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भारत में एसआईपी निवेश ने अगस्त में नया रिकॉर्ड बनाया

इशा मल्होत्रा इशा मल्होत्रा ishamalhotra.avalw.com · 1.3k reads Respect0 Save Share Read only
READS22live count PUBLISHED22 Sept2026 READING TIME2 min449 words LANGUAGEHindi
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भारत में व्यवस्थित निवेश योजना यानी एसआईपी के ज़रिए आने वाली रकम अगस्त 2026 में रिकॉर्ड बत्तीस हज़ार करोड़ रुपये से अधिक पहुँच गई। रिपोर्टों के अनुसार सक्रिय एसआईपी खाते दस करोड़ पचहत्तर लाख के पार हैं और यह निवेश उद्योग की कुल संपत्ति का बीस प्रतिशत से अधिक हिस्सा बन चुका है।

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अगस्त में सर्वकालिक ऊँचाई

रिपोर्टों के अनुसार अगस्त 2026 में मासिक एसआईपी योगदान बढ़कर लगभग बत्तीस हज़ार दो सौ सत्तानबे करोड़ रुपये तक पहुँच गया, जो एक महीने पहले की तुलना में करीब सवा प्रतिशत और पिछले साल की तुलना में चौदह प्रतिशत अधिक है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह लगातार बढ़ते भरोसे का संकेत है, क्योंकि आम निवेशक बाज़ार के उतार चढ़ाव के बावजूद हर महीने तय रकम लगाना जारी रखे हुए हैं और अपने अनुशासन को बनाए हुए हैं।

लगातार बढ़ता मासिक आँकड़ा

छोटी बचत को नियमित निवेश में बदलने की आदत भारत के मध्यम वर्ग में तेज़ी से बढ़ रही है।
छोटी बचत को नियमित निवेश में बदलने की आदत भारत के मध्यम वर्ग में तेज़ी से बढ़ रही है।

इन्हीं आँकड़ों के अनुसार इस साल हर महीने का योगदान ऊँचे स्तर पर बना रहा, मार्च में यह करीब बत्तीस हज़ार करोड़ रुपये था, जबकि अप्रैल, मई, जून और जुलाई में भी यह इकतीस हज़ार करोड़ रुपये के आसपास टिका रहा।

उद्योग से जुड़े लोग बताते हैं कि जून का महीना ऐसा लगातार पाँचवाँ महीना रहा जब यह आँकड़ा इकतीस हज़ार करोड़ रुपये या उससे अधिक रहा, जो इस पूरी प्रवृत्ति की मज़बूती को साफ़ तौर पर दर्शाता है।

एसआईपी खातों की बढ़ती संख्या

रिपोर्टों के अनुसार अगस्त 2026 तक देश में सक्रिय एसआईपी खातों की संख्या दस करोड़ पचहत्तर लाख से अधिक हो चुकी है, जो दिखाता है कि यह तरीका अब देश की एक बड़ी आबादी तक पहुँच चुका है।

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एक ही महीने में तेरह लाख से अधिक नए खाते जुड़े, जिससे यह साफ़ होता है कि नए निवेशक भी लगातार इस राह पर आगे बढ़ते जा रहे हैं।

उद्योग में बढ़ता हिस्सा

इन्हीं आँकड़ों के अनुसार एसआईपी के ज़रिए जमा कुल संपत्ति बढ़कर सोलह लाख पचासी हज़ार करोड़ रुपये तक पहुँच गई है, जो पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग की संपत्ति का बीस प्रतिशत से अधिक हिस्सा मानी जा रही है।

उद्योग से जुड़े लोग मानते हैं कि यह हिस्सेदारी अब तक की सबसे ऊँची है, और इससे पता चलता है कि नियमित निवेश धीरे धीरे बाज़ार का एक मज़बूत और भरोसेमंद आधार बनता जा रहा है।

छोटे निवेशकों की भूमिका

रिपोर्टों के अनुसार इस पूरी बढ़त के पीछे मुख्य भूमिका आम और छोटे निवेशकों की है, जो हर महीने थोड़ी थोड़ी रकम लगाकर लंबी अवधि में बड़ी पूँजी बनाने की कोशिश करते रहते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरीके से बाज़ार के जोखिम समय के साथ आपस में बँट जाते हैं, और यही वजह है कि यह तरीका मध्यम वर्ग के परिवारों में तेज़ी से लोकप्रिय होता जा रहा है।

आगे की राह

उद्योग से जुड़े लोग मानते हैं कि यदि यही रुझान आगे भी बना रहा तो आने वाले महीनों में एसआईपी योगदान और खातों की संख्या दोनों में और अधिक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

इन्हीं आँकड़ों के अनुसार यह प्रवृत्ति दिखाती है कि भारत में लोग बचत के साथ साथ सोच समझकर निवेश की ओर बढ़ रहे हैं, जो लंबी अवधि में देश की वित्तीय आदतों को नया रूप दे सकता है।

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इशा मल्होत्रा 2026-09-22 · 2 min read · 22 reads
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