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गोवा की 102 साल की अगुआ लिबिया लोबो ने पुर्तगाली शासन के खिलाफ लड़ी CLIMATE · IN

गोवा की 102 साल की अगुआ लिबिया लोबो ने पुर्तगाली शासन के खिलाफ लड़ी

इशा राव इशा राव isharao.avalw.com · 370 reads Respect0 Save Share Read only
READS1live count PUBLISHED7 Nov2026 READING TIME3 min515 words LANGUAGEHindi
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गोवा की 102 साल की अगुआ लिबिया लोबो सरदेसाई की कहानी, जो पुर्तगाली शासन के खिलाफ लड़ने वाले गैर-संस्थागत मोर्चे की आवाज़ थीं।

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गोवा की आज़ादी के इतिहास में जो नाम चर्चा में हैं, वे अक्सर तलवारें चलाते हुए या मंच पर बोलते हुए दिखते हैं। 1954 के उन सन्नाटे भरे दौरों में एक अलग ही आवाज़ थी, जो रेडियो की तरंगों के ज़रिए पुर्तगाली शासन के खिलाफ सच बोल रही थी।

102 साल की उम्र में भी इस महिला की आवाज़ में वह फुर्ती और दमक बनी हुई है, जैसे वे अभी भी युवा हों। लिबिया लोबो सरदेसाई, जिन्हें गोवा की जनता 'लिब्बी' के नाम से जानती है, ने अपनी यादें ताज़ा करके ऐतिहासिक एक अद्भुत अध्याय को फिर से जीवंत किया है।

दोनों की एकता ने इसे सिर्फ एक व्यक्तिगत जीवनी नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ बना दिया है, जो बताता है कि आज़ादी की लड़ाई में महिलाओं की भूमिका कितनी गहरी थी, भले ही वे मुख्यधारा के इतिहास के पन्नों में कभी आधिकारिक रूप से शामिल न की गई हों।

इस कहानी को गोवा की सीमाओं से बाहर ले जाने का श्रेय अंजलि मोंटेरो और के.पी. जयशंकर को जाता है, जिन्होंने 'लिब्बी डी लिबरडेड' की डॉक्यूमेंट्री के ज़रिए दुनिया को दिखाया है कि आज़ादी के संग्राम में महिलाओं की भूमिका कितनी गहरी थी।

मुंबई की गलियों से गोवा की जंगल तक

लिबिया का जन्म 25 मई 1924 को गोवा में हुआ था, लेकिन उनका बचपन और जवान साल मुंबई में बीते। पाँच भाइयों के बीच अकेली बेटी होने के कारण उनका स्वभाव हमेशा से ही कुछ अलग था, जो उनका स्वभाव 'लड़कियों जैसा' नहीं बना।

उस दौर में, जब ज़्यादातर लड़कियों से यही उम्मीद की जाती थी कि वे जल्द से जल्द शादी करके घर बसा लें, तब उनका खुद को शिक्षित करने और करियर बनाने का सपना देखना एक क्रांतिकारी कदम था।

कानून की पढ़ाई के दौरान, उन्होंने तत्कालीन बॉम्बे में 'ऑल इंडिया रेडियो' में स्टेनोग्राफर और लाइब्रेरियन के तौर पर भी काम किया। संभवतः इसी अनुभव की वजह से वे उस 'अंडरग्राउंड रेडियो' से जुड़ पाईं, जिसने पुर्तगाल-विरोधी आंदोलन में मदद की थी।

वह रेडियो जो अंधेरे में सत्य की आवाज़ पहुँचाता था।
वह रेडियो जो अंधेरे में सत्य की आवाज़ पहुँचाता था।

अंबेडकर की प्रेरणा और गोवा की आवाज़

दक्षिण मुंबई के सिद्धार्थ कॉलेज में कानून की डिग्री के लिए दाखिला लेते समय, वे अपनी कक्षा में अकेली ईसाई लड़की थीं। उनके प्रोफेसरों में महान बी.आर. अंबेडकर भी शामिल थे, जिन्होंने इस कॉलेज की स्थापना की थी।

फिल्म में वे बताती हैं कि अंबेडकर के इन शब्दों ने उन्हें गोवा की आज़ादी की लड़ाई से जोड़ दिया, कि

102 साल की उम्र में भी साफ़ दिमाग और फुर्ती।
102 साल की उम्र में भी साफ़ दिमाग और फुर्ती।

102 साल में भी फुर्ती बरकरार

102 साल की उम्र में भी वे काफी युवा लगती हैं; वे चुस्त-दुरुस्त हैं और उनका दिमाग एकदम साफ है। उनकी आवाज़ स्पष्ट है, हँसी बहुत प्यारी है, और उनकी याददाश्त इतनी तेज़ है कि वे अपने शानदार जीवन के दशकों पुराने किस्सों को भी आसानी से याद कर लेती हैं।

लिबिया 'लिब्बी' लोबो सरदेसाई की यह कहानी सिर्फ एक व्यक्तिगत जीवनी नहीं है, बल्कि यह गोवा की आज़ादी की लड़ाई के उस अध्याय को उजागर करती है, जहाँ महिलाओं ने अक्सर अनदेखे कोने से, गहराई से अपना योगदान दिया।

दोनों की एकता ने इसे सिर्फ एक व्यक्तिगत जीवनी नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ बना दिया है, जो बताता है कि आज़ादी की लड़ाई में महिलाओं की भूमिका कितनी गहरी थी, भले ही वे मुख्यधारा के इतिहास के पन्नों में कभी आधिकारिक रूप से शामिल न की गई हों।

गोवा के जंगल, जहाँ लिबिया ने अपनी आवाज़ उठाई।
गोवा के जंगल, जहाँ लिबिया ने अपनी आवाज़ उठाई।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लिबिया लोबो सरदेसाई का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

लिबिया लोबो सरदेसाई का जन्म 25 मई 1924 को गोवा में हुआ था। हालाँकि उनका बचपन और जवानी के वर्ष मुंबई में बीते, जहाँ उन्होंने अपनी शिक्षा और करियर की नींव रखी।

गोवा की आज़ादी की लड़ाई में लिबिया लोबो ने किस माध्यम से पुर्तगाली शासन के खिलाफ काम किया?

लिबिया लोबो ने रेडियो की तरंगों के ज़रिए पुर्तगाली शासन के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाई। उन्होंने एक अंडरग्राउंड रेडियो से जुड़कर आंदोलन को सहायता प्रदान की, जिसके लिए उन्हें गोवा की जनता 'लिब्बी' के नाम से जानती है।

लिबिया लोबो सरदेसाई की कहानी को डॉक्यूमेंट्री के रूप में किसने प्रस्तुत किया है?

लिबिया लोबो सरदेसाई की कहानी को अंजलि मोंटेरो और के.पी. जयशंकर ने 'लिब्बी डी लिबरडेड' नामक डॉक्यूमेंट्री के ज़रिए दुनिया के सामने रखा है। इस फिल्म के माध्यम से गोवा की सीमाओं से बाहर महिलाओं की आज़ादी संग्राम में भूमिका को उजागर किया गया है।

लिबिया लोबो ने मुंबई में किस संस्थान में कानून की पढ़ाई की थी?

लिबिया लोबो ने दक्षिण मुंबई स्थित सिद्धार्थ कॉलेज में कानून की डिग्री के लिए दाखिला लिया था। उस समय वे अपनी कक्षा में अकेली ईसाई लड़की थीं और उनके प्रोफेसरों में बी.आर. अंबेडकर भी शामिल थे।

लिबिया लोबो सरदेसाई की वर्तमान उम्र कितनी है और उनकी तबियत कैसी है?

लिबिया लोबो सरदेसाई की वर्तमान उम्र 102 साल है। इस उम्र में भी वे काफी चुस्त-दुरुस्त हैं, उनकी आवाज़ स्पष्ट है और उनकी याददाश्त इतनी तेज़ है कि वे दशकों पुराने किस्सों को भी आसानी से याद कर लेती हैं।

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इशा राव 2026-11-07 · 3 min read · 1 reads
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