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संतुलित थाली का फॉर्मूला: ICMR की डाइट गाइडलाइन और मोटे अनाज की वापसी

Priya Menon Priya Menon priyamenon.avalw.com · 447 reads Respect0 Save Share Read only
READS602live count PUBLISHED29 Aug2026 READING TIME2 min312 words LANGUAGEHindi
AI CITATIONS? Gathering data

ICMR-NIN की भारतीयों के लिए डाइट गाइडलाइन क्या कहती है? संतुलित थाली का गणित और बाजरे-ज्वार जैसे मोटे अनाजों की वापसी, आसान भाषा में समझिए।

संतुलित थाली का गणित

रंग-बिरंगी सब्ज़ियाँ, दालें और मोटे अनाज—एक संतुलित थाली इसी विविधता से बनती है।
रंग-बिरंगी सब्ज़ियाँ, दालें और मोटे अनाज—एक संतुलित थाली इसी विविधता से बनती है।

गाइडलाइन के मुताबिक, दो हज़ार कैलोरी की एक संतुलित थाली में रोज़ लगभग 250 ग्राम अनाज और मोटे अनाज, 85 ग्राम दालें और फलियाँ, 400 ग्राम सब्ज़ियाँ, 300 मिलीलीटर दूध या दही, 100 ग्राम फल, 35 ग्राम मेवे-बीज और सिर्फ़ 27 ग्राम तेल-घी होना चाहिए। यानी थाली का बड़ा हिस्सा अनाज और सब्ज़ियों का हो, जबकि चिकनाई बेहद सीमित रखी जाए।

बाजरे-ज्वार की वापसी

सबसे बड़ा बदलाव मोटे अनाज यानी मिलेट्स को लेकर है। ICMR-NIN की सलाह है कि कुल अनाज में से करीब 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाजों का होना चाहिए। कभी हाशिए पर डाल दिए गए ये अनाज अब फाइबर, प्रोटीन और ज़रूरी खनिजों के भंडार के रूप में दोबारा हमारी रसोई के केंद्र में लौट रहे हैं।

सिर्फ़ कागज़ पर नहीं

यह बदलाव केवल किताबी नहीं है। साल 2024-25 में आंध्र प्रदेश के तीन इलाकों में एक अध्ययन किया गया, जिसमें बच्चों के भोजन में मोटे अनाज शामिल करके उनके पोषण स्तर पर पड़ने वाले असर को परखा गया। ऐसे ज़मीनी प्रयोग यह समझने में मदद करते हैं कि हमारे पारंपरिक अनाज कुपोषण से लड़ने में असल में कितने कारगर साबित हो सकते हैं।

दो तरफ़ा चुनौती

भारत की मुश्किल दरअसल दोहरी है। एक ओर आज भी कुपोषण और खून की कमी जैसी पुरानी समस्याएँ मौजूद हैं, तो दूसरी ओर शहरों में मोटापा और डायबिटीज़ जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। यही वजह है कि नई गाइडलाइन कम खाने और ज़्यादा खाने, दोनों ही अतियों से बचकर एक संतुलित बीच का रास्ता अपनाने पर ज़ोर देती है।

छोटे बदलाव, बड़ा असर

अच्छी खबर यह है कि इसके लिए किसी महँगी डाइट या विदेशी सुपरफूड की ज़रूरत नहीं है। थाली में थोड़ा ज़्यादा बाजरा-ज्वार, ज़्यादा हरी सब्ज़ियाँ और थोड़ा कम तेल—बस इतने से ही बड़ी बात बन सकती है। मेरा मानना हमेशा से यही रहा है कि सेहत किसी सख्त नियम की नहीं, बल्कि रोज़ की छोटी-छोटी समझदार आदतों की देन होती है।

2 responses

यहाँ पोषण के बारे में काफी कुछ सीखा.

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Priya Menon 2026-08-29 · 2 min read · 602 reads
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