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भारत की स्वच्छ ऊर्जा में बड़ी छलांग: गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता 300 गीगावाट के पार CLIMATE · IN

भारत की स्वच्छ ऊर्जा में बड़ी छलांग: गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता 300 गीगावाट के पार

इशा राव इशा राव isharao.avalw.com · 370 reads Respect0 Save Share Read only
READS780live count PUBLISHED5 Sept2026 READING TIME3 min584 words LANGUAGEHindi
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आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता 31 जुलाई 2026 तक 300 गीगावाट के पार पहुंच गई है। यह 2030 के 500 गीगावाट लक्ष्य का 60 प्रतिशत से अधिक है, जिसमें सौर ऊर्जा सबसे आगे है।

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भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देश की गैर-जीवाश्म ईंधन पर आधारित बिजली उत्पादन क्षमता अब 300 गीगावाट के आंकड़े को पार कर गई है, जिसे जलवायु और ऊर्जा दोनों मोर्चों पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यह उपलब्धि 31 जुलाई 2026 तक दर्ज की गई। इस लेख में हम समझेंगे कि इस आंकड़े का असल मतलब क्या है, इसमें किन स्रोतों का कितना योगदान है, और यह देश के 2030 के लक्ष्यों से किस तरह जुड़ा हुआ है।

300 गीगावाट का पड़ाव

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक देश की गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता 300.50 गीगावाट तक पहुंच गई। यह 2030 तक 500 गीगावाट क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है।

इतना ही नहीं, अब देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता का 54 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से आता है। यह दर्शाता है कि भारत की ऊर्जा व्यवस्था धीरे-धीरे लेकिन मजबूती के साथ स्वच्छ स्रोतों की ओर बढ़ रही है।

सौर ऊर्जा सबसे आगे

पवन और सौर जैसे स्रोत मिलकर भारत की स्वच्छ ऊर्जा का आधार बन रहे हैं।
पवन और सौर जैसे स्रोत मिलकर भारत की स्वच्छ ऊर्जा का आधार बन रहे हैं।

इस पूरी वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान सौर ऊर्जा का है। आंकड़ों के अनुसार, देश की सौर क्षमता 164.59 गीगावाट तक पहुंच गई है, जो सभी स्रोतों में सबसे अधिक है और इस बढ़त की मुख्य वजह बनी हुई है।

सौर के बाद पवन ऊर्जा 58.14 गीगावाट, जल विद्युत 57.24 गीगावाट, बायो-ऊर्जा 11.75 गीगावाट और परमाणु ऊर्जा 8.78 गीगावाट के साथ योगदान दे रही है। इस तरह अलग-अलग स्रोत मिलकर देश की स्वच्छ ऊर्जा का ठोस आधार तैयार करते हैं।

रिकॉर्ड वृद्धि

बीते वित्त वर्ष में क्षमता जुड़ने की रफ्तार भी उल्लेखनीय रही। रिपोर्टों के अनुसार, 2025-26 के दौरान कुल 55.29 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता जोड़ी गई, जिसमें अकेले सौर ऊर्जा का हिस्सा 44.6 गीगावाट और पवन ऊर्जा का 6 गीगावाट रहा।

नवीकरणीय स्रोतों से बिजली उत्पादन में भी बड़ा उछाल आया है। यह उत्पादन 2014-15 के लगभग 190.96 बिलियन यूनिट से बढ़कर 2025-26 में करीब 477.79 बिलियन यूनिट तक पहुंच गया, जो बीते वर्षों में हुई तेज़ प्रगति को साफ तौर पर दर्शाता है।

2030 लक्ष्य की ओर

300 गीगावाट का यह पड़ाव, 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में एक अहम कदम है। लक्ष्य का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पूरा होना, इस अभियान की तेज़ रफ्तार की ओर स्पष्ट रूप से इशारा करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सौर उपकरणों की घटती लागत और लगातार बढ़ते निवेश ने इस वृद्धि को गति दी है। आने वाले वर्षों में यदि यही रफ्तार बनी रहती है, तो 2030 का लक्ष्य समय पर हासिल करना काफी हद तक संभव माना जा रहा है।

इसका महत्व

स्वच्छ ऊर्जा की ओर यह बदलाव जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में भी बेहद महत्वपूर्ण है। जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होने से कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलती है, जो आज पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चिंता बना हुआ है।

इसके साथ ही, घरेलू स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा बढ़ने से देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होती है। ईंधन के आयात पर निर्भरता घटने से आर्थिक दृष्टि से भी दीर्घकाल में देश को लाभ मिलने की उम्मीद जताई जाती है।

आगे की राह

हालांकि, इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए बिजली ग्रिड को मजबूत करने और ऊर्जा भंडारण जैसी चुनौतियों का समाधान भी जरूरी है। नवीकरणीय ऊर्जा की आपूर्ति को स्थिर और भरोसेमंद बनाना, आगे की एक बड़ी प्राथमिकता होगी।

कुल मिलाकर, 300 गीगावाट का यह आंकड़ा भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में एक बड़ा पड़ाव है। 2030 के लक्ष्य तक का सफर अभी जारी है, और आने वाले वर्ष इस दिशा में और भी अधिक निर्णायक साबित हो सकते हैं।

3 responses

भारत के बारे में अच्छा संदर्भ.

2

भारत: साफ और अच्छे से समझाया.

2

बिल्कुल.

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इशा राव
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इशा राव 2026-09-05 · 3 min read · 780 reads
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