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भारत में सोना नई ऊंचाई पर, गहनों की जगह अब निवेश की चमक बढ़ी

इशा मल्होत्रा इशा मल्होत्रा ishamalhotra.avalw.com · 1.3k reads Respect0 Save Share Read only
READS28live count PUBLISHED25 Sept2026 READING TIME3 min639 words LANGUAGEHindi
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रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के बीच भारत में सोने के प्रति नजरिया बदल रहा है। त्योहारी मौसम में गहनों की मांग कुछ धीमी पड़ी, जबकि सिक्के, बिस्किट और ईटीएफ जैसे निवेश विकल्पों की ओर लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है।

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भारत में सोना सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि परंपरा, भरोसे और बचत का प्रतीक माना जाता है। इस साल सोने की कीमतों ने नई ऊंचाइयों को छूकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है, और निवेशकों से लेकर आम खरीदारों तक हर किसी की निगाहें अब इसी बाजार पर टिकी हुई नजर आ रही हैं।

सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी

रिपोर्ट के अनुसार इस साल घरेलू बाजार में सोने की कीमत रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। बताया जा रहा है कि दस ग्राम सोने का भाव एक लाख पचहत्तर हजार रुपये से भी अधिक हो गया, जो पहले कभी नहीं देखा गया था और इसने पूरे बाजार में जबरदस्त हलचल मचा दी।

रिपोर्ट के अनुसार शुद्धतम मानी जाने वाली चौबीस कैरेट श्रेणी का भाव भी काफी ऊंचा बना रहा। खबरों के मुताबिक यह करीब एक लाख अट्ठावन हजार रुपये प्रति दस ग्राम के आसपास रहा, जिससे सोने में निवेश और खरीदारी दोनों को लेकर बाजार में चर्चा और तेज हो गई।

त्योहारी मौसम की शुरुआत

रिपोर्ट के अनुसार भारत में त्योहारी मौसम की शुरुआत अगस्त के आखिर से ही हो चुकी थी। यह वही समय होता है जब देश भर में सोने की खरीदारी परंपरागत रूप से सबसे अधिक होती है, क्योंकि इसे शुभ और समृद्धि का प्रतीक मानकर घरों में खरीदा जाता है।

हालांकि खबरों के मुताबिक इस बार गहनों की मांग में पहले जैसी तेजी नहीं दिखाई दी। बताया जा रहा है कि ऊंची कीमतों के चलते कई खरीदार सतर्क हो गए, और त्योहारों से पहले दिखने वाला उत्साह हाल के हफ्तों में कुछ हद तक धीमा पड़ता हुआ नजर आया।

गहनों से हटकर निवेश की ओर

ऊंची कीमतों के बीच कई भारतीय अब सोने को गहनों के बजाय निवेश के एक मजबूत साधन के रूप में देखने लगे हैं।
ऊंची कीमतों के बीच कई भारतीय अब सोने को गहनों के बजाय निवेश के एक मजबूत साधन के रूप में देखने लगे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार इस साल बाजार में एक बेहद दिलचस्प बदलाव देखने को मिला। महंगे गहनों की जगह अब कई लोग सोने को निवेश के रूप में खरीदना पसंद कर रहे हैं, जिसमें सिक्के, बिस्किट और दूसरे आधुनिक विकल्प तेजी से लोकप्रिय होते जा रहे हैं।

खबरों के मुताबिक यह बदलाव लोगों की सोच में आ रहे फर्क को भी साफ तौर पर दर्शाता है। अब कई खरीदार सोने को सिर्फ पहनने की वस्तु के बजाय भविष्य की सुरक्षा और बचत के एक मजबूत साधन के रूप में देखने लगे हैं, जो अपने आप में एक नई प्रवृत्ति है।

ईटीएफ और सिक्कों की बढ़ती मांग

रिपोर्ट के अनुसार सोने से जुड़े निवेश उत्पादों की मांग में इस साल उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। बताया जा रहा है कि सिक्कों, बिस्किटों और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ईटीएफ में आम लोगों की दिलचस्पी लगातार बढ़ती ही चली जा रही है।

खबरों के मुताबिक इस साल ईटीएफ में करीब सैंतीस टन सोने के बराबर निवेश आया। बताया जा रहा है कि यह रकम कई सौ अरब रुपये तक जा पहुंची, जो साफ दिखाता है कि निवेशक अब कागजी और डिजिटल रूप में भी सोना अपने पास रखना पसंद कर रहे हैं।

आयात में आई गिरावट

रिपोर्ट के अनुसार दूसरी ओर देश में सोने के आयात में तेज गिरावट भी देखने को मिली। बताया जा रहा है कि अगस्त के महीने में आयात पिछले महीनों और पिछले साल की तुलना में काफी कम रहा, जिसकी कई अलगअलग वजहें जानकारों की ओर से बताई जा रही हैं।

खबरों के मुताबिक पुराने सोने को बदलकर नए गहने बनवाने का चलन भी इस दौरान बढ़ा है। बताया जा रहा है कि इससे घरेलू बाजार में सोने की उपलब्धता बनी रही, और इसने भी नए आयात की जरूरत को कुछ हद तक कम करने में अहम भूमिका निभाई है।

आगे की राह

रिपोर्ट के अनुसार आने वाले महीनों में सोने का बाजार किस दिशा में आगे बढ़ेगा, इस पर इस समय सभी की नजरें टिकी हुई हैं। जानकारों के अनुसार कीमतों में उतारचढ़ाव के बीच भी निवेश की मांग आगे लंबे समय तक मजबूत बनी रह सकती है।

खबरों के मुताबिक विशेषज्ञ खरीदारों को हमेशा सोच समझकर और अपनी असली जरूरत के अनुसार ही निर्णय लेने की सलाह देते हैं। बताया जा रहा है कि सोने में निवेश यदि लंबे समय के नजरिए से किया जाए, तो यह आमतौर पर बेहतर परिणाम देने की क्षमता रखता है।

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इशा मल्होत्रा 2026-09-25 · 3 min read · 28 reads
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