2026 के मोटोजीपी कैलेंडर में भारत की जगह नहीं है, जिससे ग्रेटर नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर लगातार तीसरे साल यह रेस नहीं होगी। एक नज़र भारत के मोटरस्पोर्ट इतिहास और इस अनुपस्थिति के मायनों पर।
भारत का यात्री वाहन बाज़ार इन दिनों रिकॉर्ड बिक्री और नई लॉन्च की खबरों से गुलज़ार है, लेकिन देश के मोटरस्पोर्ट प्रेमियों के लिए हाल ही में एक निराश करने वाली खबर आई है। दोपहिया वाहनों के इस विशाल देश में सबसे बड़ी बाइक रेसिंग प्रतियोगिता एक बार फिर आयोजित नहीं होगी।
रिपोर्ट्स के अनुसार वर्ष 2026 के मोटोजीपी सीज़न का अस्थायी कैलेंडर सामने आ गया है, और उसमें कहीं भी भारतीय ग्रांप्री यानी भारत जीपी का नाम शामिल नहीं है। यह खबर देश के उन तमाम प्रशंसकों के लिए झटका है, जो इस विश्वस्तरीय आयोजन की वापसी का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे।
लगातार तीसरे साल अनुपस्थिति
यह कोई एक बार की बात नहीं, बल्कि एक चिंताजनक सिलसिला बनता जा रहा है। जानकारी के अनुसार भारत अब लगातार तीसरे मोटोजीपी सीज़न से बाहर है, क्योंकि 2024 और 2025 के बाद अब 2026 में भी यह दौड़ बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर आयोजित नहीं की जाएगी।
इतने लंबे अंतराल ने स्वाभाविक रूप से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार इस लगातार अनुपस्थिति ने भारत में मोटोजीपी के दीर्घकालिक भविष्य को लेकर आशंकाएं पैदा कर दी हैं, और यह चर्चा तेज़ हो गई है कि क्या यह आयोजन वाकई यहां टिक पाएगा।
2023 की ऐतिहासिक शुरुआत

इस पूरी कहानी की शुरुआत बड़े उत्साह के साथ हुई थी और उम्मीदें आसमान पर थीं। जानकारी के अनुसार भारत ने अपना पहला मोटोजीपी आयोजन, यानी भारत जीपी, सितंबर 2023 में आयोजित किया था, और यह देश की धरती पर होने वाली अपनी तरह की पहली मोटोजीपी रेस थी।
उस ऐतिहासिक दौड़ ने खेल प्रेमियों को खूब रोमांचित किया था। जानकारी के अनुसार 2023 की उस भारत जीपी को इटली के मार्को बेज़ेची ने डुकाटी मोटरसाइकिल पर सवार होकर जीता था, और इस जीत ने बुद्ध सर्किट को विश्व मोटरस्पोर्ट के नक्शे पर एक नई पहचान दिलाई थी।
बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट की कहानी
जिस ट्रैक पर यह सब हुआ, उसका अपना एक समृद्ध इतिहास है जो काफी पहले शुरू होता है। जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में स्थित बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट को 18 अक्टूबर 2011 को खोला गया था, इसे मशहूर डिज़ाइनर हरमन टिल्के ने तैयार किया और इसकी दर्शक क्षमता लगभग एक लाख दस हज़ार है।
यह सर्किट सिर्फ बाइक रेसिंग तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसका नाता कार रेसिंग से भी रहा है। जानकारी के अनुसार करीब 5.125 किलोमीटर लंबे इस ट्रैक ने 2011, 2012 और 2013 में लगातार तीन बार फॉर्मूला वन का भारतीय ग्रांप्री भी आयोजित किया था, जो देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी।
आखिर क्यों रुकी रेस
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी संभावनाओं के बावजूद यह दौड़ क्यों रुक गई। रिपोर्ट्स के अनुसार रेस के रद्द होने की कोई आधिकारिक वजह अब तक साझा नहीं की गई है, जिससे प्रशंसकों के बीच तरह तरह की अटकलों और सवालों का बाज़ार गर्म बना हुआ है।
हालांकि उद्योग से जुड़े जानकार कुछ संभावित कारणों की ओर इशारा ज़रूर करते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार इनमें आयोजन संबंधी व्यावहारिक चुनौतियां, प्रमोटरों के साथ अस्थिर व्यवस्थाएं और बुनियादी ढांचे की तैयारी को लेकर चिंताएं प्रमुख रूप से गिनाई जाती हैं, जिन्हें इस अनुपस्थिति का कारण माना जा रहा है।
वापसी की उम्मीद अब भी बाकी
इन तमाम मुश्किलों के बीच उम्मीद की एक किरण भी बनी हुई है, और प्रयास पूरी तरह थमे नहीं हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार मोटोजीपी और इन्वेस्ट यूपी मिलकर इस आयोजन को एक विश्वस्तरीय रूप में बुद्ध सर्किट पर दोबारा लाने के लिए काम कर रहे हैं और भारत को वैश्विक खेल आयोजनों के केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।
कुल मिलाकर, भारत के पास दोपहिया वाहनों का विशाल बाज़ार और जोशीले प्रशंसक तो हैं, लेकिन एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय रेस को लगातार बनाए रखना अब भी एक चुनौती बना हुआ है। सर्किट तैयार खड़ा है, और अब सवाल सिर्फ यही है कि इंजनों की वह गर्जना यहां दोबारा कब लौटेगी।
मोटोजीपी को फॉलो करता हूँ और यह मददगार है.