भारतीय पोषण विशेषज्ञों के दिशानिर्देश एक संतुलित थाली की साफ़ तस्वीर पेश करते हैं। अनाज, दाल, सब्ज़ी से लेकर नमक और चीनी की सही मात्रा तक, जानिए दिनभर के भोजन का सेहतमंद हिसाब आसान भाषा में।
हम रोज़ जो खाते हैं, वही धीरे-धीरे हमारी सेहत की बुनियाद तय करता है। लेकिन आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में यह समझना मुश्किल हो जाता है कि आख़िर संतुलित भोजन होता क्या है और किस चीज़ को कितनी मात्रा में खाना चाहिए। भारत के पोषण विशेषज्ञों की ओर से जारी दिशानिर्देश इसी उलझन को सुलझाते हैं। इस लेख में हम उन्हीं सुझावों को सरल भाषा में समझेंगे, ताकि अपनी थाली को थोड़ा और सेहतमंद बनाया जा सके।
संतुलित थाली क्या है
संतुलित थाली का मतलब है, दिनभर के भोजन में हर ज़रूरी तत्व का सही अनुपात में शामिल होना। दिशानिर्देश एक औसत वयस्क के लिए लगभग दो हज़ार कैलोरी वाले दिन को आधार मानकर सुझाव देते हैं। इसमें अनाज, दाल, सब्ज़ी, फल, दूध और थोड़ी मात्रा में मेवे व तेल, सबका अपना हिस्सा तय है। असल सेहत किसी एक चीज़ को ज़्यादा खाने में नहीं, बल्कि सबके बीच सही तालमेल बिठाने में छिपी होती है।
अनाज और मोटे अनाज
दिशानिर्देशों के अनुसार, दिनभर में करीब दो सौ पचास ग्राम अनाज लेने की सलाह दी गई है। इसमें एक बड़ी और स्वागतयोग्य बात यह है कि इसका करीब तीस से चालीस प्रतिशत हिस्सा मोटे अनाज यानी ज्वार, बाजरा, रागी जैसे मिलेट्स से लेने पर ज़ोर दिया गया है। ये मोटे अनाज फ़ाइबर और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, और हमारी पारंपरिक थाली का हिस्सा रहे हैं। इन्हें दोबारा अपनाना सेहत के लिए फ़ायदेमंद है।
दालें और प्रोटीन
शरीर के निर्माण और मरम्मत के लिए प्रोटीन बेहद ज़रूरी है, और यहीं दालों की भूमिका अहम हो जाती है। दिशानिर्देश दिनभर में करीब पचासी ग्राम दालें और फलियाँ लेने की सलाह देते हैं, जिसमें अंडे और मांस-मछली जैसे स्रोत भी शामिल माने जाते हैं। शाकाहारी हों या मांसाहारी, हर किसी के लिए प्रोटीन के अच्छे विकल्प मौजूद हैं। दाल-चावल या दाल-रोटी जैसा साधारण मेल भी प्रोटीन की अच्छी ख़ुराक दे देता है।
सब्ज़ियों की भरमार

सेहतमंद थाली में सब्ज़ियों को सबसे बड़ा हिस्सा दिया गया है। दिशानिर्देश दिनभर में करीब चार सौ ग्राम सब्ज़ियाँ खाने की सलाह देते हैं। इसमें लगभग सौ ग्राम हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, ढाई सौ ग्राम अन्य सब्ज़ियाँ और करीब पचास ग्राम जड़ वाली सब्ज़ियाँ शामिल हैं। रंग-बिरंगी सब्ज़ियाँ न सिर्फ़ थाली को आकर्षक बनाती हैं, बल्कि अलग-अलग विटामिन और खनिज भी देती हैं, जो शरीर को भीतर से मज़बूत रखते हैं।
फल और दूध
फल और दूध भी संतुलित आहार के अहम स्तंभ हैं। विशेषज्ञ दिनभर में करीब सौ ग्राम फल खाने और लगभग तीन सौ मिलीलीटर दूध या दही लेने की सलाह देते हैं। मौसमी फल शरीर को प्राकृतिक मिठास, फ़ाइबर और ज़रूरी तत्व देते हैं, जबकि दूध और दही कैल्शियम तथा प्रोटीन का अच्छा ज़रिया हैं। इन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल करना हड्डियों और समग्र सेहत, दोनों के लिए लाभकारी साबित होता है।
मेवे और तेल
कुछ चीज़ें कम मात्रा में ही सही, पर थाली में ज़रूर होनी चाहिए। दिशानिर्देश दिनभर में करीब पैंतीस ग्राम मेवे और बीज तथा लगभग सत्ताईस ग्राम तेल व वसा लेने का सुझाव देते हैं। मेवे अच्छी चर्बी और ऊर्जा देते हैं, पर तेल का इस्तेमाल संभलकर करना चाहिए। कम तेल में बना खाना दिल की सेहत के लिए बेहतर माना जाता है। यहाँ मात्रा का ध्यान रखना ही असली समझदारी है।
नमक पर लगाम
स्वाद बढ़ाने वाला नमक, ज़्यादा मात्रा में सेहत के लिए भारी पड़ सकता है। दिशानिर्देशों के अनुसार, एक दिन में नमक की मात्रा पाँच ग्राम से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए। यह भी ध्यान रखना ज़रूरी है कि पैकेटबंद और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में छिपा हुआ नमक अक्सर हमारी सोच से कहीं ज़्यादा होता है। इसलिए ऊपर से नमक डालने की आदत पर काबू पाना और डिब्बाबंद चीज़ों को लेकर सतर्क रहना, दोनों ही ज़रूरी हैं।
चीनी से परहेज़
नमक की तरह ही चीनी को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। दिशानिर्देश बताते हैं कि दो हज़ार कैलोरी वाले आहार में पच्चीस ग्राम से ज़्यादा चीनी लेना अधिक माना जाता है, और ऊपर से मिलाई जाने वाली चीनी को यथासंभव कम करने या छोड़ने की सलाह दी गई है। मीठे पेय और मिठाइयों में मौजूद अतिरिक्त शर्करा, बिना किसी ख़ास पोषण के केवल कैलोरी बढ़ाती है, इसलिए इससे दूरी बनाना ही बेहतर है।
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड से दूरी
आजकल बाज़ार में मिलने वाले अत्यधिक प्रोसेस्ड यानी बहुत ज़्यादा संसाधित खाद्य पदार्थों को लेकर भी दिशानिर्देश आगाह करते हैं। ऐसे उत्पादों में अक्सर ज़रूरी पोषक तत्वों की कमी होती है, जबकि नमक, चीनी और ख़राब वसा की मात्रा अधिक होती है। इन्हें कभी-कभार ही खाना समझदारी है। इनकी जगह ताज़ा और घर का बना भोजन चुनना, लंबे समय में सेहत के लिए कहीं अधिक फ़ायदेमंद साबित होता है।
सिर्फ़ खाना ही नहीं
अच्छी सेहत का रास्ता सिर्फ़ थाली से होकर नहीं गुज़रता। दिशानिर्देश नियमित शारीरिक गतिविधि और योग जैसे अभ्यासों को भी उतना ही ज़रूरी मानते हैं, ख़ासकर वज़न को संतुलित रखने के लिए। संतुलित भोजन और सक्रिय जीवनशैली, दोनों मिलकर ही कई तरह की बीमारियों से बचाव करते हैं। पेट के आसपास बढ़ती चर्बी और मोटापे को रोकने के लिए, खानपान के साथ-साथ रोज़ थोड़ी हलचल भी बेहद ज़रूरी है।
इन सुझावों का मक़सद किसी को डराना नहीं, बल्कि जागरूक बनाना है। ध्यान रहे कि हर व्यक्ति की ज़रूरतें उम्र, काम और सेहत के हिसाब से अलग होती हैं, इसलिए किसी ख़ास परेशानी में विशेषज्ञ की सलाह लेना ही उचित है। फिर भी, संतुलन और संयम के ये बुनियादी सिद्धांत हम सबके काम आते हैं। छोटे-छोटे समझदार बदलाव, समय के साथ हमारी सेहत में बड़ा फ़र्क ला सकते हैं। थाली का यह हिसाब, दरअसल ख़ुद से प्यार करने का ही एक तरीका है।

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