नीरज घायवान की हिंदी फिल्म 'होमबाउंड' भारत की ओर से ऑस्कर की सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर श्रेणी की आधिकारिक प्रविष्टि है और अब अकादमी पुरस्कारों की शॉर्टलिस्ट में जगह बना चुकी है।
भारतीय सिनेमा के लिए यह एक गर्व का पल है। निर्देशक नीरज घायवान की फिल्म 'होमबाउंड' को इस साल ऑस्कर की सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में चुना गया है, और अब यह प्रतिष्ठित दौड़ में और आगे बढ़ चुकी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फिल्म का चयन फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की चौदह सदस्यीय जूरी ने सर्वसम्मति से किया। किसी एक फिल्म पर पूरी जूरी का इस तरह एकमत हो जाना अपने आप में इस फिल्म की खूबियों की ओर साफ इशारा करता है।
भारत की ऑस्कर उम्मीद
हर साल भारत अकादमी पुरस्कारों के लिए अपनी एक फिल्म भेजता है, लेकिन नामांकन तक पहुँचना हमेशा आसान नहीं रहा। इसी वजह से 'होमबाउंड' का शॉर्टलिस्ट में जगह बनाना देश के सिनेमा प्रेमियों के लिए एक बड़ी और उत्साहजनक खबर बन गया है।
बताया गया है कि यह फिल्म हिंदी भाषा में बनी है, जो इसे और भी खास बनाती है। लंबे समय से भारतीय दर्शक ऐसी किसी हिंदी फिल्म का इंतज़ार कर रहे थे जो विश्व मंच पर देश का प्रतिनिधित्व इतने बड़े स्तर पर कर सके।
फिल्म की कहानी

फिल्म के केंद्र में दो युवा हैं, जिन्हें शोएब और चंदन के नाम से पेश किया गया है। इन किरदारों को क्रमशः ईशान खट्टर और विशाल जेठवा ने निभाया है, और पूरी कहानी इन्हीं दोनों के जीवन, रिश्तों और सपनों के इर्द-गिर्द बुनी गई है।
बताई गई जानकारी के अनुसार, कहानी उन सामाजिक पहचानों के इर्द-गिर्द घूमती है जो इन दोनों युवाओं के जीवन को आकार भी देती हैं और सीमित भी करती हैं। यह एक ऐसी कहानी है जो आम भारतीय ज़मीन की सच्चाइयों से गहराई से जुड़ी हुई महसूस होती है।
कान से ऑस्कर तक
इस फिल्म का सफर किसी साधारण रिलीज़ जैसा नहीं रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'होमबाउंड' का प्रीमियर प्रतिष्ठित कान फिल्म समारोह में हुआ, जो किसी भी फिल्म के लिए एक बहुत बड़ा और सम्मानजनक मंच माना जाता है।
कान जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर सराहना मिलने के बाद इस फिल्म को लेकर उम्मीदें और भी बढ़ गईं। यही वह आधार था जिसने आगे चलकर इसे भारत की ऑस्कर प्रविष्टि बनने और फिर शॉर्टलिस्ट तक पहुँचने का रास्ता दिखाया।
बड़े नाम, बड़ा सहयोग
फिल्म को मिली मज़बूती का एक कारण इसके पीछे खड़े बड़े नाम भी हैं। बताया गया है कि इसे धर्मा प्रोडक्शंस का सहयोग प्राप्त है, जो भारतीय सिनेमा के बड़े और स्थापित निर्माण घरानों में गिना जाता है।
इससे भी दिलचस्प बात यह है कि रिपोर्ट्स के अनुसार, विश्व सिनेमा के दिग्गज निर्देशक मार्टिन स्कॉर्सेसे इस फिल्म से कार्यकारी निर्माता के रूप में जुड़े हैं। इतने बड़े नाम का साथ आना फिल्म की गंभीरता और गुणवत्ता की गवाही देता है।
शॉर्टलिस्ट और आगे की राह
मौजूदा जानकारी के अनुसार, 'होमबाउंड' को अठानवेवें अकादमी पुरस्कारों की सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर श्रेणी की शॉर्टलिस्ट में शामिल किया गया है। बताया गया है कि यह उन गिनी-चुनी फिल्मों में से एक है जो अंतिम नामांकन की दौड़ में अब भी बची हुई हैं।
हालाँकि असली परीक्षा अभी बाकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंतिम नामांकनों की घोषणा अगले साल जनवरी में होनी है, और तभी यह पूरी तरह साफ होगा कि यह फिल्म आखिरी चुनिंदा नामों के बीच अपनी जगह बना पाती है या नहीं।
इसका मतलब क्या है
यह उपलब्धि सिर्फ एक फिल्म की सफलता भर नहीं है। यह इस बात का संकेत है कि भारतीय कहानियाँ, चाहे वे कितनी ही ज़मीनी क्यों न हों, अब दुनिया के सबसे बड़े मंचों पर भी अपनी आवाज़ पूरे आत्मविश्वास के साथ दर्ज करा सकती हैं।
आने वाले महीनों में सबकी निगाहें नामांकन की घोषणा पर टिकी रहेंगी। नतीजा जो भी हो, 'होमबाउंड' ने यह ज़रूर दिखा दिया है कि सादगी और सच्चाई से कही गई एक कहानी कितनी दूर तक पहुँच सकती है।
भारतीय सिनेमा का अच्छा विश्लेषण.
अच्छी बात.

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