avalw
⚲
सेमीकॉन इंडिया 2.0: 1.27 लाख करोड़ के दांव से चिप डिजाइन से फैब तक भारत की नई छलांग TECH · IN

सेमीकॉन इंडिया 2.0: 1.27 लाख करोड़ के दांव से चिप डिजाइन से फैब तक भारत की नई छलांग

अर्जुन मेहता अर्जुन मेहता arjunmehta.avalw.com · 4.8k reads Respect0 Save Share Read only
READS530live count PUBLISHED26 Aug2026 READING TIME3 min643 words LANGUAGEHindi
AI CITATIONS? Gathering data

जुलाई 2026 में मंजूर हुई सेमीकॉन इंडिया 2.0 योजना छह स्तंभों पर टिकी है, और एएसएमएल के साथ हुए समझौते से भारत पहली फ्रंट-एंड चिप फैब्रिकेशन इकाई की ओर बढ़ रहा है।

ALSO ON THE CREATOR SITERead this on arjunmehta.avalw.comOpen

आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम

वर्षों तक भारत दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार होने के बावजूद अपनी लगभग पूरी चिप जरूरत आयात से पूरी करता रहा है। लेकिन साल 2026 में यह तस्वीर तेजी से बदल रही है, क्योंकि देश अब केवल चिप खरीदने वाला नहीं, बल्कि उन्हें डिजाइन और निर्माण करने वाला देश बनने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है।

इस बदलाव के केंद्र में है सरकार की महत्वाकांक्षी सेमीकंडक्टर रणनीति, जिसका मकसद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता घटाना और घरेलू स्तर पर एक मजबूत चिप पारिस्थितिकी तंत्र खड़ा करना है। यह प्रयास सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक आत्मनिर्भरता से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

18 मई 2026 तक देश में तेरह स्वीकृत सेमीकंडक्टर परियोजनाएं या तो चालू हो चुकी थीं या निर्माणाधीन थीं। यह आंकड़ा दिखाता है कि नीति अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रही, बल्कि जमीन पर कारखानों और निवेश के रूप में आकार लेने लगी है, जो इस क्षेत्र के लिए एक निर्णायक मोड़ है।

सेमीकॉन इंडिया 2.0 के छह स्तंभ

सेमीकॉन इंडिया 2.0: 1.27 लाख करोड़ के दांव से चिप डिजाइन से फैब तक भारत की नई छलांग

इस पूरी मुहिम को नई गति देने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जुलाई 2026 में सेमीकॉन इंडिया 2.0 कार्यक्रम को मंजूरी दी। इसके लिए करीब एक लाख सत्ताईस हजार पांच सौ करोड़ रुपये यानी 1.275 ट्रिलियन रुपये का विशाल परिव्यय तय किया गया है, जो भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षा की गंभीरता को साफ दर्शाता है।

यह कार्यक्रम कुल छह प्रमुख क्षेत्रों को समेटता है, जिन्हें इसके स्तंभ कहा जा सकता है। इनमें चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर उपकरण एवं सामग्री, फैब्रिकेशन, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास, और कुशल जनशक्ति का विकास शामिल है, जो एक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को कवर करते हैं।

यह व्यापक दृष्टिकोण खास इसलिए है क्योंकि यह केवल कारखाने लगाने तक सीमित नहीं है। इसमें डिजाइन से लेकर पैकेजिंग और शोध तक हर कड़ी पर ध्यान दिया गया है, ताकि भारत आपूर्ति श्रृंखला के किसी एक हिस्से पर नहीं, बल्कि पूरे तंत्र पर अपनी पकड़ मजबूत कर सके।

डिजाइन से फैब तक जमीनी प्रगति

नीति के साथ-साथ जमीनी प्रगति भी उत्साहजनक रही है। अप्रैल 2026 तक पचहत्तर संस्थानों द्वारा दो सौ ग्यारह चिप टेप-आउट किए जा चुके थे, जबकि सात चिप विभिन्न तकनीकी नोड्स पर सफलतापूर्वक फैब्रिकेट की गईं, जिनमें बारह नैनोमीटर जैसा उन्नत नोड भी शामिल है।

निर्माण के मोर्चे पर भी बड़ी घोषणाएं हुईं। नौ अप्रैल 2026 को सरकार ने गुजरात के धोलेरा में टाटा सेमीकंडक्टर के लिए एक विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिसूचित किया, जिससे देश की पहली सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन इकाई की स्थापना का रास्ता खुल गया, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।

पैकेजिंग के क्षेत्र में भी कदम आगे बढ़े हैं। पंद्रह मई 2026 को राजस्थान के भिवाड़ी में एक एटीएमपी और ओसैट सुविधा का उद्घाटन किया गया, जो चिप की असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग जैसी अहम प्रक्रियाओं को देश के भीतर ही संभव बनाने की दिशा में एक ठोस प्रयास है।

एएसएमएल का साथ और वैश्विक भरोसा

भारत की बढ़ती साख का सबसे बड़ा प्रमाण सोलह मई 2026 को सामने आया, जब टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और डच सेमीकंडक्टर उपकरण कंपनी एएसएमएल ने गुजरात में देश की पहली फ्रंट-एंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन इकाई स्थापित करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

एएसएमएल जैसी वैश्विक दिग्गज कंपनी का इस परियोजना से जुड़ना बेहद मायने रखता है, क्योंकि यह कंपनी उन्नत चिप बनाने के लिए जरूरी अत्याधुनिक लिथोग्राफी मशीनों के क्षेत्र में दुनिया की अग्रणी है, और उसकी भागीदारी भारत की तकनीकी क्षमता पर बढ़ते वैश्विक भरोसे को दर्शाती है।

आगे की राह

चिप निर्माण की यह प्रगति कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दुनिया से भी गहराई से जुड़ी है। साल 2026 तक बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवा, कृषि और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित समाधान मुख्यधारा में आने लगे हैं, और मजबूत घरेलू चिप आपूर्ति इस पूरे बदलाव को और गति दे सकती है।

आने वाले वर्षों में असली परीक्षा यह होगी कि भारत इन योजनाओं को कितनी कुशलता से क्रियान्वित कर पाता है। यदि निवेश, कुशल जनशक्ति और वैश्विक साझेदारियों का सही तालमेल बना रहा, तो देश न सिर्फ अपनी जरूरत पूरी करेगा, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर एक भरोसेमंद खिलाड़ी के रूप में उभर सकता है।

1 responses

सेमीकॉन इंडिया 2.0 पर बहुत अच्छी कवरेज.

4
अर्जुन मेहता
Follow this desk
अर्जुन मेहता
Create a free account to follow अर्जुन मेहता. New stories land in your feed, and you can save any of them to your own reading lists.
Your library & lists →
अर्जुन मेहता
WRITTEN BY THE AUTHOR
अर्जुन मेहता 2026-08-26 · 3 min read · 530 reads
View profile →
VERIFY THIS STORY
ASK AI
अर्जुन मेहता Keep subscribing to अर्जुन मेहताHer next filing reaches you the moment it publishes, on her own subdomain.
Up next
More
Statistics Search Become a creator Alliances About Terms Privacy