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भारत की अपनी कृत्रिम बुद्धिमत्ता: सर्वम के नए मॉडल और इंडियाएआई मिशन की कहानी TECH · IN

भारत की अपनी कृत्रिम बुद्धिमत्ता: सर्वम के नए मॉडल और इंडियाएआई मिशन की कहानी

Rohan Verma Rohan Verma rohanverma.avalw.com · 3.3k reads Respect0 Save Share Read only
READS37live count PUBLISHED21 Sept2026 READING TIME4 min803 words LANGUAGEHindi
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भारत ने अपने पहले संप्रभु फाउंडेशनल भाषा मॉडल पेश किए हैं। इंडियाएआई मिशन के तहत सर्वम द्वारा बनाए गए इन मॉडलों और देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता की कोशिश पर एक विस्तृत नज़र।

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दुनिया भर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दौड़ अब सिर्फ अमेरिका और चीन तक सीमित नहीं रह गई है। भारत भी इस अहम क्षेत्र में तेज़ी से अपनी अलग पहचान बना रहा है, और हाल के महीनों में इसके कई ठोस प्रमाण भी सामने आए हैं। देश अब विदेशी तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय अपने खुद के भाषा मॉडल बनाने की दिशा में मज़बूती से बढ़ रहा है।

इंडियाएआई मिशन क्या है

इस पूरी कोशिश की असली रीढ़ है इंडियाएआई मिशन, जिसे साल 2024 में मंज़ूरी दी गई थी। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत चलने वाले इस मिशन का कुल स्वीकृत बजट लगभग 10,372 करोड़ रुपये है, जो 2024 से लेकर 2029 तक की पूरी अवधि के लिए तय किया गया है। इसका मुख्य मकसद देश के तकनीकी तंत्र को मज़बूत बनाना है।

यह मिशन असल में कई अलग-अलग स्तंभों पर टिका हुआ है। इनमें कंप्यूटिंग की सुविधा को सभी तक पहुँचाना, बेहतर डेटासेट तैयार करना, स्वदेशी मॉडल विकसित करना, प्रतिभाओं को निखारना, स्टार्टअप को पूँजी उपलब्ध कराना और ज़िम्मेदार तकनीक को बढ़ावा देना शामिल है। इस तरह यह सिर्फ एक मॉडल बनाने से कहीं आगे की एक व्यापक योजना है।

सर्वम को मिली ज़िम्मेदारी

इसी मिशन के तहत सरकार ने अप्रैल 2025 में सर्वम नाम की कंपनी को चुना, ताकि वह भारत का अपना फाउंडेशनल मॉडल बना सके। कंपनी को छह महीने के लिए करीब 4,000 जीपीयू यानी बेहद शक्तिशाली प्रोसेसर उपलब्ध कराए गए, जिनकी मदद से वह लगभग 70 अरब पैरामीटर वाला एक बड़ा और सक्षम मॉडल तैयार कर सके।

सर्वम कोई बहुत पुरानी कंपनी बिल्कुल नहीं है। इसकी स्थापना साल 2023 में हुई थी, और इसे शुरू करने वाले शोधकर्ता प्रतिष्ठित आईआईटी मद्रास से जुड़े रहे हैं। बहुत कम समय में ही इस कंपनी ने खुद को भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दुनिया में एक बेहद अहम नाम के रूप में स्थापित कर लिया है, जो अपने आप में उल्लेखनीय है।

पहला संप्रभु मॉडल

भारत अपने खुद के भाषा मॉडल और कंप्यूटिंग ढांचे के ज़रिए तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है (प्रतीकात्मक तस्वीर)।
भारत अपने खुद के भाषा मॉडल और कंप्यूटिंग ढांचे के ज़रिए तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है (प्रतीकात्मक तस्वीर)।

सबसे बड़ा पल फरवरी 2026 में आया, जब सर्वम ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में भारत का पहला संप्रभु फाउंडेशनल भाषा मॉडल पेश किया। इस खास मौके पर मौजूद दर्शकों में गूगल के सुंदर पिचाई और ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन जैसे बड़े नाम भी शामिल थे, जो इस पूरी उपलब्धि के वैश्विक महत्व को साफ तौर पर दर्शाता है।

दो मॉडल, खुला स्रोत

कंपनी ने कुल दो फाउंडेशन मॉडल जारी किए, और सबसे खास बात यह रही कि इन्हें खुले स्रोत यानी ओपन सोर्स के रूप में सबके लिए उपलब्ध कराया गया। ये दोनों मॉडल पूरी तरह इंडियाएआई मिशन के कंप्यूटिंग संसाधनों पर ही प्रशिक्षित किए गए, जिसे देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बेहद ठोस कदम माना जा रहा है।

तकनीकी रूप से भी ये दोनों मॉडल काफी दिलचस्प हैं। सर्वम 30बी करीब 32 अरब पैरामीटर वाला मॉडल है, जबकि सर्वम 105बी लगभग 106 अरब पैरामीटर का एक बड़ा मॉडल है। दोनों में मिक्सचर-ऑफ-एक्सपर्ट्स नामक तकनीक इस्तेमाल की गई है, जिससे हर काम के लिए पूरे मॉडल की ज़रूरत नहीं पड़ती और कुल खर्च काफी कम रहता है।

प्रदर्शन में कड़ी टक्कर

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इनमें से बड़ा मॉडल कई अहम मानकों पर डीपसीक आर1 और गूगल के जेमिनी फ्लैश जैसे जाने-माने सिस्टम को भी पीछे छोड़ता हुआ नज़र आता है। यह इस बात का साफ संकेत है कि भारत में बने मॉडल अब वैश्विक स्तर की तकनीक से सीधी प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता रखते हैं, न कि सिर्फ उनकी नकल करने की।

भारतीय भाषाओं पर ज़ोर

इन मॉडलों की एक और बहुत बड़ी खासियत भारतीय भाषाओं पर उनका विशेष ध्यान है। ज़्यादातर विदेशी मॉडल अंग्रेज़ी को ही केंद्र में रखकर बनाए जाते हैं, जबकि भारत जैसे विशाल बहुभाषी देश की ज़रूरतें उनसे काफी अलग हैं। स्थानीय भाषाओं में बेहतर काम करने वाले मॉडल आम लोगों तक तकनीक पहुँचाने में बेहद मददगार साबित हो सकते हैं।

यह इतना मायने क्यों रखता है

इस पूरी कोशिश के पीछे असल में आत्मनिर्भरता की गहरी सोच काम कर रही है। किसी भी देश के लिए अपनी सबसे अहम तकनीक पूरी तरह विदेशी कंपनियों के हाथ में छोड़ देना काफी जोखिम भरा हो सकता है। अपने खुद के मॉडल और कंप्यूटिंग ढांचे के साथ भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसका डेटा और उसकी दिशा उसके अपने नियंत्रण में ही बनी रहे।

अभी लंबा रास्ता बाकी

हालांकि जश्न मनाने के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को भी ठीक से समझना उतना ही ज़रूरी है। कंप्यूटिंग की भारी ज़रूरत, कुशल विशेषज्ञों की कमी और लगातार बदलती वैश्विक तकनीक जैसी बड़ी चुनौतियाँ अब भी बनी हुई हैं। एक मॉडल पेश कर देना तो महज़ शुरुआत है, असली परीक्षा उसे व्यापक रूप से और सचमुच उपयोगी बनाने में है।

कुल मिलाकर, साल 2026 भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता की यात्रा में एक बेहद अहम मोड़ के रूप में याद रखा जा सकता है। इंडियाएआई मिशन की मज़बूत नींव और सर्वम जैसे मॉडलों के साथ, देश ने यह साफ कर दिया है कि वह इस वैश्विक दौड़ में सिर्फ एक दर्शक नहीं, बल्कि एक गंभीर खिलाड़ी बनना चाहता है। आने वाले वर्ष ही तय करेंगे कि यह सपना आखिर कितना साकार होता है।

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Rohan Verma 2026-09-21 · 4 min read · 37 reads
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