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इंद्रधनुष, आसमान में रंगों का जादू और उसके पीछे का विज्ञान CLIMATE · IN

इंद्रधनुष, आसमान में रंगों का जादू और उसके पीछे का विज्ञान

सान्या सिंह सान्या सिंह sanyasingh.avalw.com · 898 reads Respect0 Save Share Read only
READS11live count PUBLISHED2 Oct2026 READING TIME4 min729 words LANGUAGEHindi
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बारिश के बाद आसमान में दिखने वाला रंगीन इंद्रधनुष सदियों से सबको मोहित करता आया है। जानिए यह सुंदर घटना असल में कैसे बनती है, इसके रंगों का क्रम क्या होता है और दोहरा इंद्रधनुष आसमान में कैसे दिखाई देता है।

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बारिश के बाद जब आसमान में रंगों का एक सुंदर मेहराब दिखाई देता है, तो देखने वाले हर किसी का मन खुशी से भर जाता है। सदियों से इंद्रधनुष लोगों को मोहित करता आया है और इसके पीछे अनेक कहानियाँ और पुरानी मान्यताएँ जुड़ी रही हैं। लेकिन इस खूबसूरत नज़ारे के पीछे विज्ञान का एक बहुत ही रोचक रहस्य भी छिपा हुआ है।

इंद्रधनुष क्या है

इंद्रधनुष असल में प्रकाश से जुड़ी एक प्राकृतिक घटना है, जो आसमान में एक बड़े रंगीन मेहराब के रूप में दिखाई देती है। यह तब बनता है जब सूरज की रोशनी हवा में मौजूद पानी की नन्ही नन्ही बूँदों से होकर गुज़रती है। यही कारण है कि हमें इंद्रधनुष अक्सर बारिश के ठीक बाद ही देखने को मिलता है।

यह कोई ठोस वस्तु नहीं है जिसे हम अपने हाथों से छू सकें या जिसके पास जाकर खड़े हो सकें। यह केवल प्रकाश और पानी की बूँदों के आपसी मेल से बनने वाला एक बेहद सुंदर दृश्य है। इसी वजह से यह आसमान में कुछ समय के लिए प्रकट होकर धीरे धीरे फिर से गायब हो जाता है।

यह कैसे बनता है

जब सूरज की सफ़ेद रोशनी पानी की एक नन्ही बूँद के भीतर प्रवेश करती है, तो वह अपनी सीधी राह से थोड़ा मुड़ जाती है। बूँद के भीतर पहुँचकर यह रोशनी उसकी पिछली सतह से टकराकर वापस लौटती है और फिर बाहर निकलते समय एक बार दोबारा मुड़ जाती है।

इसी बार बार मुड़ने और लौटने की प्रक्रिया में सफ़ेद रोशनी अपने अलग अलग रंगों में बँट जाती है। हमें जो रोशनी सफ़ेद दिखती है, वह असल में कई रंगों के मेल से मिलकर बनी होती है। लाखों बूँदों में एक साथ यह प्रक्रिया होने पर हमें आसमान में पूरा रंगीन इंद्रधनुष दिखाई देता है।

इसके सुंदर रंग

इंद्रधनुष की सबसे खास बात उसके चमकीले और एक के बाद एक सजे हुए सुंदर रंग होते हैं। परंपरागत रूप से इसमें सात रंग गिने जाते हैं, जो लाल रंग से शुरू होकर बैंगनी रंग तक फैले रहते हैं। ये सभी रंग एक दूसरे में इतनी कोमलता से घुलमिल जाते हैं कि देखते ही मन मोह लेते हैं।

सामान्य इंद्रधनुष में सबसे बाहरी किनारे पर लाल रंग होता है और सबसे भीतरी किनारे पर बैंगनी रंग रहता है। बाकी सारे रंग इन्हीं दोनों रंगों के बीच एक निश्चित क्रम में सजे रहते हैं। रंगों का यह सुंदर क्रम लगभग हर इंद्रधनुष में एक जैसा ही दिखाई देता है।

सूरज और देखने वाले की स्थिति

इंद्रधनुष देखने के लिए सूरज, पानी की बूँदें और देखने वाले की सही स्थिति, इन तीनों का एक साथ होना बहुत ज़रूरी है। सबसे खास बात यह है कि सूरज हमेशा देखने वाले की पीठ के पीछे होता है, जबकि बारिश उसके ठीक सामने की ओर हो रही होती है।

यही वजह है कि इंद्रधनुष हमेशा सूरज की बिलकुल विपरीत दिशा में आसमान में दिखाई देता है। ज़मीन पर खड़े होकर देखने पर हमें इसका केवल ऊपरी आधा मेहराब ही नज़र आता है। इसलिए सुबह या शाम के समय, जब सूरज आसमान में नीचे होता है, इंद्रधनुष अधिक बड़ा और स्पष्ट दिखता है।

दोहरा इंद्रधनुष

कभी कभी आसमान में एक साथ दो इंद्रधनुष दिखाई देते हैं, जिनमें दूसरा थोड़ा धुँधला होता है और उसके रंगों का क्रम पहले से उल्टा होता है।
कभी कभी आसमान में एक साथ दो इंद्रधनुष दिखाई देते हैं, जिनमें दूसरा थोड़ा धुँधला होता है और उसके रंगों का क्रम पहले से उल्टा होता है।

कभी कभी आसमान में हमें एक साथ दो दो इंद्रधनुष भी दिखाई दे जाते हैं, जो सचमुच एक अनोखा नज़ारा होता है। ऐसा तब होता है जब रोशनी पानी की बूँद के भीतर एक की जगह पूरे दो बार परावर्तित होकर बाहर निकलती है। इसे ही दोहरा इंद्रधनुष कहा जाता है और यह देखने में बेहद सुंदर लगता है।

इस दूसरे इंद्रधनुष के रंग पहले वाले इंद्रधनुष की तुलना में थोड़े धुँधले होते हैं और उनका क्रम भी उल्टा हो जाता है। यह हमेशा पहले इंद्रधनुष के बाहर की ओर बनता है और उससे कुछ दूरी पर दिखाई देता है। दोनों इंद्रधनुषों के बीच का आसमान अक्सर बाकी हिस्से की तुलना में थोड़ा गहरा नज़र आता है।

एक अनोखी घटना

इंद्रधनुष की सबसे रोचक बात यह है कि इसकी कोई तय जगह नहीं होती जहाँ वह सचमुच मौजूद रहता हो। हर व्यक्ति अपनी अपनी स्थिति से थोड़ा अलग इंद्रधनुष देखता है, भले ही वे एक दूसरे के पास पास ही क्यों न खड़े हों। यही कारण है कि चलकर उसके किनारे तक कभी भी पहुँचा नहीं जा सकता।

जैसे जैसे हम उसकी ओर आगे बढ़ते हैं, इंद्रधनुष भी हमसे उतना ही आगे दूर खिसकता चला जाता है। शायद इसी रहस्यमयी स्वभाव के कारण यह सदियों से तरह तरह की कहानियों और कल्पनाओं का हिस्सा रहा है। विज्ञान की मदद से इसे समझ लेने के बाद भी इसका जादू आज तक ज़रा भी कम नहीं हुआ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंद्रधनुष बनने के लिए सूरज और देखने वाले की स्थिति कैसी होनी चाहिए?

इंद्रधनुष देखने के लिए सूरज हमेशा देखने वाले की पीठ के पीछे और बारिश उसके ठीक सामने की ओर होनी चाहिए। इसी कारण यह प्रकाश सूरज की बिल्कुल विपरीत दिशा में आसमान में दिखाई देता है।

साधारण इंद्रधनुष में रंगों का क्रम कैसा होता है?

सामान्य इंद्रधनुष में सबसे बाहरी किनारे पर लाल रंग और सबसे भीतरी किनारे पर बैंगनी रंग होता है। बाकी सभी रंग इन दोनों के बीच एक निश्चित क्रम में सजे रहते हैं।

दोहरा इंद्रधनुष सामान्य इंद्रधनुष से कैसे अलग होता है?

दोहरा इंद्रधनुष तब बनता है जब रोशनी पानी की बूँद के भीतर दो बार परावर्तित होकर बाहर निकलती है। इसमें रंग पहले वाले इंद्रधनुष की तुलना में धुँधले होते हैं और उनका क्रम उल्टा हो जाता है।

क्या इंद्रधनुष की कोई तय जगह होती है जहाँ वह स्थिर रूप से मौजूद रहता है?

नहीं, इंद्रधनुष की कोई तय जगह नहीं होती क्योंकि यह केवल प्रकाश और पानी की बूँदों के आपसी मेल से बनने वाला एक दृश्य है। हर व्यक्ति अपनी अपनी स्थिति से थोड़ा अलग इंद्रधनुष देखता है और चलकर उसके किनारे तक पहुँचा नहीं जा सकता।

सूरज की सफेद रोशनी इंद्रधनुष के रंगों में कैसे बदलती है?

जब सूरज की सफेद रोशनी पानी की बूँद के भीतर प्रवेश करती है तो वह मुड़ती है, पिछली सतह से टकराकर वापस लौटती है और फिर बाहर निकलते समय दोबारा मुड़ती है। इस प्रक्रिया में सफेद रोशनी अपने अलग अलग रंगों में बँट जाती है।

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सान्या सिंह 2026-10-02 · 4 min read · 11 reads
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