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एआई का चेहरा चुराने का दौर: क्यों बॉलीवुड सितारे डीपफेक के खिलाफ अदालत का रुख कर रहे हैं

प्रिया शर्मा प्रिया शर्मा priyasharma.avalw.com · 4.7k reads Respect0 Save Share Read only
READS665live count PUBLISHED28 Aug2026 READING TIME3 min570 words LANGUAGEHindi
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बॉक्स ऑफिस की चकाचौंध से दूर, भारतीय सिनेमा में एक अलग लड़ाई अदालतों में लड़ी जा रही है। रवि किशन, अर्जुन कपूर, तब्बू और ऐश्वर्या राय जैसे सितारे दिल्ली हाई कोर्ट पहुँचकर अपने नाम, चेहरे और आवाज़ को एआई डीपफेक से बचा रहे हैं,एक ऐसे देश में जहाँ व्यक्तित्व अधिकारों के लिए अभी कोई अलग कानून तक नहीं है

बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों और स्ट्रीमिंग की चकाचौंध से दूर, भारतीय सिनेमा की दुनिया में इन दिनों एक बिलकुल अलग तरह की लड़ाई लड़ी जा रही है, और इसका मैदान न तो सिनेमाघर है और न ही ओटीटी, बल्कि अदालत के कमरे हैं, जहाँ सितारे अपने ही चेहरे और आवाज़ को बचाने के लिए खड़े हैं।

अदालत में सितारों की कतार

पिछले कुछ महीनों में यह सिलसिला तेज़ी से बढ़ा है, और एक के बाद एक बड़े नाम अपनी पहचान की हिफ़ाज़त के लिए दिल्ली हाई कोर्ट पहुँचे हैं, जिनमें अभिनेता और सांसद रवि किशन से लेकर अर्जुन कपूर, तब्बू और अल्लू अर्जुन जैसे नामी कलाकार तक शामिल हैं।

जुलाई 2026 में अदालत ने अभिनेता और सांसद रवि किशन के पक्ष में एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए उनके नाम, चेहरे, हावभाव और आवाज़ के अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगाई, और एआई से बनी तथा डीपफेक सामग्री को तुरंत हटाने का स्पष्ट निर्देश भी दिया।

इसी तरह अभिनेत्री तब्बू को भी राहत मिली, जहाँ अदालत ने उनके नाम, तस्वीरों, आवाज़, फ़िल्मी दृश्यों और यहाँ तक कि हस्ताक्षर के बिना अनुमति इस्तेमाल पर रोक लगाई, जबकि बॉलीवुड की दिग्गज ऐश्वर्या राय बच्चन भी अपनी छवि के एआई दुरुपयोग के खिलाफ अदालत पहुँचीं।

अदालत ने क्या कहा

एआई का चेहरा चुराने का दौर: क्यों बॉलीवुड सितारे डीपफेक के खिलाफ अदालत का रुख कर रहे हैं

इन आदेशों में अदालत का रुख बेहद स्पष्ट रहा है: किसी कलाकार का नाम, चेहरा, आवाज़ या पहचान से जुड़ी कोई भी विशेषता उसकी अनुमति के बिना इस्तेमाल करना पहली ही नज़र में अवैध है, और यह उसकी प्रतिष्ठा, गरिमा और निजता को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है।

यही वजह है कि अदालत ने न सिर्फ़ ऐसी सामग्री बनाने और फैलाने पर रोक लगाई, बल्कि तकनीकी मंचों को भी आपत्तिजनक और डीपफेक सामग्री को हटाने का निर्देश दिया, ताकि नुकसान और अधिक फैलने से पहले ही उस पर प्रभावी लगाम लगाई जा सके।

कानून की खामोशी

दिलचस्प बात यह है कि भारत में अभी तक व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा के लिए कोई अलग और स्पष्ट कानून मौजूद नहीं है, यानी इस पूरी लड़ाई का आधार कोई एक विशेष धारा नहीं, बल्कि अदालतों की व्याख्या और पहले से चले आ रहे कानूनी सिद्धांत हैं।

ऐसे में अदालतें व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों जैसी अवधारणाओं का सहारा लेकर सितारों को सुरक्षा दे रही हैं, जिससे एक तरह से अदालतें ही इस नए और तेज़ी से बदलते तकनीकी दौर में नियम गढ़ने का काम कर रही हैं, जब तक कोई ठोस कानून नहीं बन जाता।

यह सिर्फ़ शुरुआत है

जानकारों का मानना है कि मुकदमों की यह लहर महज़ शुरुआत है, क्योंकि जैसे-जैसे जनरेटिव एआई के औज़ार आम और सस्ते होते जा रहे हैं, किसी का भी चेहरा और आवाज़ हूबहू नकल कर देना पहले से कहीं ज़्यादा आसान और तेज़ होता जा रहा है।

यही कारण है कि अनुमान लगाया जा रहा है कि बॉलीवुड और एआई अधिकारों से जुड़े ऐसे मुकदमे 2026 और 2027 में और तेज़ होंगे, और यह बहस सिर्फ़ चंद बड़े सितारों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि धीरे-धीरे पूरे मनोरंजन उद्योग को अपनी चपेट में लेगी।

दरअसल, यह लड़ाई सिर्फ़ फ़िल्मी सितारों की नहीं है, बल्कि उस बुनियादी सवाल की है कि डिजिटल दौर में किसी इंसान की पहचान, उसकी सहमति और उसकी गरिमा पर आख़िरकार हक़ किसका है, और तकनीक की बेलगाम रफ़्तार के आगे ये अधिकार कैसे सुरक्षित रहेंगे।

फ़िलहाल अदालतें एक-एक कर सितारों को ढाल दे रही हैं, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब भारत इस चुनौती से निपटने के लिए एक स्पष्ट और मज़बूत कानून बनाएगा, क्योंकि तब तक चेहरे चुराने वाली तकनीक और उसे रोकने वाले कानून के बीच यह दौड़ यूँ ही जारी रहेगी।

1 responses

बॉलीवुड डीपफेक व्यक्तित्व अधिकार 2026 का अच्छा विश्लेषण.

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प्रिया शर्मा 2026-08-28 · 3 min read · 665 reads
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