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रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँचा सोना, धनतेरस से पहले बदल रही है खरीदारों की सोच

इशा मल्होत्रा इशा मल्होत्रा ishamalhotra.avalw.com · 1.3k reads Respect0 Save Share Read only
READS27live count PUBLISHED28 Sept2026 READING TIME4 min791 words LANGUAGEHindi
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इस साल सोने की कीमतों ने नए शिखर छुए हैं और त्योहारों के मौसम से ठीक पहले खरीदारों का रुझान गहनों से हटकर निवेश की ओर मुड़ता दिख रहा है। जानिए पूरी तस्वीर।

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भारत में सोना केवल एक धातु नहीं, बल्कि परंपरा, भरोसे और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इस साल इस चमकते पीले धातु ने कीमतों के मामले में जो रिकॉर्ड बनाए हैं, उसने आम खरीदार से लेकर बड़े निवेशक तक हर किसी को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है, खासकर जब त्योहारों का सबसे बड़ा मौसम दस्तक देने वाला है।

रिकॉर्ड ऊँचाई पर सोना

इस वर्ष सोने की कीमतों ने वह मुकाम छू लिया है जिसकी कल्पना कुछ समय पहले तक मुश्किल थी। चौबीस कैरेट सोने का भाव दस ग्राम के लिए डेढ़ लाख रुपये के आँकड़े को पार करते हुए लगभग एक लाख सत्तावन हज़ार रुपये तक पहुँच गया है, जो पिछले साल इसी त्योहारी दौर की तुलना में करीब सत्ताईस प्रतिशत अधिक है।

हालाँकि इस बढ़त का रास्ता बिल्कुल सीधा नहीं रहा है, बल्कि इसमें काफी उतार चढ़ाव देखने को मिला है। साल के बीच में एक महीने भाव में दो अंकों की तेज़ गिरावट आई, तो उसके तुरंत बाद वाले महीने में ज़बरदस्त उछाल भी देखने को मिला, जिससे साफ है कि यह तेज़ी एकतरफा नहीं बल्कि झटकों भरी रही है।

धनतेरस और त्योहारों का मौसम

पारंपरिक सोने के आभूषण भारतीय परिवारों की भावनाओं और परंपराओं से गहराई से जुड़े हैं, यही वजह है कि त्योहारों के मौसम में इनकी माँग हर साल उभरकर सामने आती है।
पारंपरिक सोने के आभूषण भारतीय परिवारों की भावनाओं और परंपराओं से गहराई से जुड़े हैं, यही वजह है कि त्योहारों के मौसम में इनकी माँग हर साल उभरकर सामने आती है।

भारत में अक्टूबर से दिसंबर तक की तिमाही परंपरागत रूप से सोने की खरीदारी के लिहाज़ से सबसे मज़बूत मानी जाती है। इसी दौर में आने वाला धनतेरस, जो इस बार नवंबर की छह तारीख शुक्रवार को पड़ रहा है, दिवाली के पाँच दिवसीय उत्सव की शुरुआत करता है और सोना या चाँदी खरीदने के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है।

यही एक दिन देश भर में साल की सबसे बड़ी बिक्री में से एक को जन्म देता है, जब घर घर में लोग अपनी हैसियत के अनुसार कुछ न कुछ सोना घर लाने की परंपरा निभाते हैं। यही भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव सोने की माँग को हर हाल में बनाए रखता है, फिर चाहे कीमतें कितनी भी ऊँची क्यों न हो जाएँ।

ऊँची कीमतों का बदलता असर

लेकिन इस बार रिकॉर्ड कीमतों ने खरीदारी के अंदाज़ पर साफ असर डाला है। कई परिवार जो पहले बड़े और भारी गहने खरीदने की योजना बनाते थे, अब या तो हल्के आभूषणों की ओर मुड़ रहे हैं या फिर अपनी खरीदारी को थोड़ा टालकर सोच समझकर फैसला ले रहे हैं, ताकि उनका बजट बिगड़ने न पाए।

जौहरियों का भी कहना है कि इस साल गहनों की माँग में कुछ नरमी आई है, क्योंकि आसमान छूती कीमतें आम ग्राहक की जेब पर भारी पड़ रही हैं। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि लोग अब सोने को केवल पहनने की चीज़ के तौर पर नहीं, बल्कि एक सोच समझकर किए जाने वाले खर्च के रूप में देखने लगे हैं।

गहनों से हटकर निवेश की ओर

इसी बीच एक दिलचस्प रुझान उभरकर सामने आया है, और वह है गहनों की जगह निवेश के तौर पर सोना खरीदने की बढ़ती चाहत। बीते समय में सिक्कों और छोटी छड़ों के रूप में सोने की खरीदारी का हिस्सा कुल घरेलू माँग में इतना बढ़ गया है कि यह कई वर्षों के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गया है।

इसकी वजह समझना मुश्किल नहीं है, क्योंकि जब कीमतें लगातार ऊपर जा रही हों तो कई लोग सोने को एक सुरक्षित बचत और मुश्किल वक्त के सहारे के रूप में देखते हैं। गहनों में बनवाई का अतिरिक्त खर्च नहीं होने के कारण सिक्के और छड़ें उन खरीदारों को अधिक भा रही हैं जिनका मकसद पहनना नहीं, बल्कि भविष्य के लिए बचत करना है।

रुपये की कमज़ोरी की भूमिका

घरेलू बाज़ार में सोने की कीमत केवल अंतरराष्ट्रीय भाव पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि इसमें रुपये की चाल की भी बड़ी भूमिका होती है। इस साल रुपया डॉलर के मुकाबले कमज़ोर होकर पचानवे के स्तर के पार चला गया है, और यही कमज़ोरी अंतरराष्ट्रीय कीमतों की बढ़त के असर को भारतीय खरीदारों के लिए और अधिक बढ़ा देती है।

यानी जब दुनिया भर में सोना महँगा होता है और साथ ही रुपया भी कमज़ोर पड़ता है, तो दोनों का असर मिलकर घरेलू कीमतों को दोहरी रफ्तार से ऊपर ले जाता है। यही कारण है कि इस बार भारत में सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बढ़त से भी तेज़ गति से चढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं, जिसने खरीदारों की चिंता बढ़ाई है।

समझदारी से खरीदारी की राह

ऐसे माहौल में सबसे ज़रूरी है कि खरीदारी भावनाओं के बहाव में नहीं, बल्कि सोच समझकर की जाए। विशेषज्ञ अक्सर सलाह देते हैं कि सोने को कुल बचत का एक हिस्सा भर रखा जाए और पूरी पूँजी किसी एक ही चीज़ में न झोंकी जाए, ताकि किसी भी उतार चढ़ाव का असर सीमित रहे और मन की शांति बनी रहे।

आखिरकार सोना सदियों से भारतीय परिवारों के लिए भरोसे का सहारा रहा है और आगे भी रहेगा, बशर्ते इसे समझदारी और संयम के साथ खरीदा जाए। इस त्योहारी मौसम में चाहे आप परंपरा निभाने के लिए खरीदें या भविष्य की बचत के लिए, अपने बजट और लक्ष्य को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला ही सबसे टिकाऊ साबित होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस साल धनतेरस कब पड़ रहा है और इस दिन सोने की खरीदारी का क्या महत्व है?

इस बार धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को पड़ रहा है, जो दिवाली के पाँच दिवसीय उत्सव की शुरुआत करता है। यह दिन सोना या चाँदी खरीदने के लिए सबसे शुभ माना जाता है और इस दिन देश भर में साल की सबसे बड़ी बिक्री में से एक होती है।

24 कैरेट सोने की कीमत इस त्योहारी मौसम में कितनी पहुँच गई है?

24 कैरेट सोने का भाव 10 ग्राम के लिए लगभग 1,76,000 रुपये तक पहुँच गया है, जिसने 1,50,000 रुपये के आँकड़े को पार कर लिया है। यह मूल्य पिछले साल की तुलना में करीब 29 प्रतिशत अधिक है।

ऊँची सोने की कीमतों ने आम खरीदारों के व्यवहार पर कैसे असर डाला है?

रिकॉर्ड कीमतों के कारण कई परिवार अब भारी गहनों की बजाय हल्के आभूषणों की ओर मुड़ रहे हैं या अपनी खरीदारी को टाल रहे हैं। जौहरियों का कहना है कि आसमान छूती कीमतों से आम ग्राहकों की जेब पर भारी पड़ रहा है, जिससे माँग में नरमी आई है।

गहनों की बजाय सोने के सिक्कों और छड़ों की खरीदारी में बढ़ोतरी क्यों हो रही है?

जब कीमतें लगातार ऊपर जा रही हों तो लोग सोने को सुरक्षित बचत के रूप में देखते हैं, जिससे निवेश के लिए खरीदारी बढ़ती है। गहनों में बनवाई का अतिरिक्त खर्च नहीं होने के कारण सिक्के और छड़ें उन खरीदारों को अधिक भा रही हैं जिनका मकसद बचत करना है।

भारत में सोने की कीमतों की तेज़ी के पीछे रुपये की कमज़ोरी की क्या भूमिका है?

इस साल रुपया डॉलर के मुकाबले कमज़ोर होकर 89 के स्तर के पार चला गया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय कीमतों की बढ़त के असर को और बढ़ा दिया है। जब दुनिया भर में सोना महँगा होता है और साथ ही रुपया कमज़ोर पड़ता है, तो दोनों का असर मिलकर घरेलू कीमतों को दोहरी रफ्तार से ऊपर ले जाता है।

विशेषज्ञों ने इस त्योहारी मौसम में सोने की खरीदारी के लिए क्या सलाह दी है?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोने को कुल बचत का एक हिस्सा भर रखा जाए और पूरी पूँजी किसी एक ही चीज़ में न झोंकी जाए। इससे किसी भी उतार चढ़ाव का असर सीमित रहेगा और खरीदार अपने बजट और लक्ष्य को ध्यान में रखकर टिकाऊ फैसला ले पाएंगे।

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इशा मल्होत्रा 2026-09-28 · 4 min read · 27 reads
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