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मखाने से मिलेट तक: भारत में बदल रहा है सेहत का स्वाद HEALTH · IN

मखाने से मिलेट तक: भारत में बदल रहा है सेहत का स्वाद

Priya Menon Priya Menon priyamenon.avalw.com · 683 reads Respect0 Save Share Read only
READS568live count PUBLISHED5 Sept2026 READING TIME3 min575 words LANGUAGEHindi
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भारत में खान-पान की आदतें तेजी से बदल रही हैं। मखाना, मिलेट, मेवे और प्रोटीन से भरपूर उत्पाद मुख्यधारा में आ रहे हैं, और एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 69 प्रतिशत उपभोक्ता अधिक प्रोटीन ले रहे हैं।

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भारत में खान-पान की आदतें तेजी से बदल रही हैं। जो चीजें कभी सिर्फ सेहत के प्रति जागरूक कुछ लोगों तक सीमित थीं, वे अब आम घरों की रसोई और बाजार का हिस्सा बनती जा रही हैं, और यह बदलाव धीरे-धीरे और गहराता जा रहा है।

इस बदलाव के पीछे बढ़ती जागरूकता है। लोग अब सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि शरीर को पोषण देने और बीमारियों से बचने के लिए सोच-समझकर भोजन चुन रहे हैं, जिससे सेहतमंद खाद्य पदार्थों की माँग लगातार बढ़ रही है।

सेहत की ओर बढ़ता रुझान

मखाना, मिलेट और मेवे जैसे सेहतमंद खाद्य पदार्थ भारतीय थाली में जगह बना रहे हैं।
मखाना, मिलेट और मेवे जैसे सेहतमंद खाद्य पदार्थ भारतीय थाली में जगह बना रहे हैं।

बाजार पर नजर रखने वाली एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय उपभोक्ताओं की पसंद में साफ बदलाव दिख रहा है। पारंपरिक और प्राकृतिक खाद्य पदार्थ एक बार फिर लोकप्रिय हो रहे हैं, और उन्हें आधुनिक रूप में भी पेश किया जा रहा है।

इस श्रेणी में मखाना, मिलेट यानी मोटे अनाज, ग्रीक दही, मेवे और बीज, पीनट बटर, ग्रैनोला तथा प्रोटीन बार जैसे उत्पाद शामिल हैं। कभी विशेष माने जाने वाले ये खाद्य पदार्थ अब रोजमर्रा की खपत का हिस्सा बन रहे हैं।

मखाना और मिलेट की वापसी

मखाना, जिसे फॉक्सनट भी कहा जाता है, इस बदलाव का एक बड़ा उदाहरण है। यह हल्का, पौष्टिक और आसानी से खाया जाने वाला स्नैक है, जिसे अब सेहत के प्रति सजग लोग नमकीन और चिप्स के बेहतर विकल्प के रूप में अपना रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि भारत के अधिकांश मखाने का उत्पादन बिहार में होता है, जो दुनिया में इसका सबसे बड़ा उत्पादक है। इसके साथ ही बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाज भी ब्रेड, दोसा मिक्स और बिस्किट के रूप में लौट रहे हैं।

प्रोटीन की बढ़ती माँग

भारतीयों की थाली में प्रोटीन को लेकर जागरूकता भी तेजी से बढ़ी है। एक रिपोर्ट के अनुसार, करीब 69 प्रतिशत भारतीय उपभोक्ता अब अपने आहार में पहले से अधिक प्रोटीन शामिल करने का सचेत प्रयास कर रहे हैं।

इसी वजह से प्रोटीन अब सिर्फ जिम जाने वालों तक सीमित नहीं रहा। यह स्नैक्स, नाश्ते के उत्पादों और यहाँ तक कि पेय पदार्थों में भी शामिल हो रहा है, जिससे आम लोगों के लिए इसे अपनाना पहले से कहीं आसान हो गया है।

आंत के स्वास्थ्य पर ध्यान

सेहत की इस नई सोच में पाचन और आंत के स्वास्थ्य को भी अहम माना जा रहा है। उसी रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 61 प्रतिशत भारतीय उपभोक्ता आंत के स्वास्थ्य को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं।

यही कारण है कि प्रोबायोटिक पेय, कोम्बुचा और केफिर जैसे किण्वित पेय पदार्थ लोकप्रिय हो रहे हैं। पारंपरिक भारतीय भोजन में भी दही और अचार जैसी चीजें लंबे समय से इसी भूमिका को निभाती आई हैं।

राष्ट्रीय पोषण सप्ताह

यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब देश में पोषण को लेकर जागरूकता अभियान भी चल रहे हैं। हर साल सितंबर की शुरुआत में मनाया जाने वाला राष्ट्रीय पोषण सप्ताह लोगों को संतुलित आहार का महत्व समझाने पर केंद्रित रहता है।

विशेषज्ञ लंबे समय से विविध आहार की सलाह देते रहे हैं, जिसमें अनाज, मोटे अनाज, दालें, सब्जियाँ और फल सभी शामिल हों। मौजूदा रुझान काफी हद तक इसी सलाह के अनुरूप दिखाई देता है, जो एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।

आगे की राह

जानकारों का मानना है कि यह बदलाव केवल एक अस्थायी फैशन नहीं है। बढ़ती आय, शहरीकरण और सेहत के प्रति गंभीरता ने मिलकर लोगों की खाने की आदतों को स्थायी रूप से प्रभावित करना शुरू कर दिया है।

हालांकि चुनौतियाँ भी बनी हुई हैं, जैसे इन उत्पादों की कीमत और सभी तक इनकी पहुँच सुनिश्चित करना। फिर भी, यह रुझान दर्शाता है कि भारत धीरे-धीरे परंपरा और आधुनिकता को जोड़ते हुए एक सेहतमंद दिशा में आगे बढ़ रहा है।

2 responses

यहाँ भारत के बारे में काफी कुछ सीखा.

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भारत का अच्छा विश्लेषण.

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Priya Menon 2026-09-05 · 3 min read · 568 reads
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