राष्ट्रीय पोषण सप्ताह 2026 में संतुलित आहार, मोटे अनाज और स्वस्थ जीवनशैली पर ज़ोर दिया जा रहा है। इस साल की थीम है, पोषण की शक्ति को पहचानें।
राष्ट्रीय पोषण सप्ताह क्या है
राष्ट्रीय पोषण सप्ताह हर साल एक से सात सितंबर तक मनाया जाता है। इसकी शुरुआत भारत सरकार ने साल 1982 में की थी, ताकि देश में कुपोषण को कम किया जा सके और संतुलित आहार के प्रति आम लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा सके। तब से यह हर साल एक बेहद महत्वपूर्ण अभियान के रूप में मनाया जाता है।
इस सप्ताह का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि अच्छा पोषण केवल पेट भरने से नहीं, बल्कि सही और विविध भोजन से ही मिलता है। यह परिवारों को अपने खानपान की आदतों, भोजन पकाने के तरीक़ों और रोज़ाना के पोषण संतुलन पर एक बार फिर से विचार करने के लिए प्रेरित करता है।
थीम: पोषण की शक्ति को पहचानें

साल 2026 के राष्ट्रीय पोषण सप्ताह की थीम, पोषण की शक्ति को पहचानें रखी गई है। यह थीम इस बात पर ज़ोर देती है कि समझदारी से किए गए भोजन के चुनाव से, जीवनशैली से जुड़ी कई बीमारियों को रोका जा सकता है और लंबे समय तक शरीर की सेहत को बेहतर बनाए रखा जा सकता है।
श्री अन्न यानी मोटे अनाज
इस दौरान श्री अन्न, यानी मोटे अनाजों पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है। रागी, बाजरा और कंगनी जैसे अनाज पोषण से भरपूर होते हैं और भारत में प्राचीन काल से ही इनकी खेती होती रही है। हरित क्रांति के बाद इनका चलन कुछ कम ज़रूर हुआ था, लेकिन अब जागरूकता बढ़ने के साथ यह फिर से तेज़ी से बढ़ रहा है।
साल 2023 के बजट में श्री अन्न अभियान की घोषणा की गई थी, और उसी वर्ष को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष के रूप में भी मनाया गया। इन पोषक और जलवायु के अनुकूल अनाजों को अब सार्वजनिक वितरण प्रणाली, मध्याह्न भोजन और आंगनवाड़ी जैसी सरकारी योजनाओं में भी शामिल किया जा रहा है।
संतुलित भारतीय थाली
विशेषज्ञ एक संतुलित थाली की सलाह देते हैं, जिसमें हर पोषक तत्व को उसका उचित स्थान मिले। इसके आधार में साबुत अनाज जैसे ब्राउन राइस, रोटी, ओट्स और मोटे अनाज होने चाहिए, जो शरीर को ज़रूरी ऊर्जा और फाइबर प्रदान करते हैं और पाचन को बेहतर बनाते हैं।
इसके ऊपर प्रोटीन और डेयरी उत्पाद आते हैं, जैसे दालें, पनीर, अंडे, मछली और दही। इसके बाद सब्ज़ियों और फलों की बारी आती है, जिसमें रोज़ाना दो हिस्से सब्ज़ियाँ और एक फल शामिल करने की सलाह दी जाती है, जबकि वसा और चीनी का इस्तेमाल यथासंभव कम करना चाहिए।
प्राथमिक स्वास्थ्य से जुड़ाव
पोषण को बेहतर बनाने के लिए इसे स्वास्थ्य सेवाओं से भी जोड़ा जा रहा है। आयुष्मान भारत के स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों में पोषण संबंधी सलाह, असंचारी रोगों की रोकथाम और जीवनशैली में सुधार जैसी सेवाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल का एक अहम हिस्सा बनाया गया है।
भविष्य की पोषण रणनीति
हाल की रिपोर्टें बताती हैं कि भारत को अब केवल खाद्य सुरक्षा से आगे बढ़कर सोचना होगा। ज़रूरत एक ऐसी पोषण के प्रति संवेदनशील खाद्य प्रणाली की है, जो विविध, सुरक्षित और किफ़ायती आहार देश के हर व्यक्ति तक भरोसेमंद ढंग से पहुँचा सके।
इसके लिए दालों, मोटे अनाजों, फलों, सब्ज़ियों और अच्छी गुणवत्ता वाले प्रोटीन के उत्पादन और खपत को बढ़ाने पर ज़ोर दिया जा रहा है। यह दृष्टिकोण न केवल लोगों की सेहत को सुधारेगा, बल्कि खेती को पर्यावरण के अधिक अनुकूल बनाने में भी मदद करेगा।
सेहतमंद भविष्य की ओर
राष्ट्रीय पोषण सप्ताह हमें यह याद दिलाता है कि अच्छी सेहत की असली नींव हमारी थाली में ही रखी होती है। समझदारी भरे भोजन के चुनाव, मोटे अनाजों की वापसी और संतुलित आहार की अच्छी आदतें मिलकर, एक अधिक स्वस्थ और मज़बूत भारत की ओर ले जाने में बेहद अहम भूमिका निभा सकती हैं।
यहाँ संतुलित आहार के बारे में काफी कुछ सीखा.
संतुलित आहार को फॉलो करता हूँ और यह मददगार है.
सच.

Keep following नेहा रावHer next filing reaches you the moment it publishes, on her own subdomain.
Follow