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दस साल, 2,366 करोड़ लेनदेन: कैसे UPI ने भारत को डिजिटल भुगतान की दुनिया का सिरमौर बनाया

अर्जुन मेहता अर्जुन मेहता arjunmehta.avalw.com · 4.6k reads Respect0 Save Share Read only
READS364live count PUBLISHED28 Aug2026 READING TIME3 min570 words LANGUAGEHindi
AI CITATIONS? Gathering data

अपने एक दशक के सफर में UPI एक अपरिचित तकनीक से भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन गया है। जुलाई 2026 में 2,366 करोड़ लेनदेन का रिकॉर्ड, मई में 29.90 लाख करोड़ रुपये का सर्वाधिक मासिक मूल्य, 703 बैंक और दुनिया के लगभग आधे रियल-टाइम भुगतान,और अब आठ देशों तक फैलता कदम।

किराने की दुकान से लेकर सड़क किनारे की चाय की टपरी तक, आज भारत में भुगतान का मतलब अक्सर एक क्यूआर कोड और मोबाइल फोन पर कुछ सेकंड का काम भर रह गया है, और इस पूरे बदलाव के केंद्र में है यूपीआई—यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस—जो अब अपने एक दशक के सफर के सबसे बड़े पड़ाव पर पहुँच चुका है।

एक दशक का सफर

यूपीआई की शुरुआत 2016 में हुई थी, और शुरुआती वर्षों में इसे एक नई, अपरिचित तकनीक के रूप में देखा गया, लेकिन आज यह करोड़ों भारतीयों की रोज़मर्रा की आदत बन चुका है, जिसके बिना बाज़ार, दुकान और आम लेन-देन की कल्पना करना ही कठिन हो गया है।

इस एक दशक में लेनदेन की मात्रा में लगभग तेरह हज़ार गुना की छलांग देखी गई है, जो किसी भी भुगतान प्रणाली के लिए असाधारण है और यह दिखाता है कि कैसे एक तकनीक ने महज़ कुछ वर्षों में पूरे देश की भुगतान संस्कृति को जड़ से बदल डाला है।

इस विस्तार को बैंकों की भागीदारी से भी समझा जा सकता है: जहाँ 2016-17 में केवल 44 बैंक यूपीआई पर सक्रिय थे, वहीं 2025-26 तक यह संख्या बढ़कर 703 बैंकों तक पहुँच गई है, यानी लगभग हर बड़ा और छोटा बैंक अब इस नेटवर्क का हिस्सा बन चुका है।

रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड

आँकड़े इस उभार की गवाही देते हैं। जुलाई 2026 में यूपीआई ने 2,366 करोड़ लेनदेन दर्ज किए, जो इसके पूरे दस साल के इतिहास में किसी एक महीने का सबसे ऊँचा आँकड़ा है और इसकी लगातार बढ़ती रफ़्तार को साफ़ तौर पर दर्शाता है।

यह छलांग अचानक नहीं आई; इससे पहले मई 2026 में ही मासिक लेनदेन की संख्या पहली बार 2,300 करोड़ के पार पहुँची थी, और उसके बाद हर महीने यह गति और मज़बूत होती चली गई, मानो नई ऊँचाइयाँ अब अपवाद नहीं बल्कि नियम बन गई हों।

सिर्फ़ संख्या ही नहीं, मूल्य के लिहाज़ से भी रिकॉर्ड बने: मई 2026 में यूपीआई से हुए लेनदेन का कुल मूल्य लगभग 29.90 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया, जो 2016 में इसकी शुरुआत के बाद से किसी एक महीने का सबसे बड़ा आँकड़ा दर्ज किया गया।

दुनिया में भारत की छाप

दस साल, 2,366 करोड़ लेनदेन: कैसे UPI ने भारत को डिजिटल भुगतान की दुनिया का सिरमौर बनाया

इन आँकड़ों का महत्व सिर्फ़ भारत तक सीमित नहीं है। यूपीआई अकेले दुनिया भर के रियल-टाइम डिजिटल भुगतान का लगभग आधा हिस्सा संभालता है, जिसका अर्थ है कि इस क्षेत्र में भारत अब किसी अनुयायी की नहीं, बल्कि एक वैश्विक अगुवा की भूमिका में खड़ा है।

यही वह बिंदु है जहाँ यूपीआई एक घरेलू सुविधा से आगे बढ़कर भारत की तकनीकी पहचान बन जाता है, एक ऐसा उदाहरण जिसे दुनिया के कई देश उत्सुकता से देख रहे हैं और अपने यहाँ इसी तरह की व्यवस्था लागू करने की संभावनाएँ टटोल रहे हैं।

सीमाओं के पार यूपीआई

यह उत्सुकता अब ज़मीन पर उतरने लगी है। यूपीआई फ़िलहाल आठ देशों में किसी न किसी रूप में चालू है—संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, फ्रांस, मॉरीशस, भूटान, नेपाल, श्रीलंका और क़तर—जिससे भारतीय यात्री और प्रवासी विदेश में भी परिचित तरीके से भुगतान कर पा रहे हैं।

इस वैश्विक विस्तार की ज़िम्मेदारी एनपीसीआई और उसकी अंतरराष्ट्रीय इकाई एनआईपीएल पर है; सिंगापुर के साथ दोतरफ़ा जुड़ाव, नेपाल में देशव्यापी स्वीकार्यता और फ्रांस में शुरुआती स्तर पर भुगतान स्वीकार्यता का विस्तार इस दिशा की गंभीरता को दर्शाते हैं।

दस साल पहले जो एक प्रयोग जैसा लगता था, वह आज भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है, और अब एक निर्यात-योग्य तकनीक के रूप में सीमाओं के पार कदम रख रहा है। यूपीआई की अगली बड़ी कहानी शायद भारत में नहीं, बल्कि दुनिया के बाज़ारों में लिखी जाएगी।

5 responses

यहाँ UPI मासिक लेनदेन 2366 करोड़ के बारे में काफी कुछ सीखा.

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UPI मासिक लेनदेन 2366 करोड़ का अच्छा विश्लेषण.

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अर्जुन मेहता 2026-08-28 · 3 min read · 364 reads
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