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जीनोम से जैव-अर्थव्यवस्था तक: बेंगलुरु में जुटी देश की सबसे बड़ी जीनोमिक्स कॉन्फ्रेंस

सान्या सिंह सान्या सिंह sanyasingh.avalw.com · 103 reads Respect0 Save Share Read only
READS641live count PUBLISHED10 Sept2026 READING TIME4 min741 words LANGUAGEHindi
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बेंगलुरु में भारत का सबसे बड़ा जीनोमिक्स सम्मेलन, जेनॉमिक्स इंडिया कॉन्फ्रेंस, अपने छठे संस्करण के साथ आयोजित हुआ। इस बार की थीम रही जीनोम से जैव-अर्थव्यवस्था तक, जिसमें स्वास्थ्य, कृषि और नई सीक्वेंसिंग तकनीकों पर देश-दुनिया के वैज्ञानिकों ने मंथन किया।

देश की वैज्ञानिक राजधानी कहे जाने वाले बेंगलुरु में इन दिनों जीव विज्ञान की दुनिया की हलचल देखने लायक रही। यहाँ भारत का सबसे बड़ा जीनोमिक्स सम्मेलन, जेनॉमिक्स इंडिया कॉन्फ्रेंस, अपने छठे संस्करण के साथ आयोजित हुआ, जिसमें देश और दुनिया भर के वैज्ञानिक जीन और जीनोम से जुड़ी नई खोजों पर मंथन करने के लिए एक साथ जुटे।

जीनोमिक्स असल में जीव विज्ञान की वह शाखा है जो किसी भी जीव के सम्पूर्ण आनुवंशिक खाके, यानी उसके जीनोम, का अध्ययन करती है। हमारे शरीर की बनावट से लेकर बीमारियों की जड़ तक, और फसलों की पैदावार से लेकर सूक्ष्मजीवों की दुनिया तक, इस विज्ञान की पहुँच लगातार बढ़ती जा रही है और यही इसे आज इतना अहम बनाता है।

कब, कहाँ और किसने आयोजित किया

आयोजकों के अनुसार यह सम्मेलन दो और तीन सितंबर को आयोजित किया गया, जबकि इससे एक दिन पहले पहली सितंबर को विशेष कार्यशालाएँ भी रखी गईं। इसका आयोजन स्थल बेंगलुरु के जीकेवीके परिसर स्थित डॉ. बाबू राजेंद्र प्रसाद अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र रहा, जो देश के प्रमुख कृषि और विज्ञान संस्थानों का केंद्र माना जाता है।

इस बड़े आयोजन के पीछे कई नामी संस्थानों की साझेदारी रही। जेनोटाइपिक टेक्नोलॉजी की अगुवाई में इसे बेंगलुरु के कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, भारतीय विज्ञान संस्थान, नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज और टाटा इंस्टिट्यूट फॉर जेनेटिक्स एंड सोसाइटी जैसे संस्थानों ने मिलकर तैयार किया, जिससे इसकी विश्वसनीयता और गहराई दोनों बढ़ीं।

इस बार की थीम

इस वर्ष सम्मेलन की मूल विषयवस्तु रखी गई थी जीनोम से जैव-अर्थव्यवस्था तक, यानी नवाचार, प्रभाव और आर्थिक बदलाव। इसका सीधा मतलब यह है कि अब जीनोम से जुड़ा विज्ञान केवल प्रयोगशाला की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह तेज़ी से असल ज़िंदगी और आर्थिक गतिविधियों का हिस्सा बनता जा रहा है।

आयोजकों ने चर्चा को मुख्य रूप से चार क्षेत्रों के इर्द-गिर्द बुना। इनमें कृषि जीनोमिक्स, जीनोमिक्स में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल, स्वास्थ्य से जुड़ी तकनीक, और जीनोम जीव विज्ञान शामिल रहे। इन्हीं विषयों के आसपास कई सत्र, परिचर्चाएँ और उद्योग जगत के अगुवाओं के साथ खुली बातचीत आयोजित की गई।

प्रयोगशाला से खेत और अस्पताल तक

एक शोधकर्ता प्रयोगशाला में सूक्ष्मदर्शी की मदद से नमूनों का अध्ययन करती हुई। जीनोमिक्स का असली सफ़र ऐसी ही प्रयोगशालाओं से शुरू होता है।
एक शोधकर्ता प्रयोगशाला में सूक्ष्मदर्शी की मदद से नमूनों का अध्ययन करती हुई। जीनोमिक्स का असली सफ़र ऐसी ही प्रयोगशालाओं से शुरू होता है।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में जीनोमिक्स की भूमिका सबसे अधिक चर्चा में रही। किसी व्यक्ति के आनुवंशिक कोड को समझकर बीमारियों की पहचान पहले से करना, इलाज को हर मरीज़ के अनुसार ढालना और दुर्लभ रोगों की जड़ तक पहुँचना, ये सब अब पहले से कहीं अधिक सम्भव होता जा रहा है, और सम्मेलन में इसी दिशा पर ज़ोर दिया गया।

वहीं दूसरी ओर कृषि जीनोमिक्स भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए बेहद मायने रखता है। बेहतर पैदावार देने वाली, तथा सूखे और बीमारियों को सहन करने वाली फसलों की किस्में विकसित करने में यह विज्ञान बड़ी भूमिका निभा सकता है। सम्मेलन में विशेषज्ञों ने बताया कि किस तरह जीन की समझ खेती को अधिक टिकाऊ बना सकती है।

नई पीढ़ी की सीक्वेंसिंग तकनीक

सम्मेलन का एक बड़ा आकर्षण नई पीढ़ी की सीक्वेंसिंग यानी जीन के क्रम को पढ़ने वाली आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन रहा। आयोजकों के मुताबिक़ बीस से अधिक प्रदर्शक कंपनियों ने अपने उपकरण और तकनीकें सामने रखीं, जबकि बीस से ज़्यादा वक्ताओं और दस से अधिक सत्रों के ज़रिये मौजूदा शोध और भविष्य की सम्भावनाओं पर विस्तार से बात हुई।

पहले जहाँ किसी एक जीनोम को पूरी तरह पढ़ना बरसों का काम और बेहद खर्चीला हुआ करता था, वहीं आज यही काम बहुत कम समय और कम लागत में सम्भव हो गया है। इसी बदलाव ने जीनोमिक्स को चंद बड़ी प्रयोगशालाओं के दायरे से निकालकर कहीं अधिक व्यापक स्तर पर पहुँचा दिया है, और सम्मेलन में इसी रफ़्तार को रेखांकित किया गया।

भारत के लिए इसके मायने

विशेषज्ञों का मानना है कि जीनोमिक्स आने वाले वर्षों में भारत की जैव-अर्थव्यवस्था का एक मज़बूत आधार बन सकता है। स्वास्थ्य सेवा, कृषि, औद्योगिक जैव प्रौद्योगिकी और सार्वजनिक स्वास्थ्य, इन सभी क्षेत्रों में इसके इस्तेमाल से न सिर्फ़ नई खोजें होंगी, बल्कि रोज़गार और आर्थिक अवसरों के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।

हालाँकि इस राह में चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं। आनुवंशिक आँकड़ों की सुरक्षा, उनकी निजता और इस तकनीक तक सबकी समान पहुँच जैसे सवाल भी उतने ही अहम हैं। यही वजह है कि सम्मेलन में विज्ञान और आँकड़ों के साथ-साथ इन व्यावहारिक तथा नैतिक पहलुओं पर भी विचार-विमर्श को जगह दी गई।

आगे की राह

बीते कुछ वर्षों में भारत ने विज्ञान और शोध के क्षेत्र में जिस तरह अपनी पहचान मज़बूत की है, जीनोमिक्स उसी सफ़र की एक नई कड़ी है। बेंगलुरु में जुटे वैज्ञानिकों का यह जमावड़ा इस बात का संकेत है कि जीन की भाषा को समझने की यह कोशिश आने वाले समय में देश की सेहत, खेती और अर्थव्यवस्था तीनों को नई दिशा दे सकती है।

2 responses

यहाँ जीनोमिक्स के बारे में काफी कुछ सीखा.

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जीनोमिक्स के बारे में बहुत उपयोगी लेख.

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सान्या सिंह 2026-09-10 · 4 min read · 641 reads
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