दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे के नीचे बना एशिया का सबसे लंबा वन्यजीव अंडरपास खुलने के कुछ ही हफ्तों में हजारों जानवरों को सड़क पार करने का सुरक्षित रास्ता दे रहा है, ऐसा बताया गया है।
उत्तर भारत में एक नई सड़क परियोजना वन्यजीवों के लिए राहत का जरिया बनती दिख रही है, जहां घने जंगल के ऊपर से गुजरते एक्सप्रेसवे के नीचे बनाया गया एशिया का सबसे लंबा वन्यजीव अंडरपास जानवरों को बिना किसी खतरे के एक ओर से दूसरी ओर जाने का रास्ता दे रहा है, ऐसा रिपोर्टों में बताया गया है।
जंगल के ऊपर से गुजरता एक्सप्रेसवे

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली और देहरादून को जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे चौदह अप्रैल 2026 को खोला गया, और इसका आखिरी करीब बीस किलोमीटर का हिस्सा राजाजी बाघ अभयारण्य और उससे लगे घने जंगलों के बीच से होकर गुजरता है।
बताया गया है कि इस संवेदनशील इलाके में सड़क को जमीन पर बनाने के बजाय ऊंचे खंभों पर उठाकर बनाया गया है, ताकि नीचे की जमीन खुली रहे और जंगल के जानवर पहले की तरह बिना किसी रुकावट के आराम से आ जा सकें।
चालीस दिन में हजारों जानवर
रिपोर्टों के मुताबिक, अंडरपास खुलने के महज चालीस दिनों के भीतर ही कैमरों में जानवरों के करीब चालीस हजार से भी ज्यादा बार आर पार जाने के मामले दर्ज किए गए, जो इस रास्ते की कामयाबी का एक बड़ा सबूत माना जा रहा है।
बताया गया है कि यह गिनती इतनी तेजी से बढ़ी कि विशेषज्ञ भी हैरान रह गए, क्योंकि आमतौर पर नए बने ढांचों के पास जानवरों को आने में लंबा समय लग जाता है, लेकिन यहां तो शुरुआत से ही खूब आवाजाही देखी गई।
हाथियों के लिए खास राह
विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि इन चालीस दिनों में हाथियों के करीब साठ बार अंडरपास से गुजरने के मामले दर्ज हुए, जो इस बात का साफ संकेत है कि बड़े और भारी जानवर भी इस नए रास्ते को धीरे धीरे अपना रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, कैमरों में अब तक हाथी और तेंदुए समेत करीब अठारह अलग अलग तरह के वन्यजीव इस रास्ते का इस्तेमाल करते हुए देखे गए हैं, जिनमें हिरण और दूसरे शाकाहारी जानवर भी शामिल बताए जाते हैं।
शोर और रोशनी से बचाव
बताया गया है कि जानवरों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए ऊंची सड़क के दोनों किनारों पर खास दीवारें और परदे लगाए गए हैं, जो गाड़ियों के शोर और तेज रोशनी को नीचे जंगल तक पहुंचने से रोकने का काम करते हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, पूरे रास्ते में कई छोटे बड़े अंडरपास और सुरंगें बनाई गई हैं, जिनमें एक करीब साढ़े तीन सौ मीटर लंबी सुरंग भी शामिल है, ताकि अलग अलग जगहों पर जानवरों को पार करने के कई विकल्प मिल सकें।
इंसान और जंगली जानवर का टकराव कम
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सुरक्षित रास्ते इंसानों और जंगली जानवरों के बीच होने वाले टकराव को काफी हद तक कम कर सकते हैं, क्योंकि अब जानवरों को सड़क पर आकर खतरा मोल लेने की जरूरत नहीं पड़ती।
रिपोर्ट के अनुसार, पहले जंगल के बीच से गुजरने वाली सड़कों पर जानवरों के कुचले जाने और वाहनों से टकराने की घटनाएं आम थीं, लेकिन इस नई व्यवस्था से ऐसी दुखद दुर्घटनाओं में बड़ी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
आगे की उम्मीदें
बताया गया है कि यह परियोजना अब उन लोगों के लिए एक मिसाल बन गई है जो विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाना चाहते हैं, क्योंकि इससे एक ओर यात्रा का समय घटा है और दूसरी ओर जंगल की आवाजाही भी बनी रही है।
रिपोर्टों के मुताबिक, जानकार मानते हैं कि आने वाले महीनों और सालों में इस रास्ते पर लगातार नजर रखने से यह समझने में मदद मिलेगी कि जानवर इसे किस तरह अपनाते हैं, और इससे ऐसी और परियोजनाओं की राह भी खुल सकती है।

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