प्रदूषण, मिठाई और बदले हुए मौसम से त्वचा और पेट की सेहत को किस तरह से बचाएं, जानिए प्रोफेशनल सलाह के साथ।
पिछले कुछ सालों से दीवाली का त्योहार सिर्फ दीयों और मिठाई की खुशबू नहीं, बल्कि खतरनाक स्तर के एयर पॉल्यूशन का भी प्रतीक बन गया है। आतिशबाजी, पराली के धुएं और मौसम की अचानक बदलाव मिलकर हवा को इतना जहरीला बना देते हैं कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इस जहरीली हवा से हमारी त्वचा और बाल भी बुरी तरह प्रभावित होते हैं, जिससे अचानक गंभीर स्किन एलर्जी, खुजली और आंखों में जलन की शिकायतें सामने आने लगती हैं।
हवा में मौजूद बारीक कण, जिन्हें PM2.5 और टॉक्सिक केमिकल्स कहते हैं, सीधे त्वचा की नेचुरल बैरियर लेयर को तोड़ देते हैं। इससे समय से पहले झुर्रियां आना, एक्जिमा, बालों का झड़ना और रूखापन आम बात हो जाता है। ऐसे में सिर्फ बाहरी क्रीम और लोशन लगाकर ही काम नहीं बनेगा। यदि आप अपनी स्किन और बालों की सच्ची हिफाजत चाहते हैं, तो आपको अपनी रोजमर्रा की आदतों, खानपान और लाइफस्टाइल में कुछ बेहद जरूरी बदलाव करने पड़ेंगे।
त्वचा और बालों की असली जंग
अमेरिकन जर्नल ऑफ मैनेज्ड केयर के मुताबिक, त्वचा हमारे शरीर का सबसे बड़ा अंग है और खुले में रहने के कारण यह सीधे जहरीली हवा के संपर्क में आता है। प्रदूषण के सूक्ष्म कण रोमछिद्रों में जमा हो जाते हैं, जिससे पिंपल्स, एलर्जी और चेहरे का डुलना बढ़ने लगता है। यह समस्या सिर्फ चेहरे तक सीमित नहीं है। पॉलिश जर्नल ऑफ एनवायरमेंटल स्टडीज के अनुसार, बालों का हाल भी त्वचा से अलग नहीं होता है।
हवा में तैरते कार्बन के कण और धूल सीधे बालों की जड़ों और स्कैल्प पर चिपक जाते हैं। इससे बाल बेजान, फ्रिज़ी होकर टूटने लगते हैं और रूखापन की समस्या बढ़ती है। ऐसे में आपको अपनी स्किन केयर रूटीन में कुछ बदलाव जरूर करने होंगे। नियमित क्लीन्ज़िंग, हाइड्रेशन और एंटीऑक्सीडेंट युक्त फूड्स का सेवन करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, घर के अंदर स्नेक प्लांट या अरेका palma जैसे पौधे लगाने से हवा को नेचुरल तरीके से साफ करने में मदद मिलती है।

अंदर से मजबूती की जरूरत
जब तक आप अंदर से मजबूत नहीं होंगे, तब तक स्किन और बालों पर पॉल्यूशन का असर दिखता रहेगा। इसलिए दिन भर में ज्यादा से ज्यादा पानी पीना बेहद जरूरी है ताकि शरीर के टॉक्सिन्स यूरिन के रास्ते बाहर निकल सकें। इसके अलावा, दिन में एक या दो कप ग्रीन टी पीना भी फायदेमंद है, क्योंकि यह एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है और पॉल्यूशन से लड़ने में शरीर की मदद करती है।
आपकी डाइट में विटामिन-सी और ई से भरपूर फलों को शामिल करना चाहिए। पपीता, गाजर, चुकंदर और अनार जैसे फल खाएं, क्योंकि ये विटामिन्स त्वचा की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स के असर से बचाते हैं। इन छोटे-छोटे बदलावों से आपकी त्वचा को जरूरी पोषण मिलेगा और वह बाहरी प्रदूषण के खिलाफ बेहतर तरीके से लड़ पाएगी।

ओवरईटिंग और मिलावटी भोजन का खतरा
दीवाली के मौके पर लोगों से मिलने-जुलने, पार्टी और भोजन के चलते खानपान सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक और अव्यवस्थित हो जाता है। यही छोटी सी लापरवाही लंबे समय तक आपको सेहत की गंभीर परेशानियों में डाल सकती है। ब्रह्मानंद मिश्र के अनुसार, इन दिनों खाद्य पदार्थों में मिलावट की खबरें सबसे अधिक चर्चा में रहती हैं।
दीवाली की खरीदारी में मिठाईयों और खाद्य पदार्थों की मिलावटी आपको नई मुसीबत में डाल सकती है। दूषित और मिलावटी खाद्य पदार्थों के चलते इन दिनों पेट के संक्रमण, त्वचा संक्रमण, डायरिया और किडनी की समस्या होने का डर रहता है। खासकर दूध-पनीर से बने प्रोडक्ट में सबसे अधिक मिलावट देखने में आती है। ऐसे में जरूरी है कि त्योहार में बाहर का भोजन जितना भी कम हो सके, उतना ही अच्छा है।

स्वस्थ विकल्प और नियमन
अगर आप मिठाईयां और बाहर का भोजन लेते भी हैं, तो मामूली सेवन ही करें। इससे नुकसान कम होगा। यदि इसकी अधिकता रखेंगे, तो सेहत से जुड़ी परेशानी स्वाभाविक रूप से बढ़ सकती है। गिफ्टिंग और लेनदेन में अगर मिठाईयों के बजाय ड्राई फ्रूट्स या मौसमी फलों का लेनदेन करते हैं, तो वह सेहत के लिए भी अच्छा उपहार होगा।
मिठाई के बजाय अगर आप खजूर, सूखे मेवे, नट्स, सीड्स और ताजे फलों का सेवन करते हैं, तो न केवल संभावित परेशानी से बचे रहेंगे, बल्कि खुशी के साथ त्योहार भी मना पाएंगे। इन दिनों कैलोरी इनटेक अपेक्षाकृत अधिक हो जाता है। ऐसे में ध्यान रखें कि नियमित व्यायाम की आदत को न छोड़ें। संभव हो तो शारीरिक सक्रियता थोड़ा अधिक ही रखें।
गट हेल्थ और पेट की सेहत
पेट में गैस बनना, बार-बार डकार आना या पेट फूलना आम समस्याएं हैं। कई लोग इन्हें मामूली परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कई बार ये खानपान, मानसिक तनाव और खराब लाइफस्टाइल से जुड़ी हो सकती हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (ILBS) के संस्थापक निदेशक प्रोफेसर डॉ. एस.के. सरीन ने बताया कि गट यानी आंतों की सेहत सिर्फ खाना पचाने तक सीमित नहीं है। इसका संबंध शरीर के मेटाबॉलिज्म और इम्यून सिस्टम से भी है।
डॉ. सरीन का कहना है कि अच्छी गट हेल्थ के लिए आप घर का खाना खाएं। नाश्ते में फल शामिल करें और बाहर के तले-भुने और ज्यादा प्रोसेस्ड फूड को न खाएं। रोजाना एक जैसा खाना खाने के बजाय फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालों को अपनी डाइट में शामिल करें। डॉक्टर ने दिन में एक बार भोजन करने यानी 'वन मील ए डे' की सलाह भी दी है, हालांकि यह हर व्यक्ति के लिए जरूरी या बेहतर तरीका नहीं है। डायबिटीज, दूसरी बीमारियों, कमजोरी या दवाएं लेने वाले लोगों को ऐसा डाइट पैटर्न अपनाने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह लेनी चाहिए।
डॉक्टर ने एक्सरसाइज और पसीना आने को भी सेहत के लिए फायदेमंद बताया है। हालांकि, पसीने के जरिए शरीर के टॉक्सिन बाहर निकलने का दावा सही नहीं है। शरीर से टॉक्सिन निकालने का काम लिवर और किडनी करते हैं, जबकि पसीने का काम शरीर के तापपान को मेंटेन करना है।
हृदय स्वास्थ्य और नियमित व्यायाम
दिल की बीमारियां वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा साबित हो रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के विशेषज्ञ कहते हैं कि हृदय रोग विश्व स्तर पर मौत का प्रमुख कारण है, जो हर तीन मौतों में से लगभग एक मौत के लिए जिम्मेदार है। कुछ दशकों पहले तक माना जाता था कि हार्ट की समस्याएं सिर्फ बुजुर्गों को होती हैं, पर अब कम उम्र के लोग भी इसका शिकार होते जा रहे हैं।
सेहत के लिए रोजाना पैदल चलने की आदत बेहद फायदेमंद हो सकती है। सप्ताह में पांच दिन 30 मिनट वॉक करने से ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। नियमित वॉक वजन घटाने, तनाव कम करने और हार्ट डिजीज के जोखिम को कम करने में सहायक है।
