avalw
⚲
रेगिस्तान में दिन में भीषण गर्मी और रात में कड़ाके की ठंड क्यों पड़ती है SCIENCE · IN

रेगिस्तान में दिन में भीषण गर्मी और रात में कड़ाके की ठंड क्यों पड़ती है

सान्या सिंह सान्या सिंह sanyasingh.avalw.com · 898 reads Respect0 Save Share Read only
READS31live count PUBLISHED20 Sept2026 READING TIME3 min654 words LANGUAGEHindi
AI CITATIONS? Gathering data

रेगिस्तान का नाम सुनते ही तपती रेत और झुलसाने वाली गर्मी का खयाल आता है। लेकिन रेगिस्तान में रात बिताने वाले जानते हैं कि वही रेत रात होते-होते बर्फ जैसी ठंडी हो जाती है। दिन और रात के इस भारी तापमान अंतर के पीछे छिपे विज्ञान को समझते हैं।

ALSO ON THE CREATOR SITERead this on sanyasingh.avalw.comOpen

रेगिस्तान का जिक्र आते ही हमारे मन में तपती रेत, चटकती धूप और झुलसाने वाली गर्मी की तस्वीर उभरती है। दिन के समय यहां का तापमान इतना ऊंचा चढ़ जाता है कि खुले में खड़ा रहना तक मुश्किल हो जाता है। मगर हैरानी की बात यह है कि यही तपता हुआ रेगिस्तान रात होते ही बेहद ठंडा हो जाता है।

दिन और रात का अनोखा फर्क

रेगिस्तान में दिन और रात के तापमान का अंतर सामान्य इलाकों की तुलना में कहीं अधिक होता है। एक गर्म रेगिस्तान में दिन के समय पारा अक्सर अड़तीस डिग्री सेल्सियस या उससे भी ऊपर पहुंच जाता है, जबकि रात में यह गिरकर शून्य के आसपास तक आ सकता है।

इसका मतलब है कि केवल कुछ घंटों के भीतर तापमान में करीब चालीस डिग्री तक का भारी बदलाव आ जाता है। जो जगह दिन में भट्ठी की तरह तपती है, वही रात में कंपकंपा देने वाली ठंड में बदल जाती है, और इसके पीछे कुछ बहुत ही रोचक वैज्ञानिक कारण छिपे हुए हैं।

हवा में नमी की कमी

दिन के समय तपती हुई रेत बहुत तेजी से गर्म होती है, लेकिन सूरज ढलते ही यह उतनी ही तेजी से अपनी गर्मी खो देती है।
दिन के समय तपती हुई रेत बहुत तेजी से गर्म होती है, लेकिन सूरज ढलते ही यह उतनी ही तेजी से अपनी गर्मी खो देती है।

इस पहेली का सबसे बड़ा कारण रेगिस्तान की बेहद सूखी हवा है। आमतौर पर हवा में मौजूद जलवाष्प एक कंबल की तरह काम करती है, जो दिन भर में जमा हुई गर्मी को धरती के पास रोककर रखती है और रात में उसे तेजी से बाहर नहीं जाने देती।

रेगिस्तान में यह जलवाष्प बहुत कम होती है, इसलिए यहां वह गरमाहट रोकने वाला कंबल लगभग गायब रहता है। नतीजा यह होता है कि सूरज ढलते ही दिन भर की सारी गर्मी बिना किसी रुकावट के सीधे आसमान की ओर विकिरित होकर अंतरिक्ष में लौट जाती है।

बादलों का न होना

गर्मी के इस तेजी से निकल जाने में बादलों की कमी भी बड़ी भूमिका निभाती है। बादल भी एक ढाल की तरह काम करते हैं, जो जमीन से उठने वाली गर्मी को वापस नीचे की ओर परावर्तित कर देते हैं और इस तरह रात में तापमान को अधिक गिरने से रोकते हैं।

रेगिस्तान के ऊपर आसमान अक्सर बिल्कुल साफ रहता है और बादल न के बराबर होते हैं। ऐसे खुले और साफ आसमान के नीचे गर्मी को रोकने वाला कोई परदा नहीं होता, इसलिए ऊष्मा और भी आसानी से ऊपर उठकर बाहर निकल जाती है और रातें बहुत ठंडी हो जाती हैं।

रेत की खास प्रकृति

इस पूरी प्रक्रिया में रेत का अपना खास स्वभाव भी शामिल है। रेत में गर्मी को सहेजकर रखने की क्षमता बहुत कम होती है, इसलिए यह दिन में सूरज की रोशनी पड़ते ही बहुत जल्दी गरम हो जाती है, मानो कुछ ही देर में आग की तरह तपने लगती हो।

लेकिन जिस तेजी से रेत गरम होती है, उतनी ही तेजी से वह ठंडी भी हो जाती है। पानी या नम मिट्टी की तरह रेत गर्मी को देर तक अपने भीतर नहीं रोक पाती, इसलिए सूरज डूबते ही वह अपनी सारी संचित ऊष्मा जल्दी छोड़ देती है और जमीन तेजी से ठंडी पड़ने लगती है।

जीवन के लिए चुनौती

तापमान का यह भारी उलटफेर रेगिस्तान में रहने वाले जीव-जंतुओं और पौधों के लिए एक कड़ी परीक्षा है। उन्हें एक ही दिन में झुलसाने वाली गर्मी और हड्डियां कंपा देने वाली ठंड, दोनों का सामना करना पड़ता है, जो किसी भी शरीर के लिए आसान नहीं होता।

यही कारण है कि रेगिस्तान के कई जीव दिन के सबसे गर्म घंटों में बिलों और छाया में छिपे रहते हैं और रात के ठंडे समय में सक्रिय होते हैं। प्रकृति ने इन जीवों को इस चरम वातावरण में जीने के लिए अनेक अनोखी तरकीबों से लैस किया है।

एक ही रेगिस्तान, दो दुनिया

इस तरह एक ही रेगिस्तान दिन और रात में मानो दो बिल्कुल अलग दुनियाओं में बदल जाता है। दिन का तपता हुआ मैदान रात में एक ठंडे, शांत और तारों भरे विस्तार में बदल जाता है, और यह बदलाव हर बार उतना ही नाटकीय होता है।

भारत के थार जैसे रेगिस्तानों में भी यही खेल हर रोज दोहराया जाता है। दिन और रात के इस अंतर को समझना हमें याद दिलाता है कि हवा, नमी और जमीन के बीच का नाजुक संतुलन ही हमारे आसपास के मौसम को इतने अद्भुत रूप देता है।

0 responses
No responses yet. Be the first to add one.
सान्या सिंह
Follow this desk
सान्या सिंह
Create a free account to follow सान्या सिंह. New stories land in your feed, and you can save any of them to your own reading lists.
Your library & lists →
सान्या सिंह
WRITTEN BY THE AUTHOR
सान्या सिंह 2026-09-20 · 3 min read · 31 reads
View profile →
VERIFY THIS STORY
ASK AI
सान्या सिंह Keep subscribing to सान्या सिंहHer next filing reaches you the moment it publishes, on her own subdomain.
Up next
More
Statistics Search Become a creator Alliances About Terms Privacy