सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग स्किन फास्टिंग का खतरा जानिए। डॉ. निवेदिता दादू ने बताया कि यह गलतफहमी है।
आजकल फेसबुक और इंस्टाग्राम पर 'स्किन फास्टिंग' का शब्द इतना चर्चित हो गया है कि लगता है यह कोई नया इलाज है। लोग मान रहे हैं कि बस मेकअप और क्रीम छोड़ देने से ही चेहरा चमक उठेगा। लेकिन जब मैंने डॉ. निवेदिता दादू से इस बारे में पूछा, तो उनका जवाब बेहद सीधा और कठोर था। यह कोई जादू की गोलियां नहीं हैं, बल्कि यह एक बड़ी गलतफहमी है जो आपके चेहरे को नुकसान पहुंचा रही है।
असल में, बहुत से लोग बिना किसी जानकारी के यह प्रयोग कर रहे हैं। त्वचा को 'भूखा' रखने का कोई वैज्ञानिक तथ्य नहीं है। यह सिर्फ एक मिथक है जिसे सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल कर दिया गया। डॉक्टर का कहना है कि त्वचा एक जीवित ऊतक है, इसे पोषण चाहिए, भूख नहीं।
स्किन फास्टिंग क्या है और क्यों ट्रेंड कर रही है
इस ट्रेंड में लोग अपनी रोजमर्रा की स्किनकेयर रूटीन, जिसमें क्लींजर, मॉइश्चराइजर और सनस्क्रीन शामिल होते हैं, को पूरी तरह बंद कर देते हैं। उनका मानना है कि त्वचा को 'ब्रेक' मिलने से यह स्वतः संतुलित हो जाएगी। यह विचार इस बात से आया है कि हमें भोजन की बजाए फास्टिंग की सलाह दी जाती है, लेकिन त्वचा के लिए यह तर्क लागू नहीं होता।
डॉ. निवेदिता दादू ने स्पष्ट किया कि त्वचा कोशिकाओं को ऊर्जा और मॉइस्चर की आवश्यकता होती है। जब आप मॉइश्चराइजर और सनस्क्रीन का उपयोग छोड़ देते हैं, तो त्वचा ड्राई और सनबर्न होने से प्रभावित होती है। यह 'फास्टिंग' वास्तव में त्वचा को तनाव देती है, उसे स्वस्थ नहीं।

डॉक्टर का चेतावनी भरा बयान
डॉ. दादू का कहना है कि सनस्क्रीन को छोड़ना सबसे बड़ी गलती है। सूरज के अल्ट्रावायोलेट किरणों से बचाव बिना त्वचा में प्रीमियम एजिंग और पिगमेंटेशन की समस्या हो सकती है। यह एक लंबी अवधि का नुकसान है।
साथ ही, रोजाना का क्लींजिंग भी ज़रूरी है। धूल, खून और पसीना त्वचा पर जमा होता है, जिससे पोर बंद हो सकते हैं। 'फास्टिंग' के नाम पर यह सब छोड़ना त्वचा के लिए हानिकारक है।

सही स्किनकेयर रूटीन क्या होना चाहिए
डॉक्टर की सलाह है कि आप अपनी मौजूदा स्किनकेयर रूटीन को बनाए रखें। सुबह और शाम को क्लींजर का उपयोग करें, मॉइश्चराइजर लगाएं और दिन में सनस्क्रीन लगाएं। यह तीन स्टेप की रूटीन ही त्वचा को स्वस्थ रखती है।
अगर आप किसी नए प्रोडक्ट को ट्राय करना चाहते हैं, तो पहले प्याच टेस्ट करें। बिना जानकारी के ट्रेंडों का पीछा न करें। सही जानकारी ही असली ब्यूटी है।

सोशल मीडिया और स्वास्थ्य: सतर्कता बरतें
सोशल मीडिया पर हर दूसरा दिन कोई नया 'ब्यूटी हैक' वायरल होता है। लोग बिना सोचे समझे इनका इस्तेमाल करते हैं। यह एक खतरनाक रूत है। हमेशा किसी योग्य डॉक्टर या डर्मटोलॉजिस्ट से सलाह लें।
स्वस्थ त्वचा के लिए कोई शॉर्टकट नहीं है। नियमित देखभाल, संतुलित आहार और पर्याप्त पानी ही असली रहस्य है। ट्रेंडों का शिकार न बनें, बल्कि जानकारी से सशक्त बनें।
निष्कर्ष: ज्ञान ही शक्ति है
स्किन फास्टिंग एक मिथक है, वास्तविकता नहीं। डॉ. निवेदिता दादू का सार है: अपनी त्वचा की सुनिए, लेकिन सोशल मीडिया की नहीं। सही जानकारी ही आपको गलती से बचाएगी।
अगली बार जब कोई नया ब्यूटी ट्रेंड देखें, तो एक बार सोचें: क्या इसका वैज्ञानिक आधार है? या यह सिर्फ एक वायरल शब्द है? ज्ञान ही आपकी सबसे बड़ी ब्यूटी है।
