करीब 75 करोड़ के बजट में बनी 'राजा शिवाजी' सबसे महंगी मराठी फिल्म बनी और 124 करोड़ से अधिक कमाकर सबसे बड़ी हिट भी। यह 2026 में क्षेत्रीय सिनेमा के बढ़ते कद की कहानी है।
साल 2026 भारतीय सिनेमा के लिए कई मायनों में खास रहा है, लेकिन इस बार सुर्खियों में सिर्फ बॉलीवुड या दक्षिण की फिल्में नहीं हैं। इस बार सबसे बड़ी चर्चा मराठी सिनेमा की हो रही है, और इसकी वजह है एक भव्य ऐतिहासिक फिल्म।
यह फिल्म है 'राजा शिवाजी', जिसने न सिर्फ दर्शकों का दिल जीता, बल्कि कमाई के मामले में भी कई नए कीर्तिमान स्थापित कर दिए। इसने साबित किया कि क्षेत्रीय सिनेमा भी बड़े परदे पर उतना ही बड़ा असर छोड़ सकता है जितना बड़ी फिल्में।
सबसे महंगी मराठी फिल्म
रिपोर्ट्स के अनुसार, 'राजा शिवाजी' को लगभग 75 करोड़ रुपये के बजट में बनाया गया, जो इसे अब तक की सबसे महंगी मराठी फिल्म बनाता है। यह आँकड़ा अपने आप में मराठी सिनेमा की बढ़ती महत्वाकांक्षा और आत्मविश्वास को साफ दर्शाता है।
इस फिल्म को एक साथ मराठी और हिंदी, दोनों भाषाओं में बनाया गया। यह रणनीति फिल्म को महाराष्ट्र से बाहर, देश के बड़े हिस्से तक पहुँचाने के लिए अपनाई गई, ताकि इसकी कहानी और भी विशाल दर्शक वर्ग तक आसानी से पहुँच सके।
सितारों से सजी कहानी

फिल्म का निर्देशन और सह-लेखन रितेश देशमुख ने किया है, और उन्होंने ही शीर्षक भूमिका में छत्रपति शिवाजी महाराज का किरदार निभाया है। यह उनके करियर की अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है।
फिल्म की कास्ट भी बेहद प्रभावशाली और भारी-भरकम है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसमें संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, महेश मांजरेकर, सचिन खेडेकर, भाग्यश्री, फरदीन खान और जेनेलिया देशमुख जैसे कई जाने-माने कलाकार शामिल हैं।
बॉक्स ऑफिस पर इतिहास
कमाई के मोर्चे पर फिल्म ने लगभग सबको चौंका दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, 'राजा शिवाजी' ने 124 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया, और इसके साथ ही यह अब तक की सबसे अधिक कमाई करने वाली मराठी फिल्म बन गई।
यह सफलता इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि मराठी फिल्में आमतौर पर सीमित बजट और सीमित पहुँच के साथ बनती रही हैं। ऐसे में इतनी बड़ी कमाई पूरे उद्योग के लिए एक नया आत्मविश्वास और नई उम्मीद लेकर आई है।
क्षेत्रीय सिनेमा का बढ़ता कद
'राजा शिवाजी' की कामयाबी को अलग-थलग करके नहीं देखा जा सकता। यह उस बड़ी लहर का हिस्सा है, जिसमें दक्षिण से लेकर अब मराठी तक, क्षेत्रीय फिल्में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी दमदार और मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं।
यह बदलाव दर्शकों की बदलती पसंद को भी साफ दर्शाता है। अब दर्शक भाषा की सीमाओं से आगे बढ़कर अच्छी कहानियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, और सबटाइटल तथा डबिंग ने इस पूरे रास्ते को और भी आसान बना दिया है।
आगे का रास्ता
इस बड़ी सफलता के बाद मराठी सिनेमा से उम्मीदें और भी कहीं अधिक बढ़ गई हैं। बड़े बजट, बड़े सितारे और भव्य कहानियाँ अब इस उद्योग के लिए असंभव नहीं रह गई हैं, बल्कि एक बिल्कुल नई संभावना बनकर उभरी हैं।
हालाँकि चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं। हर फिल्म इतनी बड़ी सफलता नहीं दोहरा सकती, और उद्योग को गुणवत्ता तथा विविधता बनाए रखते हुए इस गति को आगे ले जाना होगा, असल में यही उसकी सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
फिर भी, 2026 का यह अध्याय मराठी सिनेमा के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ है। 'राजा शिवाजी' ने दिखा दिया कि सही कहानी और सही महत्वाकांक्षा के साथ, कोई भी क्षेत्रीय सिनेमा राष्ट्रीय मंच पर पूरी तरह छा सकता है।
मराठी सिनेमा को फॉलो करता हूँ और यह मददगार है.
यहाँ मराठी सिनेमा के बारे में काफी कुछ सीखा.
एकदम सही.
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