भारत में ओटीटी स्ट्रीमिंग का दायरा तेजी से बढ़ रहा है, और इस वृद्धि का बड़ा हिस्सा छोटे शहरों तथा क्षेत्रीय भाषाओं के कंटेंट से आ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार मोबाइल पर आधारित यह बाजार लगातार नई ऊंचाइयां छू रहा है।
भारत में मनोरंजन देखने का तरीका तेजी से बदल रहा है, और इस बदलाव के केंद्र में हैं ऑनलाइन स्ट्रीमिंग यानी ओटीटी मंच। रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में इन मंचों के उपयोगकर्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, और इस वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा अब क्षेत्रीय भाषाओं के कंटेंट से जुड़ा हुआ है।
लगातार बढ़ता स्ट्रीमिंग का दायरा
आंकड़ों के मुताबिक, भारत में ओटीटी उपयोगकर्ताओं की संख्या वर्ष 2025 के लगभग 52 करोड़ से बढ़कर 2026 में करीब 55 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। इतनी बड़ी संख्या इस बात का साफ संकेत है कि डिजिटल मनोरंजन अब देश के कोने-कोने तक अपनी पहुंच बना चुका है।
बताया जा रहा है कि आने वाले वर्षों में यह वृद्धि और भी तेज हो सकती है। जैसे-जैसे इंटरनेट सस्ता और सुलभ होता जा रहा है, वैसे-वैसे अधिक से अधिक लोग पारंपरिक टेलीविजन के बजाय अपनी पसंद के समय और स्थान पर कंटेंट देखना पसंद कर रहे हैं।
छोटे शहरों से आती नई ऊर्जा
इस पूरे बदलाव में सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि नई वृद्धि का बड़ा हिस्सा बड़े महानगरों से नहीं, बल्कि छोटे शहरों से आ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल की नई सदस्यता वृद्धि का लगभग साठ प्रतिशत हिस्सा दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों से आया है।
यह रुझान दर्शाता है कि डिजिटल मनोरंजन अब केवल शहरी अभिजात वर्ग तक सीमित नहीं रह गया है। छोटे शहरों और कस्बों के दर्शक भी अब बड़ी संख्या में इन मंचों से जुड़ रहे हैं, और वे अपनी भाषा तथा संस्कृति से जुड़ा कंटेंट देखना अधिक पसंद कर रहे हैं।
क्षेत्रीय भाषाओं का बढ़ता दबदबा

इन छोटे शहरों की मांग को पूरा करने में सबसे बड़ी भूमिका क्षेत्रीय भाषाओं के कंटेंट की है। रिपोर्ट के अनुसार, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, बंगाली और मराठी जैसी भाषाओं में बनने वाला कंटेंट इस वृद्धि का प्रमुख इंजन बनकर उभरा है और दर्शकों को तेजी से अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।
एक रिपोर्ट में तो यहां तक कहा गया है कि आने वाले समय में हिंदी के अलावा अन्य भारतीय भाषाओं का कंटेंट लोकप्रियता के मामले में हिंदी से भी आगे निकल सकता है। यह संकेत भारत की भाषाई विविधता और उससे जुड़ी विशाल दर्शक क्षमता को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है।
भुगतान करने वाले दर्शकों की बढ़त
क्षेत्रीय कंटेंट की यह लोकप्रियता केवल दर्शकों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर भुगतान करने वाले ग्राहकों पर भी साफ दिख रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्रीय भाषाओं पर केंद्रित कुछ मंचों पर भुगतान करने वाले उपयोगकर्ताओं का अनुपात काफी अधिक पाया गया है।
बताया गया है कि ऐसे कुछ मंचों पर यह अनुपात पचहत्तर से पचासी प्रतिशत तक भी पहुंच जाता है। यह इस बात का प्रमाण है कि दर्शक अपनी भाषा के गुणवत्तापूर्ण कंटेंट के लिए भुगतान करने को तैयार हैं, जिससे इन मंचों का कारोबारी मॉडल भी और मजबूत होता है।
मोबाइल पर टिका भारत का बाजार
भारत के ओटीटी बाजार की एक और खास बात इसका मोबाइल फोन पर आधारित होना है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में ओटीटी देखने के कुल समय का लगभग तिहत्तर प्रतिशत हिस्सा मोबाइल फोन पर ही खर्च होता है, जो कई अन्य देशों की तुलना में बहुत अधिक माना जाता है।
मोबाइल फोन की व्यापक पहुंच और सस्ते डेटा ने आम लोगों के हाथ में मनोरंजन का एक पूरा संसार पहुंचा दिया है। यही कारण है कि छोटे शहरों और गांवों तक के दर्शक भी अब आसानी से अपनी पसंद का कंटेंट कहीं भी और कभी भी देख पा रहे हैं।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, यह रुझान भारतीय मनोरंजन उद्योग के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आया है। क्षेत्रीय कहानियों और प्रतिभाओं को अब पहले से कहीं बड़ा मंच मिल रहा है, जिससे स्थानीय रचनाकारों के लिए नई संभावनाओं के द्वार तेजी से खुल रहे हैं।
यदि यही रुझान जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत का डिजिटल मनोरंजन बाजार और भी विविध तथा समावेशी बन सकता है। फिलहाल जो तस्वीर उभर रही है, वह दर्शकों और उद्योग दोनों के लिए बेहद उत्साहजनक है और भविष्य को लेकर नई उम्मीदें जगाती है।

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