जुलाई 2026 में ONDC ने 50 करोड़ संचयी लेनदेन का आंकड़ा पार किया। तीन लाख से ज्यादा विक्रेता, 400+ शहर और मेट्रो टिकटिंग तक,भारत के ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स के विस्तार पर एक विश्लेषण।
भारत की डिजिटल क्रांति की चर्चा अक्सर यूपीआई, इंडिया स्टैक और ब्लिंकिट व ज़ेप्टो जैसी क्विक कॉमर्स सेवाओं के इर्द-गिर्द घूमती है। लेकिन इन सबके बीच एक और महत्वाकांक्षी परियोजना चुपचाप देश के ई-कॉमर्स ढांचे को नए सिरे से आकार दे रही है, और वह है ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स, जिसे संक्षेप में ONDC कहा जाता है।
यह किसी एक कंपनी का ऐप या प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि एक खुला नेटवर्क है जिसका उद्देश्य ऑनलाइन खरीद-बिक्री को कुछ बड़ी कंपनियों के एकाधिकार से बाहर निकालना है। इसका मूल विचार यह है कि खरीदार और विक्रेता अलग-अलग ऐप पर होते हुए भी एक ही साझा नेटवर्क के माध्यम से आपस में जुड़ सकें और लेनदेन कर सकें।
50 करोड़ लेनदेन का बड़ा पड़ाव
इस नेटवर्क की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण हाल ही में सामने आया, जब जुलाई 2026 में ONDC ने 50 करोड़ यानी 500 मिलियन संचयी लेनदेन का आंकड़ा पार कर लिया। यह उपलब्धि भारत के ओपन डिजिटल कॉमर्स ढांचे की तेज रफ्तार वृद्धि को स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है और इसकी बढ़ती स्वीकार्यता दिखाती है।
इस वृद्धि की गति को समझने के लिए पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है। वित्त वर्ष 2023 में नेटवर्क पर केवल दो लाख लेनदेन दर्ज हुए थे, जबकि वित्त वर्ष 2026 के दौरान यह संख्या बढ़कर 21 करोड़ 80 लाख यानी 218 मिलियन तक पहुंच गई, जो कुछ ही वर्षों में कई गुना का विस्तार है।
यह छलांग दिखाती है कि एक बार बुनियादी ढांचा तैयार हो जाने के बाद, अपनाने की गति कितनी तेज हो सकती है। शुरुआती वर्षों में जो नेटवर्क प्रयोग के स्तर पर था, वह अब रोजमर्रा के लाखों लेनदेन को संभालने वाली एक परिपक्व प्रणाली में बदल चुका है।
विक्रेता और शहरों तक पहुंच

आंकड़ों से आगे बढ़कर देखें तो नेटवर्क का विस्तार भी उतना ही प्रभावशाली है। 2026 में इस नेटवर्क पर तीन लाख से अधिक विक्रेता जुड़ चुके हैं, सौ से ज्यादा बायर ऐप सक्रिय हैं, और इसका संचालन देश भर के 400 से अधिक शहरों और कस्बों में फैल चुका है।
कुछ आकलनों के अनुसार तो यह विस्तार और भी बड़ा है। 2026 की शुरुआत तक नेटवर्क पर 7 लाख 60 हजार से अधिक व्यापारी और सेवा प्रदाता जुड़ चुके थे, जो 1,200 से ज्यादा भारतीय शहरों और कस्बों में फैले हुए हैं, जो इसकी गहरी भौगोलिक पहुंच को दर्शाता है।
मासिक स्तर पर भी गतिविधि लगातार बढ़ रही है। जनवरी 2025 तक ही यह नेटवर्क हर महीने 1 करोड़ 20 लाख से अधिक लेनदेन संसाधित कर रहा था, जो इस बात का संकेत है कि यह अब एक प्रयोग नहीं, बल्कि आम उपभोक्ताओं और विक्रेताओं की दिनचर्या का हिस्सा बन रहा है।
खुदरा से आगे, सेवाओं तक
ONDC अब केवल सामान की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रह गया है। इस पारिस्थितिकी तंत्र में अब दो लाख से अधिक सक्रिय खुदरा व्यापारियों के साथ-साथ गतिशीलता और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में दस लाख से अधिक सेवा प्रदाता भी शामिल हो चुके हैं, जो इसके दायरे को व्यापक बनाते हैं।
परिवहन के क्षेत्र में इसका प्रभाव विशेष रूप से उल्लेखनीय है। दस लाख से अधिक ड्राइवर नेटवर्क के राइड-हेलिंग तंत्र से जुड़ चुके हैं, और भारत की मेट्रो टिकटिंग की लगभग 80 प्रतिशत सूची अब ONDC के माध्यम से उपलब्ध है, जो सार्वजनिक परिवहन में इसकी बढ़ती भूमिका दिखाता है।
इसका असर रोजमर्रा की यात्रा पर भी दिखने लगा है। जून 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, यह नेटवर्क प्रतिदिन 3 लाख 70 हजार से अधिक सार्वजनिक परिवहन यात्राओं को सुगम बना रहा था, जिससे लाखों आम नागरिकों की आवाजाही सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।
आगे की राह
इन आंकड़ों का असली महत्व केवल संख्याओं में नहीं, बल्कि उस दृष्टि में है जो ONDC को आगे बढ़ाती है। यह छोटे विक्रेताओं, दुकानदारों और सेवा प्रदाताओं को उन्हीं डिजिटल उपकरणों तक पहुंच देने का प्रयास है जो अब तक बड़ी कंपनियों तक सीमित थे, और इस तरह प्रतिस्पर्धा को अधिक समावेशी बनाता है।
हालांकि असली चुनौती इस गति को बनाए रखने और उपयोगकर्ताओं का भरोसा जीतने की होगी। यदि नेटवर्क गुणवत्ता, विश्वसनीयता और आसान अनुभव सुनिश्चित कर पाता है, तो ONDC यूपीआई की तरह ही भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का एक और वैश्विक उदाहरण बनकर उभर सकता है।
ONDC: साफ और अच्छे से समझाया.
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