इंडियाAI मिशन के तहत भारत संप्रभु कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दिशा में तेज़ी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने 10,371 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है और फरवरी 2026 के शिखर सम्मेलन में तीन स्वदेशी एआई मॉडल पेश किए गए।
इंडियाAI मिशन का बजट
इस पूरे प्रयास की नींव सरकार का बड़ा वित्तीय संकल्प है। रिपोर्ट के अनुसार, इंडियाAI मिशन को मार्च 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 10,371 करोड़ रुपये यानी लगभग 1.25 अरब डॉलर की राशि से स्वीकृत किया गया था, जिसे किसी भी विकासशील देश द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता में किया गया सबसे बड़ा सरकारी निवेश बताया जा रहा है।
कंप्यूटिंग क्षमता इस मिशन का केंद्र बिंदु है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 के मध्य तक लगभग 34,000 जीपीयू तैनात किए जा चुके थे, और सरकार ने 20,000 अतिरिक्त जीपीयू की घोषणा करते हुए निकट भविष्य में 54,000 तथा दिसंबर 2026 तक एक लाख सार्वजनिक जीपीयू तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है।
निजी क्षेत्र की भागीदारी इस क्षमता को और बढ़ा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस, टाटा तथा अंतरराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा भारत में बनाए जा रहे बुनियादी ढांचे के चलते वर्ष के अंत तक देश की कुल जीपीयू क्षमता दो लाख से अधिक होने की उम्मीद है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए मज़बूत आधार तैयार करेगी।
तीन स्वदेशी एआई मॉडल

इस दिशा में सबसे बड़ी घोषणा नए मॉडलों की रही। रिपोर्ट के अनुसार, 19 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में भारत ने अपने तीन स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल पेश किए, जो देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माने जा रहे हैं।
इनमें सबसे अधिक चर्चा सार्वम एआई के मॉडलों की रही। रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु स्थित सार्वम एआई ने 30 अरब तथा 105 अरब पैरामीटर वाले दो बड़े भाषा मॉडल जारी किए, जो मिश्रित विशेषज्ञ यानी मिक्सचर ऑफ एक्सपर्ट्स संरचना पर आधारित हैं, पूरी तरह भारत में प्रशिक्षित हैं और अपाचे 2.0 लाइसेंस के तहत ओपन सोर्स किए गए हैं।
सार्वम को सरकार का विशेष समर्थन मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने भारत का पहला स्वदेशी बड़ा भाषा मॉडल बनाने के लिए सरकारी निविदा जीती थी, और बताया जा रहा है कि इसके मॉडल तर्क, प्रोग्रामिंग तथा एजेंटिक कार्यों में कुछ प्रमुख विदेशी मॉडलों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
भारतीय भाषाओं पर ज़ोर
स्वदेशी मॉडलों का एक बड़ा उद्देश्य भारतीय भाषाओं को सशक्त बनाना है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ग्नानी एआई ने वचन नामक टेक्स्ट टू स्पीच मॉडल पेश किया, जो बारह भारतीय भाषाओं का समर्थन करता है और दस सेकंड से भी कम के संदर्भ ऑडियो से आवाज़ की नकल करने में सक्षम है, तथा सरकारी सेवाओं और उद्यमों के लिए तैयार किया गया है।
तीसरा मॉडल शिक्षा जगत से जुड़े गठबंधन का है। रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटी बॉम्बे के नेतृत्व वाले भारतजेन गठबंधन ने पैरम2 नामक 17 अरब पैरामीटर वाला बहुभाषी मॉडल जारी किया, जो भारतीय भाषाओं के लिए अनुकूलित है और शासन, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा कृषि जैसे क्षेत्रों के लिए बनाया गया है, और इसे इंडियाAI मिशन के तहत सबसे बड़ी वित्तीय सहायता मिली।
संप्रभु एआई का अर्थ
इन सभी प्रयासों के पीछे संप्रभुता की सोच है। रिपोर्ट के अनुसार, आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शिखर सम्मेलन में जीपीयू विस्तार की घोषणा करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत के डेटा पर प्रशिक्षित और भारतीय संस्थाओं द्वारा संचालित मॉडल एक भरोसेमंद तथा जांच योग्य विकल्प प्रदान करते हैं, जो विदेशी प्रदाताओं पर निर्भरता कम करते हैं।
स्टार्टअप और डेवलपर्स को भी इस मिशन से सीधा लाभ मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने जीपीयू सब्सिडी के रूप में सौ करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की है और एक दर्जन से अधिक कंपनियों को समर्थन के लिए चुना है, ताकि कम लागत पर कंप्यूटिंग उपलब्ध कराकर देश में एआई नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके।
आगे की राह
कुल मिलाकर, ये कदम भारत की एक स्पष्ट रणनीति की ओर इशारा करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बड़े सरकारी बजट, बढ़ती जीपीयू क्षमता और स्वदेशी मॉडलों के संयोजन से भारत खुद को केवल एआई सेवाएं देने वाले देश के बजाय एक संप्रभु एआई राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहा है, और आने वाले महीनों में इसकी प्रगति पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।
यहाँ संप्रभु एआई के बारे में काफी कुछ सीखा.
एक शांत सोचा समझा लेख.
संप्रभु एआई के बारे में बहुत उपयोगी लेख.
पूरी तरह सहमत.
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