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चिप निर्माण में भारत की छलांग: 2026 में डोलेरा से सानंद तक बदलती सेमीकंडक्टर तस्वीर

अर्जुन मेहता अर्जुन मेहता arjunmehta.avalw.com · 4.7k reads Respect0 Save Share Read only
READS31live count PUBLISHED21 Sept2026 READING TIME3 min681 words LANGUAGEHindi
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टाटा और पीएसएमसी की डोलेरा फैब से लेकर सानंद में माइक्रोन की इकाई तक, भारत 2026 में सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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डोलेरा में देश की पहली फैब

इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रतीक गुजरात के डोलेरा में बन रही फैब्रिकेशन इकाई है। इसे टाटा समूह और ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन मिलकर विकसित कर रहे हैं। इस परियोजना में लगभग इक्यानबे हजार करोड़ रुपये, यानी करीब ग्यारह अरब डॉलर का भारी भरकम निवेश किया जा रहा है, जो इसके पैमाने को दर्शाता है।

इस इकाई की नियोजित क्षमता प्रति माह पचास हजार वेफर उत्पादन की है, जिससे सालाना लगभग तीन अरब चिप बनने का अनुमान है। यहां मुख्य रूप से अट्ठाईस नैनोमीटर और उससे बड़ी परिपक्व नोड वाली चिप बनेंगी, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, दूरसंचार और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती हैं। उत्पादन 2026 के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है।

रिपोर्टों के अनुसार अप्रैल 2026 तक इस परियोजना का निर्माण कार्य लगभग आधा पूरा हो चुका था। नींव संबंधी काम समाप्त होने के बाद अब परियोजना क्लीनरूम की स्थापना और उपकरणों के एकीकरण के चरण में प्रवेश कर चुकी है। इतनी बड़ी और संवेदनशील इकाई के लिए यही चरण तकनीकी दृष्टि से सबसे जटिल और निर्णायक माना जाता है।

सानंद में माइक्रोन की इकाई

सेमीकंडक्टर चिप आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का दिल मानी जाती है, और भारत अब इनके निर्माण में कदम रख रहा है (प्रतीकात्मक चित्र)।
सेमीकंडक्टर चिप आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का दिल मानी जाती है, और भारत अब इनके निर्माण में कदम रख रहा है (प्रतीकात्मक चित्र)।

डोलेरा अकेली कहानी नहीं है। गुजरात के ही सानंद में अमेरिकी कंपनी माइक्रोन ने अपनी असेंबली, टेस्ट और पैकेजिंग इकाई स्थापित की है, जिसमें लगभग दो अरब पचहत्तर करोड़ डॉलर का निवेश हुआ है। इस सुविधा का औपचारिक उद्घाटन अट्ठाईस फरवरी 2026 को हुआ, और यह मौजूदा मिशन चक्र की पहली चालू सेमीकंडक्टर इकाई बन गई।

माइक्रोन को उम्मीद है कि सानंद इकाई 2026 के दौरान करोड़ों चिपों की असेंबली और परीक्षण करेगी, और 2027 तक उत्पादन बढ़कर अरबों के स्तर तक पहुंच जाएगा। यह क्रमिक वृद्धि दिखाती है कि भारत में चिप संबंधी बुनियादी ढांचा धीरे धीरे लेकिन मजबूती के साथ अपनी जड़ें जमा रहा है।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन

ये अलग अलग परियोजनाएं दरअसल एक बड़ी राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा हैं, जिसे इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के नाम से जाना जाता है। इस मिशन के तहत अब तक कई परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, और सरकार ने चिप निर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए विशेष सहायता का प्रावधान रखा है। लक्ष्य स्पष्ट है, आयात पर निर्भरता घटाना।

इस मिशन का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य यह है कि भारत 2029 तक दुनिया के शीर्ष पांच चिप पारिस्थितिकी तंत्रों में अपनी जगह बना ले। इसके अलावा असम के जगीरोड में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की असेंबली और परीक्षण इकाई भी चालू हो चुकी है, जो दर्शाता है कि यह विस्तार केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रह गया है।

रोजगार और अर्थव्यवस्था पर असर

इन परियोजनाओं का प्रभाव केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। अकेले डोलेरा परियोजना से एक लाख से अधिक रोजगार सृजित होने की उम्मीद जताई गई है, जिनमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के अवसर शामिल हैं। इसके साथ ही उच्च तकनीक के हस्तांतरण और कुशल कार्यबल के विकास का रास्ता भी खुलेगा।

सेमीकंडक्टर एक ऐसा आधार उद्योग है जिस पर कई अन्य क्षेत्र टिके होते हैं। घरेलू स्तर पर चिप बनने से इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और दूरसंचार जैसे उद्योगों की आपूर्ति श्रृंखला अधिक स्थिर और भरोसेमंद बन सकती है, जिससे आयातित पुर्जों पर निर्भरता और उससे जुड़ा जोखिम दोनों घटते हैं।

यह पहल भारत के व्यापक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण अभियान से भी गहराई से जुड़ी हुई है। बीते कुछ वर्षों में देश में स्मार्टफोन और अन्य उपकरणों की असेंबली का काम तेजी से बढ़ा है, और अब इसमें चिप निर्माण की कड़ी जुड़ने से पूरी मूल्य श्रृंखला के अधिक आत्मनिर्भर बनने की उम्मीद और मजबूत होती जा रही है।

क्यों मायने रखता है

बीते वर्षों में दुनिया ने देखा है कि चिप की कमी किस तरह पूरी अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकती है, चाहे वह कार निर्माण हो या इलेक्ट्रॉनिक्स। ऐसे में किसी देश का अपने भीतर चिप बनाने की क्षमता विकसित करना केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। भारत ठीक इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कुल मिलाकर, 2026 भारत के सेमीकंडक्टर सफर का एक निर्णायक वर्ष साबित हो सकता है। डोलेरा की फैब से लेकर सानंद और जगीरोड की इकाइयों तक, कई टुकड़े अब एक साथ आकार ले रहे हैं। रास्ता निश्चित रूप से लंबा और चुनौतीपूर्ण है, लेकिन नींव जिस मजबूती से रखी जा रही है, वह आने वाले वर्षों के लिए उम्मीद जगाती है।

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अर्जुन मेहता 2026-09-21 · 3 min read · 31 reads
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