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SCIENCE · INDIA

भविष्य की गणना की ओर भारत का क्वांटम मिशन और नए कंप्यूटरों की अनोखी दुनिया

सान्या सिंह सान्या सिंह sanyasingh.avalw.com · 103 reads Respect0 Save Share Read only
READS11live count PUBLISHED13 Sept2026 READING TIME5 min973 words LANGUAGEHindi
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साल 2023 में शुरू हुए राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत भारत 6,003 करोड़ रुपये से क्वांटम तकनीक में बड़ी छलांग की तैयारी कर रहा है। चार बड़े शोध केंद्र, देश का पहला फुल स्टैक क्वांटम कंप्यूटर और अमरावती क्वांटम वैली जैसे कदमों के साथ, यह नई दुनिया की एक झलक है।

अंतरिक्ष और विज्ञान की नई खोजें मुझे हमेशा बच्चों जैसी उत्सुकता से भर देती हैं, और इन दिनों एक ऐसी ही दुनिया मेरा ध्यान बार बार खींच रही है। यह दुनिया न तो दूर के किसी तारे की है और न ही किसी ग्रह की, बल्कि हमारे अपने कणों की सबसे छोटी और सबसे रहस्यमयी परत की है। इसे क्वांटम की दुनिया कहते हैं, और भारत अब इसी अनदेखी दुनिया में एक बड़ी और साहसिक छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है।

क्वांटम आखिर है क्या

क्वांटम शब्द सुनने में भले ही जटिल लगे, लेकिन इसका ताल्लुक हमारी दुनिया की सबसे बुनियादी ईंटों से है। परमाणु और उससे भी छोटे कणों के स्तर पर प्रकृति के नियम रोज़मर्रा के अनुभव से बिल्कुल अलग हो जाते हैं। वहाँ एक कण एक ही समय पर कई अवस्थाओं में हो सकता है, और यही अजीब व्यवहार आधुनिक विज्ञान की एक नई क्रांति की नींव बन रहा है। इसी बुनियाद पर क्वांटम तकनीक की पूरी इमारत खड़ी की जा रही है।

बिट से क्यूबिट तक का सफर

आज के सामान्य कंप्यूटर हर जानकारी को बिट नाम की छोटी इकाई में सहेजते हैं, जो या तो शून्य होती है या फिर एक। लेकिन क्वांटम कंप्यूटर में इसकी जगह क्यूबिट का इस्तेमाल होता है, जो एक साथ शून्य और एक, दोनों अवस्थाओं में रह सकता है। इसी खूबी के कारण क्वांटम कंप्यूटर एक ही समय में असंख्य संभावनाओं पर काम कर सकते हैं। यही वजह है कि ये कुछ खास और बेहद पेचीदा सवालों को हैरान कर देने वाली रफ्तार से हल कर सकते हैं।

भारत का राष्ट्रीय क्वांटम मिशन

इस नई तकनीक में पीछे न रह जाने के इरादे से भारत सरकार ने अप्रैल 2023 में राष्ट्रीय क्वांटम मिशन की शुरुआत की थी। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए साल 2023-24 से लेकर 2030-31 तक की अवधि हेतु कुल 6,003 करोड़ रुपये से अधिक का बजट मंज़ूर किया गया है। इसका बड़ा मकसद भारत को क्वांटम विज्ञान और उसके व्यावहारिक इस्तेमाल के क्षेत्र में दुनिया का एक प्रमुख केंद्र बनाना है, ताकि देश इस दौड़ में अग्रणी भूमिका निभा सके।

चार बड़े शोध केंद्र

देश भर की प्रयोगशालाओं में वैज्ञानिक क्वांटम तकनीक के नए राज़ खोलने में जुटे हैं। ऐसे ही शोध केंद्र इस मिशन की असली धुरी हैं।
देश भर की प्रयोगशालाओं में वैज्ञानिक क्वांटम तकनीक के नए राज़ खोलने में जुटे हैं। ऐसे ही शोध केंद्र इस मिशन की असली धुरी हैं।

इस मिशन को ज़मीन पर उतारने के लिए देश में चार बड़े विषयगत शोध केंद्र बनाए गए हैं, जिन्हें टी हब कहा जाता है। बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान क्वांटम कंप्यूटिंग पर काम कर रहा है, जबकि आईआईटी मद्रास क्वांटम संचार की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी तरह आईआईटी बॉम्बे क्वांटम सेंसिंग और मापन को सँभाल रहा है, और आईआईटी दिल्ली क्वांटम पदार्थों तथा उपकरणों पर अपनी शोध की धार तेज़ कर रहा है।

कितने क्यूबिट का लक्ष्य

मिशन ने अपने लिए साफ और चरणबद्ध लक्ष्य भी तय किए हैं, ताकि प्रगति को नापा जा सके। योजना के अनुसार शुरुआती तीन वर्षों में 20 से 50 भौतिक क्यूबिट वाले कंप्यूटर तैयार करने की बात कही गई है। इसके बाद अगले पाँच वर्षों में यह क्षमता 50 से 100 क्यूबिट तक पहुँचाने का इरादा है। और आठ वर्षों की लंबी अवधि में 50 से लेकर 1000 क्यूबिट तक के शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर बनाने का बड़ा सपना इस मिशन के केंद्र में रखा गया है।

देश का पहला फुल स्टैक कंप्यूटर

इस दिशा में एक अहम पड़ाव बीते साल अप्रैल 2025 में आया, जब एक भारतीय स्टार्टअप ने 25 क्यूबिट वाला एक क्वांटम कंप्यूटर पेश किया। इंडस नाम के इस कंप्यूटर को देश का पहला फुल स्टैक क्वांटम कंप्यूटिंग सिस्टम बताया गया, और यह राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत चुना गया था। इसके आगे 64 क्यूबिट वाले एक और प्रोसेसर की भी घोषणा की गई है, जिसे कावेरी नाम दिया गया है और जिसे साल 2026 में उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

रक्षा और अंतरिक्ष में क्वांटम

क्वांटम तकनीक की पहुँच सिर्फ प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह रक्षा और अंतरिक्ष जैसे अहम क्षेत्रों तक फैल रही है। रक्षा अनुसंधान संगठन और मुंबई के टीआईएफआर ने मिलकर 6 क्यूबिट वाले एक क्वांटम प्रोसेसर का प्रदर्शन किया है। वहीं अंतरिक्ष विभाग ने खुली हवा में करीब 300 मीटर की दूरी तक क्वांटम कुंजी के आदान प्रदान का सफल परीक्षण किया है, जो सुरक्षित संचार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

अमरावती की क्वांटम वैली

इस पूरे सफर में एक और चमकदार अध्याय हाल ही में जुड़ा है, जब 7 फरवरी 2026 को अमरावती क्वांटम वैली की शुरुआत हुई। यहाँ आईबीएम क्वांटम सिस्टम टू नाम की एक उन्नत मशीन लगाई गई है, जिसे इस श्रेणी में भारत की सबसे बड़ी प्रणाली बताया जा रहा है। इस बड़े प्रयास में टीसीएस और एल एंड टी जैसी कंपनियाँ भी साझेदार हैं, जो दिखाता है कि क्वांटम अब सरकार और उद्योग दोनों की साझा प्राथमिकता बन चुका है।

क्वांटम क्यों इतना ज़रूरी है

यह सवाल स्वाभाविक है कि आखिर इतनी मेहनत और पैसा इस तकनीक पर क्यों लगाया जा रहा है। दरअसल क्वांटम कंप्यूटर उन समस्याओं को हल करने की क्षमता रखते हैं, जो आज के सबसे तेज़ कंप्यूटरों के बस से भी बाहर हैं। नई दवाओं की खोज, बेहतर पदार्थों का निर्माण और बेहद जटिल गणनाओं में ये तकनीक क्रांति ला सकती है। यही नहीं, सुरक्षित संचार और सूचना की सुरक्षा के क्षेत्र में भी इसकी भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।

चुनौतियाँ भी कम नहीं

हालाँकि इस चमकते सपने की राह में कई कठिन चुनौतियाँ भी खड़ी हैं, जिन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता। क्यूबिट बेहद नाज़ुक होते हैं और ज़रा सी गड़बड़ी से अपनी जानकारी खो सकते हैं, इसलिए इन्हें अक्सर बहुत ठंडे और नियंत्रित माहौल में रखना पड़ता है। इनकी गलतियों को सुधारना और कुशल वैज्ञानिकों की एक बड़ी टीम तैयार करना भी आसान काम नहीं है। यह एक लंबा और धैर्य माँगने वाला सफर है, जिसमें जल्दबाज़ी की कोई गुंजाइश नहीं है।

बच्चों जैसी उत्सुकता के साथ

मुझे यह देखकर सचमुच रोमांच होता है कि भारत अब दुनिया की इस सबसे नई और रहस्यमयी वैज्ञानिक दौड़ में पूरे आत्मविश्वास के साथ शामिल हो रहा है। क्वांटम की दुनिया अब भी हम सबके लिए किसी अनसुलझी पहेली की तरह है, जिसका हर नया अध्याय मन में सवालों की झड़ी लगा देता है। एक विज्ञान प्रेमी के तौर पर मैं इस सफर को उसी बच्चों जैसी उत्सुकता के साथ देखती रहूँगी, और इसकी हर नई खोज को आप तक लाती रहूँगी।

3 responses

यहाँ विज्ञान के बारे में काफी कुछ सीखा.

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विज्ञान के बारे में अच्छा संदर्भ.

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एकदम सही.

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सान्या सिंह 2026-09-13 · 5 min read · 11 reads
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