avalw
TECH · IN

क्वांटम की छलांग: राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत भारत कैसे गढ़ रहा है भविष्य का कंप्यूटर

अर्जुन मेहता अर्जुन मेहता arjunmehta.avalw.com · 4.6k reads Respect0 Save Share Read only
READS649live count PUBLISHED27 Aug2026 READING TIME4 min859 words LANGUAGEHindi
AI CITATIONS? Gathering data

सेमीकंडक्टर और एआई की चर्चा के बीच भारत चुपचाप एक और तकनीकी सीमा पर दांव लगा रहा है: क्वांटम कंप्यूटिंग। 6,003 करोड़ रुपये के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, Indus और Kaveri जैसे स्वदेशी क्वांटम कंप्यूटरों और 2026 के मील के पत्थरों के जरिए भारत कैसे इस दौड़ में उतरा है, इसका विश्लेषण।

पिछले कुछ वर्षों में भारत की तकनीकी कहानी सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल भुगतान के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन इसी शोरगुल के बीच देश चुपचाप एक और, कहीं अधिक बुनियादी तकनीकी सीमा पर बड़ा दांव लगा रहा है: क्वांटम कंप्यूटिंग। यह वह तकनीक है जो आने वाले दशकों में गणना करने के हमारे तरीके को ही मौलिक रूप से बदल देने की क्षमता रखती है।

6,000 करोड़ का मिशन और उसके लक्ष्य

इस महत्वाकांक्षा का केंद्र है राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 19 अप्रैल 2023 को मंजूरी दी थी। इस मिशन के लिए वर्ष 2023-24 से 2030-31 तक कुल 6,003.65 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। इतनी बड़ी राशि यह दर्शाती है कि भारत क्वांटम तकनीक को केवल एक शोध विषय नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक प्राथमिकता के रूप में देख रहा है।

मिशन के लक्ष्य चरणबद्ध और स्पष्ट हैं। इसके तहत तीन वर्षों में 20 से 50 भौतिक क्यूबिट वाले क्वांटम कंप्यूटर, पाँच वर्षों में 50 से 100 क्यूबिट और आठ वर्षों में 50 से 1,000 क्यूबिट तक पहुँचने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही उपग्रह आधारित क्वांटम संचार को 2,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक ले जाना, अंतर-शहर क्वांटम कुंजी वितरण और उन्नत क्वांटम सेंसर विकसित करना भी इसमें शामिल है।

यहाँ यह समझना जरूरी है कि क्यूबिट, यानी क्वांटम बिट, साधारण कंप्यूटर के बिट से मौलिक रूप से भिन्न होता है। जहाँ पारंपरिक बिट केवल शून्य या एक हो सकता है, वहीं क्यूबिट एक साथ कई अवस्थाओं में रह सकता है। यही विशेषता क्वांटम कंप्यूटरों को कुछ खास किस्म की जटिल समस्याओं को पारंपरिक मशीनों की तुलना में असंख्य गुना तेजी से हल करने की संभावना प्रदान करती है।

स्टार्टअप की भूमिका: Indus से Kaveri तक

क्वांटम कंप्यूटर बेहद कम तापमान पर काम करते हैं, जिसके लिए विशेष क्रायोजेनिक बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है।
क्वांटम कंप्यूटर बेहद कम तापमान पर काम करते हैं, जिसके लिए विशेष क्रायोजेनिक बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है।

इस मिशन की सबसे उत्साहजनक बात यह है कि सरकारी संस्थानों के साथ-साथ स्वदेशी स्टार्टअप भी इसमें अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। अप्रैल 2025 में भारतीय स्टार्टअप QpiAI ने Indus नामक 25-क्यूबिट क्वांटम कंप्यूटर का अनावरण किया, जिसे देश का पहला फुल-स्टैक क्वांटम कंप्यूटिंग सिस्टम बताया गया और जिसे राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत चुना गया था।

यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। इसके बाद उसी वर्ष नवंबर में कंपनी ने 64-क्यूबिट वाली Kaveri चिप पेश की, जो कुछ ही महीनों में क्यूबिट संख्या को दोगुने से भी अधिक बढ़ाने की क्षमता को दर्शाती है। इस तरह की तेज प्रगति यह संकेत देती है कि भारतीय क्वांटम पारिस्थितिकी तंत्र प्रयोगशाला की सीमाओं से निकलकर वास्तविक, काम करने वाली प्रणालियों की ओर बढ़ रहा है।

मिशन के तहत कुल आठ स्टार्टअप का चयन किया गया है, और खबरों के अनुसार इनमें से प्रत्येक को लगभग 30 करोड़ रुपये का समर्थन दिया जा रहा है। इनमें से एक कंपनी, दिमिरा टेक्नोलॉजीज, स्वदेशी क्रायोजेनिक केबल बनाने पर काम कर रही है, जो क्वांटम कंप्यूटरों को अत्यधिक कम तापमान पर चलाने के लिए अनिवार्य हैं और अब तक ज्यादातर आयात पर निर्भर रही हैं।

2026 के मील के पत्थर

वर्ष 2026 भारत के क्वांटम सफर में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों का साक्षी बना है। 7 फरवरी 2026 को अमरावती के निकट एक क्वांटम वैली की शुरुआत हुई, जिसे देश के सबसे बड़े क्वांटम कंप्यूटर के इर्द-गिर्द विकसित किया गया है। इस तरह के समर्पित केंद्र शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और उद्योग को एक ही स्थान पर लाकर नवाचार की गति को कई गुना बढ़ा सकते हैं।

संचार के मोर्चे पर भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मिशन नेटवर्क ने क्वांटम संचार के क्षेत्र में लगभग एक हजार किलोमीटर की दूरी तक पहुँचने का मील का पत्थर हासिल किया है, जो सुरक्षित संचार की दिशा में एक बड़ी छलांग है। इसके अलावा, एक शोध समूह ने वर्ष 2026 के अंत तक 20-क्यूबिट वाला आयन-ट्रैप क्वांटम कंप्यूटर तैयार करने की उम्मीद जताई है।

इस पूरी प्रगति के पीछे एक बढ़ता हुआ शोध समुदाय है। मार्च 2026 तक की स्थिति के अनुसार, 43 संस्थानों के 152 शोधकर्ता इस मिशन के नेटवर्क का हिस्सा बन चुके थे। यह आँकड़ा दर्शाता है कि क्वांटम तकनीक अब कुछ चुनिंदा प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि देशभर में एक व्यापक और परस्पर जुड़ा हुआ शोध पारिस्थितिकी तंत्र आकार ले रहा है।

क्यों मायने रखता है क्वांटम

क्वांटम कंप्यूटिंग का महत्व केवल तकनीकी कौतूहल तक सीमित नहीं है। यह तकनीक नई दवाओं की खोज, उन्नत सामग्रियों के डिजाइन, जटिल वित्तीय मॉडलिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। साथ ही, इसका एक गंभीर पहलू सुरक्षा से भी जुड़ा है, क्योंकि पर्याप्त शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर आज की कई एन्क्रिप्शन प्रणालियों को भविष्य में भेदने की क्षमता रखते हैं।

यही कारण है कि क्वांटम तकनीक में आत्मनिर्भरता को रणनीतिक संप्रभुता के प्रश्न के रूप में देखा जा रहा है। यदि कोई देश इस तकनीक में पिछड़ जाता है, तो वह न केवल आर्थिक अवसर गँवाता है, बल्कि अपनी डिजिटल सुरक्षा को भी दूसरों पर निर्भर बना देता है। भारत का स्वदेशी क्वांटम कंप्यूटर और संचार अवसंरचना बनाने पर जोर इसी दूरदर्शिता से प्रेरित है।

हालाँकि रास्ता अभी भी लंबा और चुनौतीपूर्ण है। कई महत्वपूर्ण घटक और उपकरण अब भी आयात पर निर्भर हैं, और विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में सही मायनों में परिपक्वता आने में अभी एक दशक तक का समय लग सकता है। फिर भी, तीन वर्षों में खड़ी हुई यह क्वांटम पारिस्थितिकी और 2026 की उपलब्धियाँ स्पष्ट संकेत देती हैं कि भारत भविष्य के इस कंप्यूटर को गढ़ने की दौड़ में गंभीरता से उतर चुका है।

3 responses

क्यूबिट के बारे में बहुत उपयोगी लेख.

3

क्यूबिट को फॉलो करता हूँ और यह मददगार है.

1

मैं भी यही सोचता हूँ.

0
अर्जुन मेहता
Follow this desk
अर्जुन मेहता
Create a free account to follow अर्जुन मेहता. New stories land in your feed, and you can save any of them to your own reading lists.
Your library & lists →
अर्जुन मेहता
WRITTEN BY THE AUTHOR
अर्जुन मेहता 2026-08-27 · 4 min read · 649 reads
View profile →
VERIFY THIS STORY
ASK AI
अर्जुन मेहता Keep following अर्जुन मेहताHer next filing reaches you the moment it publishes, on her own subdomain.
Up next
More
Statistics Search Become a creator Alliances About Terms Privacy