गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रही एसिडिटी के पीछे एक खतरनाक बैक्टीरिया हो सकता है, जो अनजाने में पेट के कैंसर का कारण बन सकता है।
खाने के बाद सीने में जलन और खट्टी डकारें, यह तो आम बात है। ज़्यादातर लोग इसे सिर्फ गैस की समस्या समझकर एक एंटासिड गोली खा लेते हैं और दिन बीत जाता है। लेकिन इंडिया टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, यह छोटी सी जलन शरीर का एक गंभीर संकेत हो सकती है।
दिल्ली के फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा के कंसल्टेंट डॉक्टर शिवम कालिया बताते हैं कि बार-बार होने वाली एसिडिटी के पीछे मसालेदार खाना या तनाव नहीं, बल्कि पेट में मौजूद एक बैक्टीरिया हो सकता है। इस बैक्टीरिया का नाम है हेलिकोबैक्टर पाइलोरी। यही वह खतरा है जिसकी अनदेखी कर हम अपनी सेहत पर खतरा डाल रहे हैं।
पेट की परतों में धीरे-धीरी खोदाई
हेलिकोबैक्टर पाइलोरी कोई साधारण बैक्टीरिया नहीं है। यह पेट की अंदरूनी परत में घुसकर वहां जमा हो जाता है और धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है। इससे शुरुआत में सिर्फ एसिडिटी और जलन की समस्या होती है, लेकिन समय के साथ यह पेट में छाले यानी अल्सर की ओर बढ़ जाता है।
यह प्रक्रिया बहुत ही चुपचाप होती है। शुरुआत में लक्षण इतने हल्के होते हैं कि उन्हें अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। लेकिन जब तक आप एंटासिड की गोलियों पर निर्भर रहते हैं, तब तक यह बैक्टीरिया अपने अस्तित्व को मजबूत करता रहता है। डॉक्टरों का कहना है कि इस बैक्टीरिया की मौजूदगी पेट की रक्षात्मक परत को कमजोर कर देती है।

कैंसर का खतरा और वुहो की चेतावनी
सबसे चिंताजनक बात यह है कि अगर इस बैक्टीरिया का समय पर इलाज न हो, तो यह लंबे समय में पेट के कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी हेलिकोबैक्टर पाइलोरी को पेट के कैंसर के एक प्रमुख कारण के रूप में मान्यता दी है। यह कोई अफवाह नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तथ्य है।
आजकल युवाओं में भी यह समस्या बढ़ रही है, क्योंकि वे अक्सर तनाव और अनियमित खान-पान की वजह से इससे जूझते हैं। डॉक्टर शिवम कालिया का कहना है कि गैस्ट्रिक कैंसर का खतरा तब सबसे ज्यादा होता है जब व्यक्ति को लगातार लक्षण रहते हैं और वह इसे सिर्फ एक छोटी सी बीमारी समझकर टाल देता है।

इन लक्षणों पर न करें अनदेखी
अगर आपको महीनों से बार-बार एसिडिटी हो रही है, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। खाना खाने के बाद पेट में लगातार भारीपन महसूस होना, बिना किसी वजह वज़न कम होना, या काला मल आना इन सभी को गंभीर लक्षणों की सूची में शामिल किया जाना चाहिए।
भूख में अचानक कमी आना भी एक अलर्ट है। अगर ये लक्षण लंबे समय से हैं, तो उसे सिर्फ गैस की समस्या मानकर टालना सही नहीं है। शरीर आपको कुछ कह रहा है, बस उसे सुनना होगा।

जांच और इलाज की आसान राह
अगर आपको बार-बार गैस या एसिडिटी की समस्या रहती है, तो घबराने की ज़रूरत नहीं है। हेलिकोबैक्टर पाइलोरी का पता लगाने के तरीके आजकल बहुत आसान हो गए हैं। एक साधारण सांस टेस्ट (ब्रीथ टेस्ट), खून की जांच या एंडोस्कोपी से इस बैक्टीरिया की मौजूदगी का पता लगाया जा सकता है।
अगर जांच में यह बैक्टीरिया मिल जाता है, तो एंटीबायोटिक दवाओं के एक छोटे कोर्स से इसका सफल इलाज संभव है। यह इलाज तेज़ और असरदार होता है, बशर्ते कि समय पर जांच करवाई जाए।
शुरुआती चरण में पता लगाने का फायदा
आज की एडवांस एंडोस्कोपी तकनीकों, जैसे NBI और हाई-डेफिनिशन एंडोस्कोपी, की मदद से पेट के कैंसर का बहुत शुरुआती चरण में ही पता लगाया जा सकता है। इस स्टेज पर इलाज आसान और ज़्यादा असरदार होता है।
यह बात याद रखें कि बार-बार होने वाली एसिडिटी शरीर का एक संकेत है। उसे नज़रअंदाज़ न करें। समय पर जांच करवाना ही सबसे समझदारी भरा कदम है। अपनी सेहत की गारंटी के लिए एक बार अपने डॉक्टर से परामर्श ज़रूर लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Keep subscribing to नेहा रावHer next filing reaches you the moment it publishes, on her own subdomain.
Subscribe
