हरे पंख और लाल चोंच वाला तोता भारत के हर गाँव, खेत और शहर की पहचान है। पर यही परिचित पंछी आज दुनिया का सबसे सफल प्रवासी तोता बन चुका है, जो यूरोप से लेकर अमेरिका तक के शहरों में बसेरा बना रहा है। यह है भारत के गुलाबी कंठी तोते की हैरान करने वाली कहानी।
हरे पंख, तीखी लाल चोंच और गले पर गुलाबी और काली रेखा वाला तोता भारत के लगभग हर गाँव, खेत, बाग और शहर की एक जानी-पहचानी तस्वीर है। बचपन की कहानियों से लेकर मंदिरों के आँगन तक, यह पंछी हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इस कदर घुला-मिला है कि हम अक्सर इसकी असली कामयाबी की कहानी की ओर ध्यान ही नहीं देते।
भारत का सबसे जाना-पहचाना तोता
गुलाबी कंठी तोता, जिसे अंग्रेज़ी में रोज़-रिंग्ड पैराकीट कहते हैं, भारतीय उपमहाद्वीप का मूल निवासी है। इसका चमकीला हरा रंग पत्तों के बीच इसे छिपा देता है, जबकि लाल चोंच दूर से ही पहचानी जाती है। नर के गले में एक सुंदर गुलाबी और काली छल्लेनुमा रेखा होती है, जिससे इसे यह नाम मिला है।
यह तोता भारत की हर तरह की जगह में बड़ी आसानी से रहता है। घने जंगलों से लेकर खुले खेतों तक और भीड़भरे शहरों के पेड़ों तक, यह हर माहौल में ढल जाता है। शाम के समय सैकड़ों तोतों के झुंड शोर मचाते हुए अपने बसेरे की ओर लौटते हैं, और यह नज़ारा देश के अनगिनत कस्बों की एक आम पहचान बन चुका है।
बुद्धिमान और बातूनी
गुलाबी कंठी तोता अपनी तेज़ बुद्धि और आवाज़ों की नकल उतारने की क्षमता के लिए मशहूर है। यही वजह है कि सदियों से लोग इसे पालतू बनाकर रखते आए हैं और इसे इंसानी शब्द बोलना तक सिखाते रहे हैं। इसकी सीखने की यह अद्भुत क्षमता इसे पक्षी जगत के सबसे चतुर सदस्यों में शामिल करती है।
यह पंछी पेड़ों के खोखलों में अपना घोंसला बनाता है और झुंड में रहना पसंद करता है। इसकी तेज़ और कर्कश आवाज़ दूर तक सुनाई देती है, खासकर जब पूरा झुंड एक साथ उड़ान भरता है। मज़बूत चोंच की मदद से यह कठोर बीजों और फलों को भी आसानी से तोड़कर खा लेता है, जो इसकी सफलता का एक बड़ा कारण है।
खेतों का दोस्त या दुश्मन?
इस तोते का किसानों के साथ रिश्ता थोड़ा उलझा हुआ है। भारत में इसे अक्सर एक बड़े खेती-नाशक के रूप में देखा जाता है, क्योंकि इसके बड़े झुंड धान, मक्का, ज्वार-बाजरा, फलों के बागों और यहाँ तक कि कॉफ़ी की फसलों को भी काफ़ी नुकसान पहुँचा सकते हैं। पकी फसल पर उतरा झुंड कुछ ही देर में बहुत कुछ चट कर जाता है।
फिर भी इस पंछी की भूमिका को सिर्फ़ नुकसान तक सीमित करना ठीक नहीं होगा। फल और बीज खाते हुए यह प्रकृति में बीजों को फैलाने में मदद करता है और भोजन-शृंखला का एक अहम हिस्सा है। असल चुनौती इंसान और इस चतुर पंछी के बीच एक ऐसा संतुलन बनाने की है, जिसमें खेती भी बचे और यह परिचित मेहमान भी।
भारत के दूसरे रंगीन पंछी

गुलाबी कंठी तोता भारत की रंग-बिरंगी पक्षी-दुनिया का सिर्फ़ एक चमकीला चेहरा है। हमारे देश के तालाब, नदियाँ और बाग अनगिनत सुंदर पंछियों से भरे हैं, जिनमें नीले-नारंगी रंग का नन्हा किलकिला भी शामिल है, जो पानी के किनारे बैठकर मछली पर झपट्टा मारता है। ये सब मिलकर भारत को दुनिया के सबसे समृद्ध पक्षी-देशों में से एक बनाते हैं।
दुनिया के शहरों का विजेता
अब इस कहानी का सबसे हैरान करने वाला मोड़ आता है। भारत का यह परिचित तोता आज दुनिया का सबसे सफल प्रवासी तोता माना जाता है। इंसानों की मदद से और अपनी दम पर यह अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया को छोड़कर लगभग हर महाद्वीप के देशों में जा पहुँचा है, जहाँ इसकी आज़ाद आबादियाँ पनप रही हैं।
यूरोप के कई ठंडे शहरों में अब हरे तोतों के झुंड आम हो चुके हैं, जो पार्कों और बगीचों में उड़ते दिखते हैं। सर्दियों में लोगों द्वारा लगाए गए दाना-घर इन्हें कड़ाके की ठंड में भी ज़िंदा रहने में मदद करते हैं। मध्य पूर्व से लेकर अमेरिका तक, यह भारतीय पंछी नई ज़मीनों पर अपना बसेरा बना रहा है।
सफलता का राज़
आख़िर इस तोते की इतनी बड़ी कामयाबी का राज़ क्या है? इसका जवाब इसकी अद्भुत अनुकूलनशीलता में छिपा है। यह लगभग हर तरह का भोजन खा लेता है, पेड़ों के खोखलों में घोंसला बना लेता है, और जंगल से लेकर शहर तक हर माहौल में ख़ुद को ढाल लेता है। यही लचीलापन इसे नई और अनजान जगहों में भी टिकाए रखता है।
एक परिचित पंछी की बड़ी कहानी
गुलाबी कंठी तोते की कहानी हमें याद दिलाती है कि जिन्हें हम सबसे आम और मामूली समझते हैं, वही अक्सर सबसे असाधारण होते हैं। भारत की गलियों का यह साधारण-सा पंछी दरअसल एक वैश्विक विजेता है, जिसकी हरी झलक अब लंदन और एम्स्टर्डम जैसे दूर के शहरों के आसमान में भी दिखाई देती है।
इसलिए अगली बार जब आप किसी पेड़ पर बैठे हरे तोते को या शाम के आसमान में उड़ते उसके झुंड को देखें, तो पल भर रुककर ज़रूर सोचिएगा। आपके सामने सिर्फ़ एक आम पंछी नहीं, बल्कि भारत का एक ऐसा नन्हा राजदूत है, जिसने अपने पंखों के दम पर सचमुच पूरी दुनिया को नाप डाला है।

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