उत्तर प्रदेश में नई गन्ना किस्म CoS.23232 की बुकिंग में इतनी भीड़ कि पूरा स्टॉक 5 मिनट में संपर्क हो गया। जानिए इसमें ऐसा क्या है कि किसानों ने इस पर इतना दांव पेश किया है।
9 अक्टूबर की सुबह, जब उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद (UPCSR) ने अपनी वेबसाइट पर नई किस्म CoS.23232 की ऑनलाइन बुकिंग शुरू की, तो शायद किसी ने सोचा नहीं कि बीजों का इतना धमाका होगा। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरविंद कुमार के मुताबिक, बुकिंग शुरू होने के महज पांच मिनट के भीतर ही 2 लाख सिंगल बड्स का पूरा स्टॉक बुक हो चुका था। इतने कम समय में इतनी बड़ी मांग का इंतजाम किसी के पास नहीं था, जिससे बड़ी संख्या में किसान बीज हासिल करने से चूक गए। यह केवल एक बीज की कमी नहीं, बल्कि किसानों की एक उममी की जाहिरात है।
किसानों के बीच इस किस्म को लेकर जो उत्साह देखने को मिल रहा है, वह Co.0238 के बदले के रूप में इसका उपयोग करने की उनकी चिंता को दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों में Co.0238 में रेड रॉट बीमारी की वजह से पैदावार आधी रह गई थी, जिससे राज्य का चीनी उत्पादन 126 लाख टन से गिरकर 89 लाख टन पर आ गया था। ऐसे में CoS.23232 को किसानों ने एक उम्मीद के रूप में देखा है, जो न सिर्फ पैदावार बढ़ाएगी, बल्कि बीमारी से भी बचाएगी।
CoS.23232 में ऐसा क्या है खास?
किसानों की इस दीवानगी की तीन बड़ी वजहें हैं। सबसे पहले, फील्ड ट्रायल में इस किस्म का औसत उत्पादन 95.56 टन प्रति हेक्टेयर रहा है, जो Co.0238 से 9.44% ज्यादा है। इसका गन्ना लंबा और मोटा है, जिससे प्रति क्विंटल वजन 10% ज्यादा बैठता है। यह अतिरिक्त पैदावार किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभदायक है।
दूसरी वजह है रेड रॉट से छुटकारा। CoS.23232 रेड रॉट रोधी है, जो पिछले कुछ वर्षों में किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या बनी हुई थी। तीसरी वजह है कि यह एक अगेती (early-maturing) किस्म है। किसान इसे जल्दी काटकर चीनी मिलों में भेज सकते हैं, जिससे उन्हें पेमेंट भी जल्दी मिलेगा और चीनी मिलों को रिकवरी भी ज्यादा मिलेगी। यह त्रिगुण इस किस्म को बाजार में अलग कर देता है।
यह किस्म बनाने में वैज्ञानिकों को 10 से 12 साल लगे हैं। इसे Coimbatore में CoS.8119 (Female) और Co.775 (Male) को क्रॉस करके बनाया गया है। इसके बाद सालों तक इसकी मिठास, पैदावार और बीमारी से लड़ने की क्षमता को परखा गया है। यूपी सरकार ने 29 सितंबर को ही इसे खेती के लिए मंजूर किया था।

बीज की आपूर्ति और भविष्य की योजनाएं
परिषद अब टिश्यू कल्चर और सिंगल बड तकनीक से इसका बीज तेजी से बढ़ा रहा है। अक्टूबर में होने वाले 'मिठास मेला 2026' में किसानों को इसके मिनी किट भी बांटे जाएंगे। यह कदम किसानों तक बीज पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
हालांकि, 5 मिनट में पूरा स्टॉक खत्म होने का मामला बताता है कि मांग की तुलना में आपूर्ति अभी भी पिछड़ रही है। किसानों के लिए बीज हासिल करना अब एक चुनौती बन गया है, जिसका हल केवल समय और संसाधन उपलब्ध कराने से मिलेगा।

किसानों की उम्मीदें और संभावनाएं
CoS.23232 की सफलता किसानों के लिए न सिर्फ आर्थिक लाभ का स्रोत है, बल्कि यह एक नई उम्मीद की भी चमक है। पिछले कुछ वर्षों में रेड रॉट की वजह से किसानों का मनोबल गिरा हुआ था, लेकिन इस नई किस्म ने उनमें फिर से आत्मविश्वास जगा दिया है।
भविष्य में, यदि बीज की आपूर्ति समय पर और पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहती है, तो CoS.23232 उत्तर प्रदेश के गन्ना खेती के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव साबित हो सकती है। यह न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि राज्य के चीनी उत्पादन में भी सुधार लाएगी।

चुनौतियां और आगे का रास्ता
हालांकि, बीज की कमी और समय पर उपलब्धता की चुनौतियां अभी भी बनाई हुई हैं। किसानों के लिए बीज हासिल करना अब एक मुश्किल काम है, जिसका हल केवल समय और संसाधन उपलब्ध कराने से मिलेगा। परिषद को अब बीज की आपूर्ति को तेज करना होगा ताकि किसानों को नुकसान न हो।
इसके साथ ही, किसानों को नई किस्म के उपयोग के बारे में सही जानकारी देने की भी ज़रूरत है। यदि किसानों को इस किस्म के फायदे और उपयोग के तरीके की सही जानकारी मिलती है, तो इसका सही उपयोग हो सकता है।
भविष्य में, यदि बीज की आपूर्ति समय पर और पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहती है, तो CoS.23232 उत्तर प्रदेश के गन्ना खेती के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव साबित हो सकती है। यह न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि राज्य के चीनी उत्पादन में भी सुधार लाएगी।
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