भारत सरकार गैर-संचारी रोगों की रोकथाम के लिए 30 साल से ऊपर के लोगों की व्यापक जांच पर ज़ोर दे रही है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कैंसर की स्क्रीनिंग से जुड़े इस अभियान और आयुष्मान आरोग्य मंदिर की भूमिका पर एक नज़र।
बदलती जीवनशैली और खानपान के इस दौर में उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारियां तेज़ी से बढ़ रही हैं। ये बीमारियां अक्सर बिना किसी साफ़ लक्षण के धीरे धीरे शरीर में पनपती हैं, इसलिए इनकी समय पर पहचान बेहद ज़रूरी हो जाती है। इसी सोच के साथ भारत में एक बड़ा स्वास्थ्य अभियान ज़ोर पकड़ रहा है।
इस अभियान का मुख्य ज़ोर बीमारी के इलाज से ज़्यादा उसकी रोकथाम और शुरुआती जांच पर है। सरकार चाहती है कि लोग बीमार पड़ने का इंतज़ार करने के बजाय, समय समय पर अपनी जांच कराते रहें। इस लेख में हम समझेंगे कि यह अभियान क्या है, किन लोगों के लिए है, और इसे ज़मीन पर कैसे उतारा जा रहा है।
अभियान क्या है
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे आबादी के स्तर पर व्यापक स्वास्थ्य जांच को और मज़बूत करें। इसका उद्देश्य है कि गंभीर बीमारियों को उनके शुरुआती चरण में ही पहचान लिया जाए, ताकि समय रहते इलाज और बचाव संभव हो सके।
इस जांच अभियान में मुख्य रूप से उच्च रक्तचाप और मधुमेह के साथ साथ तीन तरह के कैंसर, यानी मुँह के कैंसर, स्तन कैंसर और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर को शामिल किया गया है। ये वे बीमारियां हैं जो देश में तेज़ी से फैल रही हैं और जिनका जल्दी पता चलना इलाज को कहीं आसान बना देता है।
30 साल से ऊपर हर किसी की जांच
इस पूरी पहल में खास ज़ोर तीस साल से अधिक उम्र के लोगों पर दिया गया है। मंत्रालय की सलाह है कि इस आयु वर्ग के सभी लोग नियमित रूप से अपने रक्तचाप और रक्त शर्करा यानी ब्लड शुगर की जांच कराएं, और साथ ही कैंसर से जुड़ी ज़रूरी स्क्रीनिंग भी समय समय पर कराते रहें।
इसके पीछे सोच यह है कि तीस की उम्र के बाद इन बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है, लेकिन कई बार शुरुआत में इनके कोई लक्षण नहीं दिखते। नियमित जांच से ऐसी छिपी हुई बीमारियां समय पर सामने आ जाती हैं, जिससे उन्हें गंभीर होने से पहले ही संभाला जा सकता है।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर की भूमिका

इस अभियान को ज़मीन पर पहुंचाने में आयुष्मान भारत के तहत बने आयुष्मान आरोग्य मंदिर, यानी स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र अहम भूमिका निभा रहे हैं। ये केंद्र अब सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं रहे, बल्कि बीमारियों की रोकथाम और शुरुआती जांच का एक बड़ा ठिकाना बन गए हैं।
इन केंद्रों पर लोगों को बुनियादी जांच सुविधाओं के साथ साथ मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों का स्वास्थ्य और बुज़ुर्गों की देखभाल जैसी कई सेवाएं मिल रही हैं। साथ ही, डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड की मदद से मरीज़ों की आगे की देखभाल को बेहतर तरीके से जोड़ा जा रहा है।
आशा कार्यकर्ताओं का योगदान
इस पूरे अभियान की असली ताकत ज़मीन पर काम करने वाली आशा कार्यकर्ता हैं। ये कार्यकर्ता घर घर जाकर लोगों को जागरूक करती हैं, उन्हें जांच का महत्व समझाती हैं और उन्हें नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने के लिए प्रेरित करती हैं, जिससे जांच में आम लोगों की भागीदारी बढ़ती है।
अक्सर लोग जानकारी के अभाव में या डर के कारण जांच कराने से बचते हैं। ऐसे में स्थानीय भाषा में दी गई सरल जानकारी और भरोसेमंद कार्यकर्ताओं का साथ, लोगों की झिझक को दूर करने और उन्हें अपनी सेहत के प्रति सजग बनाने में बड़ी भूमिका निभाता है।
जल्दी जांच क्यों ज़रूरी
गैर-संचारी रोगों की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि ये चुपचाप बढ़ते रहते हैं और जब तक पता चलता है, तब तक कई बार काफी नुकसान हो चुका होता है। नियमित जांच इस चुप्पी को तोड़ने का सबसे कारगर तरीका है, क्योंकि शुरुआती पहचान से इलाज सरल, सस्ता और अधिक असरदार हो जाता है।
इसलिए यह अभियान केवल सरकारी योजना भर नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की अपनी सेहत के प्रति ज़िम्मेदारी से भी जुड़ा है। तीस पार के लोग यदि अपनी जांच को दिनचर्या का हिस्सा बना लें, तो वे न सिर्फ अपनी, बल्कि अपने पूरे परिवार की सेहत की नींव को मज़बूत कर सकते हैं।
स्वास्थ्य जांच के बारे में बहुत उपयोगी लेख.

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