देश में सोने की क़ीमत नई रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँच गई है और दस ग्राम शुद्ध सोने का भाव डेढ़ लाख रुपये के पार चला गया है। फेडरल रिज़र्व की दर कटौती की उम्मीदें, कमज़ोर रुपया, त्योहारी मांग और केंद्रीय बैंकों की खरीद, इस तेज़ी के पीछे की बड़ी वजहों पर एक नज़र।
सोने की चमक इन दिनों निवेशकों और आम खरीदारों, दोनों की आँखें चौंधिया रही है। पीली धातु की क़ीमत एक के बाद एक रिकॉर्ड तोड़ते हुए ऐसी ऊँचाई पर पहुँच गई है, जहाँ पहले कभी नहीं थी। दस ग्राम शुद्ध सोने का भाव अब डेढ़ लाख रुपये के आँकड़े को भी पार कर चुका है, जो कुछ साल पहले तक कल्पना से परे लगता था।
उपलब्ध बाज़ार आंकड़ों के अनुसार दस सितंबर को देश में चौबीस कैरेट सोने का औसत भाव लगभग एक लाख चौवन हज़ार तीन सौ रुपये प्रति दस ग्राम के आसपास रहा, जबकि गहनों में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला बाईस कैरेट सोना क़रीब एक लाख इकतालीस हज़ार रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर पर दर्ज किया गया।
क्यों चढ़ रहा है सोना
इस तेज़ी के पीछे सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से जुड़ी है। अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिज़र्व के ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें लगातार मज़बूत हो रही हैं। जब ब्याज दरें घटती हैं और डॉलर कमज़ोर पड़ता है, तो सोने में निवेश ज़्यादा आकर्षक हो जाता है, क्योंकि तब उसे अपने पास रखने की लागत भी घट जाती है।
इसके साथ ही दुनिया भर में आर्थिक सुस्ती की आशंका और भू-राजनीतिक तनावों ने भी निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर मोड़ा है। ऐसे अनिश्चित माहौल में सोना परंपरागत रूप से एक भरोसेमंद ठिकाना माना जाता है, जहाँ लोग अपनी पूँजी को अपेक्षाकृत सुरक्षित समझकर लगाते हैं, और यही बढ़ती मांग क़ीमतों को लगातार ऊपर धकेल रही है।
भारत के अपने कारण

वैश्विक कारणों के अलावा भारत की अपनी परिस्थितियाँ भी सोने को महँगा कर रही हैं। देश में त्योहारों और शादियों का मौसम नज़दीक आते ही सोने की भौतिक मांग तेज़ी से बढ़ जाती है। हर साल की तरह इस बार भी यही मौसमी खरीदारी क़ीमतों को अतिरिक्त सहारा दे रही है और बाज़ार में एक बार फिर रौनक़ लौट आई है।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले रुपये के कमज़ोर होने ने भी हालात बदले हैं। भारत अपनी ज़रूरत का अधिकांश सोना आयात करता है, इसलिए रुपया गिरने पर आयात महँगा हो जाता है और उसका सीधा असर घरेलू क़ीमतों पर पड़ता है। कुछ आंकड़ों के अनुसार एशिया में सोने की खुदरा खरीद महीने दर महीने पंद्रह प्रतिशत से अधिक बढ़ी है।
केंद्रीय बैंकों की भूमिका
सोने की इस तेज़ी में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की भूमिका भी बेहद अहम रही है। अनिश्चित समय में ये बैंक अपने भंडार में सोने का हिस्सा बढ़ाते जा रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार साल दो हज़ार छब्बीस की पहली तिमाही में ही केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडार में लगभग दो सौ बीस टन सोना और जोड़ा, जो इस रुझान की मज़बूती को साफ़ दिखाता है।
जानकारों का मानना है कि संस्थागत स्तर पर होने वाली यह लगातार खरीद क़ीमतों को नीचे गिरने से रोकती है। जब तक बड़े खरीदार बाज़ार में इस तरह सक्रिय रहते हैं, तब तक सोने के दाम में किसी बड़ी गिरावट की गुंजाइश कम रहती है, और यही बात मौजूदा तेज़ी को एक ठोस आधार भी देती है।
आम लोगों पर असर
इस रिकॉर्ड तेज़ी का सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो त्योहार या शादी के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं। गहनों की क़ीमत आसमान छूने से कई लोगों का बजट गड़बड़ा गया है, और अब वे पहले के मुक़ाबले कम वज़न के या हल्के डिज़ाइन वाले आभूषणों की ओर रुख़ कर रहे हैं।
बाज़ार में यह बदलाव भी देखा जा रहा है कि कुछ खरीदार अब भारी गहनों के बजाय सोने के सिक्कों, छोटे बिस्कुट या डिजिटल सोने जैसे विकल्पों को अपना रहे हैं। इससे वे कम राशि में भी सोने में निवेश बनाए रख पाते हैं और भविष्य में क़ीमत बढ़ने का लाभ उठाने की उम्मीद भी रखते हैं।
निवेशकों के लिए इसका मतलब
निवेश की दुनिया में सोने को हमेशा से जोखिम कम करने वाले साधन के रूप में देखा जाता रहा है। विशेषज्ञ अक्सर सलाह देते हैं कि किसी भी निवेशक को अपने कुल निवेश का एक सीमित हिस्सा ही सोने में रखना चाहिए, ताकि बाज़ार के उतार-चढ़ाव के बीच उसका समग्र पोर्टफोलियो संतुलित बना रहे।
हालाँकि जानकार यह चेतावनी भी देते हैं कि रिकॉर्ड ऊँचाई पर सिर्फ़ तेज़ी देखकर आँख मूँदकर खरीदारी करना जोखिम भरा हो सकता है। क़ीमतें जितनी तेज़ी से चढ़ती हैं, कभी-कभी उतनी ही तेज़ी से सुधार भी कर सकती हैं, इसलिए सोच-समझकर और अपनी असल ज़रूरत के अनुसार ही निर्णय लेना बेहतर रहता है।
आगे क्या
आने वाले महीनों में सोना किस दिशा में जाएगा, यह काफ़ी हद तक फेडरल रिज़र्व के फ़ैसलों, रुपये की चाल और वैश्विक हालात पर निर्भर करेगा। फ़िलहाल तो त्योहारी मांग और अनिश्चित माहौल के बीच पीली धातु की चमक बरक़रार दिख रही है, पर बाज़ार में कुछ भी पत्थर की लकीर नहीं होता, यह बात हर खरीदार को याद रखनी चाहिए।
सोने का भाव: कहीं और से बेहतर बताया.
यहाँ सोने का भाव के बारे में काफी कुछ सीखा.
स्पष्ट और अच्छा लिखा.
पूरी तरह सहमत.

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