बेंगलुरु की कंपनी सर्वम् भारतीय भाषाओं के लिए बड़े भाषा मॉडल बना रही है और हाल ही में यूनिकॉर्न बन गई है। जानिए इस स्वदेशी तकनीक कंपनी की पूरी कहानी और इसके नए मॉडल।
भारत अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अपनी स्वदेशी क्षमता तेज़ी से बढ़ा रहा है, और इसका एक प्रमुख उदाहरण बेंगलुरु की कंपनी सर्वम् है। यह कंपनी भारतीय भाषाओं के लिए विशेष रूप से तैयार बड़े भाषा मॉडल विकसित कर रही है। इस लेख में हम सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर बताएँगे कि सर्वम् आखिर है क्या, इसने अब तक क्या बनाया है, और यह इन दिनों इतनी चर्चा में क्यों है।
सर्वम् क्या है
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सर्वम् एक भारतीय कंपनी है जो बड़े भाषा मॉडल और बहु-रूपी कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियाँ विकसित करती है, जिनका ध्यान भारतीय भाषाओं और स्थानीय ज़रूरतों पर केंद्रित है। इसका मुख्यालय कर्नाटक के बेंगलुरु शहर में है। कंपनी का लक्ष्य ऐसी तकनीक बनाना है जो भारत की विविध भाषाई ज़रूरतों को बेहतर ढंग से समझ सके और आम लोगों तक उन्हें पहुँचा सके।
कंपनी की शुरुआत
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सर्वम् की स्थापना अगस्त 2023 में विवेक राघवन और प्रत्युष कुमार ने की थी। दोनों संस्थापक इससे पहले आईआईटी मद्रास से जुड़ी एक भाषा तकनीक पहल का हिस्सा रह चुके हैं, जहाँ भारतीय भाषाओं पर गहन काम किया जाता था। इसी अनुभव ने कंपनी को शुरुआत से ही भारतीय भाषाओं पर केंद्रित रहने की स्पष्ट दिशा दी, जो आज इसकी सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है।
इंडियाएआई मिशन में भूमिका

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अप्रैल 2025 में भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सर्वम् को उन कंपनियों में चुना जो इंडियाएआई मिशन के तहत एक स्वदेशी आधारभूत मॉडल विकसित करेंगी। इसके साथ ही कंपनी को मॉडल के प्रशिक्षण के लिए सरकार समर्थित कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुँच भी मिली, जो इस तरह के भारी-भरकम काम के लिए बेहद ज़रूरी माने जाते हैं।
नए मॉडल पेश किए
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फ़रवरी 2026 में कंपनी ने दो बड़े मॉडल पेश किए। पहला, सर्वम्-30, जिसमें लगभग 30 अरब पैरामीटर हैं और जो विशेषज्ञों के मिश्रण वाली डिज़ाइन पर आधारित है। दूसरा, सर्वम्-105, जिसमें करीब 105 अरब पैरामीटर हैं और जिसे जटिल तर्क तथा व्यावसायिक उपयोग के लिए तैयार किया गया है। ये दोनों मॉडल कंपनी की तेज़ तकनीकी प्रगति को दर्शाते हैं।
आम लोगों के लिए चैटबॉट
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनी ने इंडस नाम से एक चैटबॉट भी पेश किया है, जो सर्वम्-105 मॉडल पर आधारित है और ऐप स्टोर पर उपलब्ध है। इससे पहले कंपनी अक्तूबर 2024 में सर्वम्-1 और मई 2025 में सर्वम्-एम जैसे मॉडल भी जारी कर चुकी है। इस तरह कंपनी ने कुछ ही वर्षों में लगातार नए उत्पाद पेश करके अपने काम की गति को प्रभावशाली ढंग से बनाए रखा है।
यूनिकॉर्न का दर्जा
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनी को निवेशकों का भी भरपूर समर्थन मिला है। दिसंबर 2023 में इसे लगभग 41 मिलियन डॉलर की शुरुआती फंडिंग मिली थी। इसके बाद जून 2026 में कंपनी ने एचसीएलटेक के नेतृत्व में करीब 234 मिलियन डॉलर जुटाए और लगभग 1.5 अरब डॉलर के मूल्यांकन के साथ यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल कर लिया। यह भारतीय तकनीकी क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
आधार सेवाओं से जुड़ाव
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मार्च 2025 में सर्वम् ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के साथ मिलकर काम करने की घोषणा की थी। इस साझेदारी का उद्देश्य आधार सेवाओं में आवाज़ आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता को जोड़ना था, ताकि लोग अपनी भाषा में आसानी से इन सेवाओं का उपयोग कर सकें। यह दिखाता है कि तकनीक को आम नागरिकों तक पहुँचाने पर कितना ज़ोर दिया जा रहा है।
भारतीय भाषाओं पर ज़ोर
भारत में सैकड़ों भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती हैं, इसलिए ऐसे मॉडल की ज़रूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी जो इन भाषाओं को ठीक से समझ सकें। अधिकांश वैश्विक प्रणालियाँ मुख्य रूप से अंग्रेज़ी और कुछ बड़ी भाषाओं के आसपास बनी हैं। इसी कमी को पूरा करने की कोशिश में भारतीय भाषाओं पर केंद्रित मॉडल एक बेहद महत्वपूर्ण और व्यावहारिक कदम बनकर उभरते हैं।
स्वदेशी तकनीक की ओर
सर्वम् की कहानी भारत की उस व्यापक कोशिश का हिस्सा है, जिसमें देश अपनी स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमता विकसित करना चाहता है। सरकारी समर्थन, कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुँच और निजी निवेश मिलकर एक ऐसा माहौल बना रहे हैं जिसमें घरेलू कंपनियाँ बड़े पैमाने पर काम कर सकें। इसका उद्देश्य दूसरों पर निर्भरता कम करना और अपनी ज़रूरतों के अनुसार तकनीक तैयार करना है।
आगे की चुनौतियाँ
हालाँकि अब तक की प्रगति उत्साहजनक है, फिर भी आगे का रास्ता आसान नहीं है। बड़े मॉडल बनाने के लिए भारी मात्रा में डेटा, कंप्यूटिंग शक्ति और कुशल विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है, और इस क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा बहुत तेज़ है। किसी भी नई तकनीक की तरह, इसका असली मूल्य तभी सामने आएगा जब यह वास्तविक उपयोग में लोगों के लिए भरोसेमंद और उपयोगी साबित होगी।
क्यों यह अहम है
कुल मिलाकर, सर्वम् की यह यात्रा इस बात का उदाहरण है कि भारत किस तरह भाषा तकनीक के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रहा है। भारतीय भाषाओं पर केंद्रित मॉडल केवल तकनीकी उपलब्धि भर नहीं हैं, बल्कि करोड़ों लोगों तक डिजिटल सेवाएँ उनकी अपनी भाषा में पहुँचाने का ज़रिया भी बन सकते हैं। यदि यह गति इसी तरह बनी रही, तो आने वाले वर्षों में इसका असर बहुत व्यापक हो सकता है।

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