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कश्मीर में अक्टूबर की अफ़सोसनाक गर्मी और बर्फबारी का गहरा संकट CLIMATE · IN

कश्मीर में अक्टूबर की अफ़सोसनाक गर्मी और बर्फबारी का गहरा संकट

सान्या सिंह सान्या सिंह sanyasingh.avalw.com · 898 reads Respect0 Save Share Read only
READS15live count PUBLISHED6 Oct2026 READING TIME2 min474 words LANGUAGEHindi
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अल नीनो के प्रभाव और जलवायु परिवर्तन के चलते कश्मीर में अक्टूबर में असामान्य गर्मी दर्ज की गई है, जिससे स्थानीय समुदायों में कम बर्फबारी और आर्थिक नुकसान के खतरे की चिंता बढ़ गई है।

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श्रीनगर के तापमापी ने 4 अक्टूबर को 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया, जो अक्टूबर के लिए असाधारण है। यह तापमान 2008 के 31.1 डिग्री के रिकॉर्ड को तोड़कर नया बेंचमार्क स्थापित करता है।

इस गर्मी के पीछे अल नीनो का असर माना जा रहा है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि केवल इसी कारक को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी। समुद्री और वायुमंडलीय अन्य कारक भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

स्थानीय लोगों की मुख्य चिंता कम बर्फबारी से जुड़ी है। पिछले सात सालों से कश्मीर में सर्दियों की बर्फबारी सामान्य से कम रही है, जिससे पर्यटन और आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

मौसम का असामान्य रुख

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 2026 में अल नीनो जून में कमजोर था और जुलाई में मध्यम स्तर तक पहुंचा। अक्टूबर से दिसंबर तक इसके और मजबूत होने की संभावना है।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत पर इसका प्रभाव केवल अल नीनो से नहीं, बल्कि अन्य जलवायु कारकों से भी तय होता है। इसका मतलब है कि मौसम का इस साल अनिश्चित और उतारचढ़ाव भरा रहना संभव है।

कश्मीर में यह गर्मी स्थानीय जीवनशैली को सीधे प्रभावित कर रही है। लोगों को सामान्य से अधिक गर्मियों जैसी स्थितियों से निपटना पड़ रहा है, जो उनके लिए नई चुनौती है।

मौसम के बदलते रुख को दर्शाने वाले तापमापी और अन्य उपकरण
मौसम के बदलते रुख को दर्शाने वाले तापमापी और अन्य उपकरण

बर्फबारी का गहरा प्रभाव

2019-20 से 2025-26 तक कश्मीर की हर सर्दी सामान्य से कम वर्षा वाली रही है। 2025-26 में वर्षा में करीब 65 प्रतिशत कमी दर्ज की गई, जो एक चिंताजनक ट्रेंड है।

फरवरी 2026 में सामान्य 130.4 मिमी वर्षा के मुकाबले सिर्फ 14.2 मिमी वर्षा हुई, यानी 89 प्रतिशत कमी। श्रीनगर में पूरे सर्दी मौसम में वर्षा 236.5 मिमी के सामान्य के मुकाबले सिर्फ 84.2 मिमी रही।

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि कश्मीर में लगातार कमजोर पश्चिमी विक्षोभ और बदलते जलवायु पैटर्न के कारण बर्फबारी कम या अनियमित हो रही है। यह स्थिति स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।

कश्मीर की घाटी में असामान्य गर्म मौसम का दृश्य
कश्मीर की घाटी में असामान्य गर्म मौसम का दृश्य

आर्थिक और सामाजिक असर

कश्मीरियों का मानना है कि अगर बर्फ कम गिरी, तो बर्फ में तलाश में आने वाले पर्यटकों की संख्या कम हो जाएगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा।

पर्यटन कश्मीर की आर्थिक रीढ़ की हड्डी है। कम बर्फबारी से पर्यटक आकर्षण कम हो सकता है, जिससे स्थानीय कारोबार और रोजगार प्रभावित होंगे।

प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि वह कम बर्फबारी की स्थिति के साथ-साथ अचानक भारी बर्फबारी वाले परिदृश्य के लिए भी तैयारी रखे। यह संतुलन बनाना कठिन है, लेकिन आवश्यक भी।

स्थानीय किसानों की चिंताओं का प्रतिनिधित्व
स्थानीय किसानों की चिंताओं का प्रतिनिधित्व

भविष्य की चिंताएं

अभी कोई अंतिम पूर्वानुमान सामने नहीं आया है, जिससे कश्मीरी असमंजस में हैं। यह अनिश्चितता स्थानीय लोगों के लिए और भी चिंताजनक है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह गर्मी असामान्य है, लेकिन कम बर्फबारी और पूरी सर्दी सामान्य से गर्म रहने का दावा अभी पूर्वानुमान है, तथ्य नहीं।

अगले कुछ महीनों में मौसम की स्थिति का पता चलने पर ही स्थानीय समुदाय और प्रशासन उचित कदम उठा सकेंगे। तब तक चिंता और अनिश्चितता का माहौल बना रहेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रीनगर में 4 अक्टूबर को दर्ज किया गया तापमान कितना था और यह किस रिकॉर्ड को तोड़ता है?

4 अक्टूबर को श्रीनगर में 31.2 डिग्री सेल्सियस का तापमान दर्ज किया गया, जो अक्टूबर के लिए असाधारण है। यह आंकड़ा 2008 के 31.1 डिग्री के पुराने रिकॉर्ड को तोड़कर नया बेंचमार्क स्थापित करता है।

कश्मीर में अक्टूबर की इस असामान्य गर्मी का मुख्य कारण क्या माना जा रहा है?

इस गर्मी के पीछे अल नीनो का असर माना जा रहा है, हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि केवल इसी कारक को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी। समुद्री और वायुमंडलीय अन्य कारक भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

2025-26 सर्दियों में कश्मीर की बर्फबारी में कितनी कमी दर्ज की गई?

2025-26 में कश्मीर की बर्फबारी में करीब 65 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जो एक चिंताजनक ट्रेंड है। यह कमी पिछले सात सालों से जारी कम बर्फबारी की प्रवृत्ति का हिस्सा है।

फरवरी 2026 में श्रीनगर की सामान्य वर्षा के मुकाबले वास्तविक वर्षा कितनी रही?

फरवरी 2026 में सामान्य 130.4 मिमी वर्षा के मुकाबले सिर्फ 14.2 मिमी वर्षा हुई, जिससे 89 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। पूरे सर्दी मौसम में भी वर्षा सामान्य स्तर से काफी कम रही।

कश्मीर की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर कम बर्फबारी का सबसे बड़ा असर किस क्षेत्र पर पड़ रहा है?

कम बर्फबारी से पर्यटन क्षेत्र पर गहरा असर पड़ रहा है, क्योंकि बर्फ की तलाश में आने वाले पर्यटकों की संख्या में कमी आ रही है। इससे स्थानीय कारोबार और रोजगार प्रभावित हो रहे हैं, जो कश्मीर की आर्थिक रीढ़ की हड्डी है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार अल नीनो की तीव्रता अक्टूबर से दिसंबर तक कैसी रहने की संभावना है?

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, अल नीनो जून में कमजोर था और जुलाई में मध्यम स्तर तक पहुंचा है। अक्टूबर से दिसंबर तक इसके और मजबूत होने की संभावना है, जिससे मौसम अनिश्चित और उतारचढ़ाव भरा रह सकता है।

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सान्या सिंह 2026-10-06 · 2 min read · 15 reads
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